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वशीकरण के ग्रामीण तांत्रिक टोटके

रविवार के दिन के पुष्य नक्षत्र में जब अमावस्या हो , उस दिन अपना शुक्र किसी भी  मिठाई में मिलाकर जिस स्त्री को खिला दिया जाये, वही वश में हो जाती है। करवीर (कनेर) पुष्य व गोघृत दोनों मिलाकर जिस किसी स्त्री का नाम लेकर 108 बार हवन किया

नजर लगना

रोगी को पीठ के बल लिटा दें। वह कपड़ा बिना दिया हुआ और एक ही पहने हुए हो। आक का के पीला पत्ता लें और उसे घी में चुपड़कर रोगी के सिर से पांव तक 21 बार क्रम से शरीर से आधे इंच ऊपर नीचे की ओर लाकर फिर

प्रेम समस्या

प्रेम समस्या  (Love Problem) आज के आधुनिक युग में ‘प्रेम’ , विशेषकर युवक – युवतियों का प्रेम एक समस्या है। भारतीय समाज इसे स्वीकार नहीं कर रहा है और आधुनिक विचारधारा इसको प्रोत्साहित कर रही है। इससे प्रेमी – जोड़ो को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। दूसरी समस्या प्रेम में

मिर्गी , हिस्टीरिया और प्रेतग्रस्त का अन्तर

मिर्गी , हिस्टीरिया और प्रेतग्रस्त का अन्तर (विशेष शोध निष्कर्ष) मिर्गी इसे संस्कृत में अपस्मार कहा जाता है। यह नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है। कारण अभी तक आधुनिक चिकित्सा को ज्ञात नहीं है। तन्त्र विद्या में कहा गया है की (भावार्थ डिस्कवरी) – मस्तिष्क में विद्युतीय प्रवाह के बाधित होने से यह

क्या स्वर्ग नर्क होते हैं ?

इस प्रश्न का उत्तर हम पहले दे चुके हैं। आपको इसके लिए जीव का विज्ञान समझना होगा। जिसे हम आत्मा कहते है, वह एक नन्हा परमाणु है। हमारी गणना के अनुसार प्रकाश कण से 108(पॉवर 81)  गुणा सूक्ष्म इसका भी आंतरिक पॉवर स्ट्रक्चर है। इसमें सारी संरचना शरीर जैसी होती

अशुभ बृहस्पति (गुरु) के उपचार एवं टोटके

अशुभ बृहस्पति (गुरु) के उपचार एवं  टोटके प्रथम भाव -  1.  पितृ ऋण के लिए निर्दिष्ट उपचार । किसी से दान या मदद(Help) स्वीकार न करें। अपने ही आप पर भरोसा रखें। द्वितीय भाव-  1. घर के सामने सड़क(Road) के गड्ढे भरना। केसर और हल्दी का तिलक लगाना। तृतीय भाव- 1. दुर्गा पूजा

ध्यान योग: प्रायोगिक नियम और सूत्र

ध्यान योग: प्रायोगिक नियम और सूत्र ध्यान और ध्यान के मानसिक केंद्रीयकरण को किसी लक्ष्य से जोड़ने के लिए आवश्यक शर्तें हैं। उनको जानना ज़रूरी है। इन्हें जाने बिना सफलता नहीं मिलेगी, चाहे कितना भी परिश्रम कर लें। एक सबसे पहली बात यह है की आप हर प्रकार के पूर्वाग्रह से

ध्यान योग: भाव का महत्त्व

ध्यान योग: भाव का महत्त्व हम जब भी किसी बात को स्पष्ट करना चाहते हैं; मूर्खों की तरह शास्त्र पढने वाले अंध आस्थावादियों की अंधी आस्थाएं सामने आ जाती है। मैं बार-बार कह रहा हूँ कि आपकी आस्था है, तो अपनी आस्था को पकड़े रहिये। पर जो लोग या विश्व मानवता

ध्यान योग : योग क्रिया से पहले

ध्यान- योग(Meditation-Yoga) : योग क्रिया से पहले आध्यात्मिक(Spiritual) साधनाओं में , चाहे वे तन्त्र मार्ग के हों या किसी भी मार्ग के तीन प्रकार की साधनायें की जाती हैं। यह वर्गीकरण पूजा, अनुष्ठान, ध्यान सभी जगह है। प्राचीनतम काल से साधक , ऋषि, योगी किसी भी साधना आदि की क्रियाओं के

सन्यास और साधना का रहस्य

इस पर हम पहले भी बहुत कुछ कह आये हैं, धर्मालय पढ़िए , सन्यास लेने देने की चीज नहीं है। परिस्थितियों  से निराशा एवं जिन्दगी से उदासीनता का भाव सन्यास नहीं है। कोई घर छोड़ दें , तो उससे उसकी मानसिक दुनिया नष्ट नहीं होती, दुर्गा सप्तशती में इसकी कहानी

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