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स्त्री जातिका की जन्मकुंडली के संक्षिप्त फल (ऊपाय सहित)

यहाँ दिए गये समीकरण और उनका फल शास्त्रीय कथनों पर आधारित हैं। अपनी कुंडली में अपने जीवन की जानकारी लेते समय यह ध्यान रखें कि आपका फल सम्पूर्ण कुंडली की गणना का फल नहीं है। शुभ या अशुभ परिणाम में बचाव या हानि प्रभाव कम-अधिक-बचने के योग्य हो सकता है।

फल देखते समय निम्न तकनीकी बातों का ध्यान रखें ।

1.राशियों के स्वामी ग्रह – रवि-सिंह, सोम-कर्क , मंगल-मेष , वृश्चिक , बुध-मिथुन , कन्या, बृहस्पति – धनु , मीन, शुक्र – वृषभ, तुला, शनि –कुम्भ मकर होते हैं।

  1. पापी ग्रह – शनि राहु केतु , क्रूर ग्रह – सूर्य-मंगल-शनि, (मतान्तर पापी ग्रह – राहु केतु बुध)
  2. किसी खाने में जो ग्रह जिस राही में बैठा हो; उस राशि पर उसके स्वामी ग्रह की स्थिति का प्रभाव होता है। जैसे- पहले खाने में तुला राशि है, तो कुंडली में शुक्र की जो दशा होगी, उसका प्रभाव उस राशि पर पड़ेगा और यदि वहां कोई ग्रह है, तो शत्रु –मित्र के हिसाब से उसपर भी प्रभाव पड़ेगा।

 

विवाह बाधा : विवाह का न होना, विलम्ब से विवाह होना, सम्बन्ध विच्छेद , तलाक, वैधव्य , दाम्पत्य कलह

  1. लग्न से सातवें खाने , वहां स्थित राशि के स्वामी ग्रह और शुक्र पर पापी या क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो।

उपाय – (i) पापी ग्रहों का उपाय अक्रें। देखें – लक्षणों के अनुसार ग्रहों का उपाय । सभी बी ग्रहों के उपाय के लिए यही देखें।

(ii) पीपल के वृक्ष में मीठा डालकर पानी दें।

  1. जब बुध शुक्र के शत्रु के साथ हो और शुक्र शत्रु ग्रहों की राशि के साथ।

उपाय – (i) शत्रु ग्रहों का उपाय करें।

  1. लग्न में शनि एवं राहु और सातवें खाने, सातवें भाव के राशि के स्वामी ग्रह एवं शुक्र अशुभ स्थिति में हो (शत्रु की दृष्टि या राशि के कारण)

उपाय – (i) खेत में कच्चा मिट्टी के बर्तन में अपने एक बाल को जड़ की तरफ से डालकर शहद में भरकर बर्तन का मुंह बंद करके लाल कपड़े से बांधें और सवा हाथ नीचे दबा दें।

  1. चंद्रमा पर क्रूर शनि की दृष्टि हो/ वह साथ हो/ या राशि सम्बन्ध हो और बुध, शुक्र के शत्रु के साथ हो।

उपाय – शिवलिंग पर जलार्पण करें। बेल के वृक्ष में जल दें और बुध के साथ स्थित शुक्र के शत्रु का उपाय करें।बरगद के वृक्ष की जड़ की मिट्टी से तिलक करें।

  1. पांचवे, सातवें, नवमें भाव में शुक्र और मंगल को जोड़ा हो और बुध शुक्र के शत्रु के प्रभाव में हों।

उपाय – बुध के शत्रु का उपाय करें। क्रमांक 3 का उपाय करें।

  1. चन्द्र कुंडली के सातवें खाने में मंगल, शुक्र और शनि हो और बुध शुक्र के शत्रु के साथ हो। शुक्र के शत्रु और चंद्रमा का उपाय करें ।

उपाय- क्रमांक – 4 का उपाय करें।

  1. लग्न एवं सातवें ग्रह में पापी हों और बुध अपने या शुक्र के शत्रु के कारण बर्बाद हो रहा हो। राहु के साथ बृहस्पति चन्द्रमा और केतु के साथ बृहस्पति एवं बुध के साथ शुक्र का संयोग करें। सिर पर पीली-सफ़ेद टोपी पहने या ओढ़नी डालें। हल्दी चन्दन का तिलक लगायें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। मन्दिर में जाएँ।
  2. जिस खाने में चंद्रमा शक्र कि युति (जोड़ी) हो, उससे सातवें खाने में मंगल-शनि एक साथ हों।

