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धर्मालय > किया-कराया; जादू-टोना; काला-जादू

चमत्कारिक टोने टोटके

चमत्कारिक टोने टोटके (रोग, शोक, वशीकरण, विद्वेषण और उच्चाटन) टोने टोटके से बचने के उपाय नदी के झाड़ , वृक्ष की जड़ लाकर उसमें कूड़े की छान मिलावें तथा चूर्ण कर लें, फिर इन दोनों के बराबर श्मशान की राख मिलाकर जिसके ऊपर इसे डाला जाएगा वह वश में हो जायेगा।

विशेष चमत्कारी टोटके

विशेष चमत्कारी टोटके (Special miracle tricks) लोबान के पौधे की जड़ को सूत से गले में धारण करने से असाध्य खाँसी क रोग भी खत्म हो जाता है बंदर की एक नौ अंगूल की अस्थि लेकर , उसे धुप दीप देकर गाँव की सीमा में गड़वा दें। इस क्रिया से

वशीकरण के अचूक टोटके

यहाँ धर्मालय द्वारा लाल कितान से वशीकरण के कुछ अचूक और प्रभावशाली टोटके दिए हुए हैं. वशीकरण के यह सरल टोटके बिना किसी वशीकरण मंत्र या फोटो के किये जा सकते हैं. वशीकरण के टोटके - स्त्री जिन दिनों रजस्वला हो उन दिनों अखंडित लौंग उन्हें अपनी भग में भिगोवें.. तत्पश्चात उन

टोने-टोटके; विघ्न बाधा निवारण

टोने-टोटके; विघ्न बाधा निवारण (Sorcery; Troubleshooting)   ऐसे चमत्कारिक टोटके , जिसमें किसी सिद्धि की आवश्यकता नहीं। ये सभी प्राचीनकाल से ही परीक्षित है। धर्मालय किसी भी विषय पर प्रमाणिक मटेरियल को ही स्थान देता है । टोन टोटके के उपाय शनिवार के दिन कच्ची धानी का सरसों का तेल ले लें। उसमें

खतरनाक किया कराया का लक्षण और निदान(Black Magic)

किसी स्त्री या पुरुष को ऐसे भयभीत और झुरझुरा देने वाला सपने आना, जो वह किसी से कह भी न सके।  सुबह कमजोरी होना और सारा दिन बुझे रहना।  मल-मूत्र –दिल की धड़कन-मासिक के विकार रहना। दौरे पड़ना। पैर के तलवों पिंडलियों से या नाभिक के नीचे से किसी

पुतली तंत्र (क्रमांक ५) निर्माण एवं प्रयोग विधि

निर्माण के पदार्थ साध्य के बाल, प्रयोग किये अधोवस्त्र, कुम्हार के चाक की मिट्टी, साध्य के नक्षत्र वृक्ष की छाल, उड़द का आटा, पीपल, काली मिर्च, और गेरू - ये शुभ कार्य के लिए प्रयुक्त होता है. अशुभ कार्य के लिए रसोई की कालिख, चिता की राख, सेंधा और समुद्री नमक, हींग,

पुतली तंत्र – ४ जादू टोना

अन्य विधि में जानकारियों का प्रयोग पुतली तंत्र की विधि थोड़ी जटिल है और उसे वन शीट नें बताना भी पडेगा, इसलिए उसे भाग ५ में बताने की मजबूरी है. ये चार भाग जाने बिन आप पुतली तंत्र की पूरी वैज्ञानिकता नहीं समझ सकते और ना ही प्रयोग कर सकते है.

पुतली तंत्र (क्रमांक 3) समुद्र मंथन का रहस्य

शरीररूपी समुद्र से अमृत और विष की प्राप्ति पुतली तंत्र के क्रमांक १ एवं २ में वर्णित विवरणों के साथ अभिचार कर्म में कुछ अन्य सूत्र भी जानना जरूरी है. ये विवरण तिथियों एवं दिशाओं से सम्बंधित हैं. ये विवरण केवल अभिचार कर्म के लिए ही नहीं हैं. इनको जान कर सामन्य

पुतली तंत्र (क्रमांक २) श्वांसों का विज्ञान – शरीर के मर्म स्थान

पुतली तंत्र में दूसरा महत्वपूर्ण स्थान श्वांसों की गति का है. यहाँ यह जानना समीचीन होगा कि ये जानकारियां सभी मार्ग और विधि में आवश्यक होतीं हैं, जब हम अभिचार कर्म करते हैं. श्वांसों की वाम एवं दक्षिण गति हमारी दो नासिकाएँ हैं. हम दोनों से श्वांस लेते रहते हैं, मगर हमें

पुतली-तंत्र (क्रमांक १) सम्पूर्ण अभिचार रहस्य और विधि (विष एवं अमृत स्थान)

किसी व्यक्ति के शरीर की डमी पुतली बना कर, उसकी प्राण प्रतिष्ठा करके अभिचार की सभी षट्कर्म करने की क्रिया को भारतीय तंत्र में पुतली तंत्र कहा जाता है, पर यही विद्द्या कुछ परिवर्तनों के साथ अफ्रीका में "वुडू" के नाम से जानी जाती है. यह बेहद रहस्यमय और जटिल

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