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क्या है सनातन धर्म?

सनातन का अर्थ है, शाश्वत। जो सदा है, सदा रहेगा और जब हम इस सत्य के मानक पर विचार करेंगे, कोई मनुष्य निर्मित आचार संहिता या पूजा इबादत की व्यवस्था इसमें नहीं आएगी। भला एक नश्वर मनुष्य शाश्वत नियमों की उत्पत्ति किस प्रकार कर सकता है? इसका उत्तर रामायण महाभारत या

शिवलिंग क्या है?

जब ब्रह्म विद्या को समझते नहीं तो तोता मार्का शास्त्र ज्ञान को प्रदर्शित मत करो। यह युग शास्त्र प्रमाण का नहीं प्रत्यक्ष प्रमाण का है। तीन तांबे के ईयर फोन में कान की ओर लगे वायर जितने मोटे तार को ऐंठ कर रस्सी जैसा बनाओ। इन तारों से नीचे से लपेट

सत्संग ज्ञानगंगा

धर्मालय द्वारा चलाये जा रहे , इस सत्संग में कोई भी भाग ले सकता है। आप अपनी कोई भी धार्मिक पारिवारिक या आध्यात्मिक शंका पर प्रश्न पूछ सकते है । गुरुवर श्री प्रेम कुमार शर्मा आपके प्रश्नों के देंगे। आपका परिचय नहीं दिया जायेगा , आप अपना नाम पता या

वशीकरण विधि

हंसपदी (मूसली) की जड़, रक्तचंदन , गोरोचन एक – एल तोला लेकर उसका अर्क खींच लें। इस अर्क को सारिवा के साथ खाने-पीने से प्रियतम सदा वश में रहता है। आकाशवल्ली के पत्ते तथा पुष्प का अर्क एक सप्ताह तक स्त्री – पुरुष एक – दूसरे को दें, तो

तांत्रिक सिद्धि – साधनाओं की प्राप्ति कैसे करें ?

तन्त्र विद्या में आधार शक्ति अपना शरीर और मानसिक शक्ति होती है। इसके अतिरिक्त इसे  सीखने वाले (स्त्री/पुरुष) की प्रबल जिज्ञासा आवश्यक  होती है । इन तीनों में से किसी का भी अभाव हुआ; तो तंत्र विद्या की कोई बात जरूरत के लायक नहीं हुई , तो सिद्धि नहीं मिलती,

मत्स्यावतार का रहस्य

पुराणों में एक अन्य अवतार की भी कथा है। मत्स्यावतार की। जब पृथ्वी जल में समाई जा रही थी, तब विष्णु ने मत्स्यावतार का रूप धारण करके इसकी रक्षा की। किसी चुम्बक के आयताकार लम्बे डंडे की बल- रेखाओं को देखिये। यह मछली नहीं है? जानते हैं, यह मछली कैसे बनती

श्री कृष्ण का दर्शन

‘श्री कृष्ण’ का चित्रण राम से सर्वथा विपरीत रहा है, पर दोनों में एक बात समान रही है। धर्म और न्याय की स्थापना का प्रयत्न। दोनों के मार्ग एवं पद्धतियों में अंतर है , पर यह युगधर्म के अनुरूप था। महाभारतकाल में प्रपंच और दुराचार का बोलबाला था। इस काल

राम कहाँ है?

आपके हृदय में जो नाभिक (जीवात्मा) है, उसके अंदर जो ‘आत्मा’ (प्रथम परमाणु संरचना) बैठी हुई है , उसका सीधा सम्बन्ध ‘राम’से हैं। इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ता कि आप इसे किस नाम से पुकारते है। इस पर किसी धर्म , सम्प्रदाय , नस्ल या ग्रह आदि का

लिंगवृद्धि के टोटके

लिंगवृद्धि के टोटके सुहागा , तिल, कछुवी तोराई और मेनसिल – इनको चमेली के पत्तों के रस में पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग बढ़ जाता है । इसका लेप सात दिन तक रोज करना चाहिए। बैंगनी पुष्प वाली कुम्भी के रस में सरसों का तेल सिद्ध करके उसमें

अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके

अशुभ केतु के उपचार एवं टोटके प्रथम भाव – काला और सफ़ेद दुरंगा कुत्ता पालें। या ऐसे कुत्ते की देखभाल करें। गली के आखिरी मकान में न रहे। चंद्रमा के निर्दिष्ट उपचार करें। लाल रंग का रुमाल/कपड़ा जेब में रखें। द्वितीय भाव – सदाचार का निरंतर पालन करें। नौ वर्ष से कम

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