उपाय – सूर्य का उपाय करें। सूर्य का अर्ध्य , श्री कृष्ण का मंत्र , मदार के दूध में चन्दन का तिलक लगायें।

  1. केवल पाप ग्रहों कि दृष्टि या राशि प्रभाव वाले सातवें खाने में बुध एवं शुक्र हो। उन पर शुभ ग्रहों का प्रभाव न पड़ रहा हो।

उपाय- चन्द्रमा और बृहस्पति का उपाय। शिव मन्दिरों में जाकर जल चढ़ाएं । हल्दी-चन्दन का तिलक लगायें।

सातवें खाने के शनि पर केवल पाप ग्रहों की दृष्टि हो या प्रभाव हो। शुभ ग्रह उसे न देखते हों और बुध शुक्र के शत्रु के प्रभाव में हो। दूध में बादाम डालकर खेत में डालें।

उपाय – बुध के साथ बैठे शुक्र के शत्रु का उपाय करें।

 

विशेष कथन

विषय-विस्तार अधिक है। हम टुकड़ों में ही बता पा रहे है; इसलिए खेद है; पर हम पूरा विवरण देंगे।इसके लिए हमारा वेबसाइट धर्मालय www.dharmalay.com देखते रहिये। यह निरंतर जारी है। निम्नलिखित पर ध्यान दें :-

  1. बताये गये उपाय सामान्य तांत्रिक टोटके है। विशेष प्रकार के तांत्रिक उपाय नहीं।
  2. सामान्य किसी प्रश्न का उत्तर दिया जाएगा; पर कृपया जन्म दिन भेजकर या कुंडली भेजकर फल न पूछे। ऐसी सेवाएं सशुल्क होती है।
  3. जिन प्रश्नों का उत्तर हमें ज्ञात होगा हम अवश्य देंगे।
  4. जिस समय जो विषय पोस्ट हो रहा हो, उसी से सम्बन्धित प्रश्न करें , तो अच्छा होगा।
  5. आधी दैविक प्रकोपों (भूत-प्रेत , देव-पितर , सूक्ष्म- गंधर्व , किया-कराया, जादू –टोना या काले जादू आदि) का ज्ञान कुंडली से नहीं चलता। इससे यह तो बताया जा सकता है कि ऐसा प्रयोग उस कुन्द्लू के नेचर में है या नहीं, मगर उन विवरणों का ज्ञान नहीं होता।
  6. विवाह, बार-बार फिक्स होकर टूट रहा हो, तो दुर्जा जी के ‘क्लीं ह्रीं श्रीं दुं दुं दुं दुर्गाय नमः’ – मन्त्र का जप करें और इसी 108 मंत्र (न्यूनतम ) से सिद्ध रक्षा कवच कमर में बांधें ।

Email- info@dharmalay.com

विवाह न होने के योग – क्रमांक – 10 से आगे — अगली पोस्टिंग

 

 

8 thoughts on “स्त्री जातिका की जन्मकुंडली के संक्षिप्त फल (ऊपाय सहित)

  1. Naam reeta
    D.o.b. 09 .06. 1985. Time 23:45
    Vill. Kuther distt. Kangra .himachal pradesh
    Longitude…75.55 n
    Letitude….32.17 e
    Mera isht dev kon hai .kon se shubh and ashubh yog hain. Or kya steek upay krne se kamyaabi milegi

    • 1st ghar ……11 chandrma
      2nd ghar…..12 khali
      3rd ghar…. 1 rahu shukra
      4th ghar…..2 surya budh
      5th ghar…..3 mangal
      6th ghar
      7th ghar
      8th ghar
      9th ghar……7 shani ketu
      10th ghar….8yurenus
      11th ghar…9pluto
      12th ghar….10 guru
      Vishleshan kre

        1. यह कुंडली विश्लेषण का विषय है. अपना जन्म विवरण मेल कीजिये info@dharmalay.com पर.
          आपको पहले ही सूचित किया जा रहा है की हमारे यहाँ कुंडली विश्लेषण सशुल्क है क्योंकि इसमें समय व्यय होता है.

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