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धर्मालय > आपके प्रश्न और हमारे उत्तर

समस्याएं ऐसे दूर नहीं होते

समस्याएं ऐसे दूर नहीं होते (Problems are not so distant) प्रश्न – मेरी समस्या धन(Money Problem) की हैं । मैंने धनदा का मंत्र जपा, ज्योतिषी(Astrology) का बताया रत्न पहना, दो घंटे प्रतिदिन लक्ष्मी का जप और रात में दो घंटे धनदा का मंत्र जपता हूँ। मेरी समस्या कैसे दूर होगी? उत्तर –

ये सर्व शक्तिमान और रोता हुआ धर्म ज्ञान

आजकल धर्म की चमचमाती नदियों में बाढ़ आई हुई है. कोई धन दिला रहा है, तो कोई प्रेमिका. पति वश में नहीं है, तो ये तुरन्त एक उपाय से उसे आपका पालतू बना देंगे. काम नहीं बन रहा, बस एक नींबू काट कर आगे पीछे फेक दीजिये, सारे काम बनने

ज्योतिष से समस्या समाधान

हम पहले बता आये है कि ‘धर्मालय’ का सम्पूर्ण धार्मिक , तांत्रिक या प्राचीन विद्याओं से सम्बन्धित आधार अग्नि प्राचीन शास्त्रीय रूप में है; जो वैज्ञानिक आधार पर खड़ा था। इस रूप में समस्याएं दूर करने के लिए कारण जानना आवश्यक होता है। निदान कारण का किया जाता है। यही

कुरुकुल्ला पूजन एवं साधना विधान

प्रश्न – यह कुरुकुल्ला देवी क्या है? इनकी बहुत महिमा सुनी है । कहा जाता है कि इनकी पूजा-अर्चना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ बहुत कम समय में प्राप्त हो जाती है। इनके बारे में कुछ बताईये। उत्तर – देवी मार्ग की कई धाराओं में इस देवी की पूजा और साधना

वास्तु, ज्योतिष , रोग, तंत्राचार आदि से सम्बन्धित प्रश्न और उनके उत्तर

प्रश्न – क्या प्रश्नों एवं शंका समाधान के लिए शुल्क देना होगा? उत्तर – नहीं । धर्मालय ऐसे सभी समस्या प्रधान प्रश्नों के जबाब देता रहा है; जिसमें व्यक्तिगत रूप से काम न करना पड़े । कुण्डली बनाना, फिर समस्या का समाधान बताना , नक्शा देखना, आदि काम है । इसमें

वास्तु विद्या क्या है?

वास्तु विद्या क्या है? क्या यह सत्य में मनुष्य पर प्रभाव डालता है? वह भी उसके भाग्य पर? उत्तर – ‘ वास्तु विद्या’ का शाब्दिक अर्थ निकालिए। इसका अर्थ वस्तु का विज्ञान है , न कि मकानों की विद्या। यह प्राचीन पदार्थ विज्ञान है । चूँकि मकानों में इस विद्या का

पूजा के यंत्र क्या है? क्या इनका वैज्ञानिक महत्त्व है?

यह प्रश्न टेलीफोन पर पूछा गया था और इसके सम्बन्ध में सभी को जानना चाहिए। इसकी वास्तविकता उन पंडितों में भी बहुत कम जानते है; जो इन यंत्रों पर पूजा करवाते है। साधक भी एक प्रकार की अंधी आस्था रखकर ही इसकी पूजा करके अपने ईष्ट की साधना करते है;

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