आप यहाँ हैं

ॐ का रहस्य

यह हमारी खोपड़ी की ऊर्जात्मक संरचना का एक बाहरी ब्लूप्रिंट है। अपने सिर का अध्ययन कीजिये। पीछे की तरफ दोनों सिरों के मिलने से एक गाँठ होती है। आगे जो पूंछ दिखाई गयी है, वह हमारी नाक है। इससे 12 अंगुल यानी 9 आगे तक ऊर्जाधारा (श्वाँस नहीं ) निकलती है, जिसको अनन्त तक (अभ्यास के द्वारा ) ले जाया जा सकता है।

ऊपर का अर्द्धचन्द्र हमारी खोपड़ी का चाँद है। इसे काँक भी कहा जाता है। . , 0 से बननेवाली शुन्य सहित चारों ओर व्याप्त एक शंक्वाकार ऊर्जा संरचना है, जो हमारे सिर की ऊर्जा की प्रतिक्रिया में बनती है। + होने के कारण यह चाँद में गिरती रहती है (मंदिर की तरह )। यही हमारा जीवन अमृत है। हमारे जीवन का वास्तविक कारण यही . रुपी ऊर्जा है, पानी आदि भौतिक पदार्थ नहीं।

इस बिंदु को सटी, सावित्री, गायत्री, गंगा, शिवसार , शिव वीर्य, शिवशक्ति , अमृत, सूम्रस आदि भी कहा जाता है। तंत्र में इस बिंदु के बिना कोई भी चक्र संपूर्ण नहीं होता , न ही कोई अक्षर मंत्र बन पाता है।

One thought on “ॐ का रहस्य

Leave a Reply

Top