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हिस्टिरिया रोग इलाज दौरे से पहले भयानक आकृति दिखाई देती है।

हिस्टीरिया क्या है?

प्रश्न – हमारे मित्र की पत्नी को शादी के बाद से दौरे पड़ते है डॉक्टर मिर्गी बताते है। इलाज से कोई फायदा नहीं है। दौरे से पूर्व भयानक आकृति दिखाई देती है। कोई देवी-देवता जैसी मूर्ती। डर से कांपती हुई बेहोश हो जाती है। शरीर अकड़ जाता है। दांत जकड़ जाते है। जीभ कट जाती है। दाहिनी ओर से डिम्बाशय में तेज दर्द रहता है।कभी कम हो जाता है। दर्द हमेशा बना रहता है। कमजोरी है। चेहरे पर हरी झाई भी है। मूत्र में अल्बूमेन होता है। लाल-पीला रंग का पेशाब होता है। उसमें घोड़े के पेशाब का गंध होता है। बहुत पेशाब भी होता है। कलेजा बहुत जोर-जोर धडकता है। क्या यह कोई किया-कराया है?

हिस्टीरिया का कारण, लक्षण और घरेलू उपचार(इलाज)

उत्तर – लगता तो यही है । तन्त्र में कुछ पदार्थों के सार अर्क में इस प्रकार के लक्षण पाए जाते है। इसका एक बूँद काफी होता है। १५-20 दिन बाद दौरा शुरू होता है। ये अर्क कई प्रकार के होते है। एक में रोगी दौरा पड़ने के समय जोर से चिल्लाता है। कुछ कहता भी है , पर उसकी बात समझ में नहीं आती। वह डर की चीख होती है। दौरे के बाद सो जाता है फिर कुछ याद नहीं रहता। केवल इतना बता पाता है कि डर गयी थी । इसका दौरा निचे से प्रारंभ होता है। यह दौरा रात में अधिक पड़ता है।

एलोपैथी चिकित्सा में इस प्रकार के तमाम दौरे को हिस्टिरिया कहा जाता है। पर यह क्यों उत्पन्न होता है, इसका कोई उत्तर उनके पास नहीं है। यह रोग कुंवारी लड़कियों, विवाहिताओं में होता है। इस रोग के कई रूप है। किसी में तलपेट में कुछ घूमता हुआ प्रकट होता है और ऊपर चढ़ता है, पहले हृत पिंड को जकड़ता है , फिर मस्तिष्क पर चढ़ जाता है और दौरे पड़ते है। किसी में रोगिनी हंसती गाती है। किसी में हिंसक हो जाती है। तो किसी में अपने ही वस्त्र फाड़ डालती है। इसके अनगिनित रूप है। इस रोग का कारण किसी भी परिक्षण से ज्ञात नहीं होता। शारीरिक या मस्तिष्क में किसी प्रकार का विकार नहीं पाया जाता। कभी-कभी रोगिनी को दौरे के समय गर्भाशय में जलन होती है, पर दौरे के बाद यह नहीं होता। हाँ, भय पसीना-चिल्लाना , शाप देना, आशीर्वाद देना, मार-पिट करना , स्वयम को घायल कर लेना , वस्त्र फाड़ देन आदि असामान्य लक्षण सभी प्रकार के दौरे में पाएं जाते है।

तंत्र विद्या में और आयुर्वेद में भी ऐसे अनेक प्रकार के दौरों का वर्णन है। इन्हें कहीं 27 कहीं 36 प्रकार के वर्गों में बांटा गया है। दोनों के अनुसार यह रोग और इसके दौरे, आगन्तुक होते है। देवता, पितर , भूत, ब्रह्मपिशाच आदि के कोप से होते अहि या तांत्रिक जादू टोने से। लक्षणानुसार इनकी चिकित्सा के मंत्र, उपचार विधि आदि है।

 

कारण पर विवाद करने से अच्छा है कि जो चिकित्साएं बताई गयी है, उनकी गुणवत्ता को परखा जाए। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि दौरे प्रारंभ होने के प्रारंभिक दो-तीन साल में इन चिकित्सा विधियों द्वारा रोग दूर हो जाता है। पुराने पर दो तीन बार प्रयोग करने होते है। पर आज के युग में ये महँगी पडती है। यह एक घंटे के दवा प्रिस्क्रिप्शन का काम नहीं है। हफ्ता दस रोज तक रहना होता है और हमारे पास कोई आश्रम आश्रम नहीं है। इसकी व्यवस्था स्वयम करनी होती है। इसलिए ऐसे रोगों से पीडिता के लिए एक अन्य उपाय है। हमारे यहाँ से तन्त्र सिद्ध औषधि मंगवाकर प्रयोग करें। 50% मामलों में रोग ठीक हो जाता है। 50% में 60% लाभ हो जाता है।

Email – info@dharmalay.com

 

 

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