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स्त्री की कुंडली में विवाह, पति , गृहस्थ सुख, सन्तान आदि

(कैसे देखें)

कुंडली में भाव अथवा खाने की गणना बायीं ओर से घूमते हुए (एंटी क्लॉक वाइज) की जाती है। स्त्री के किस खाने से किस विषय का ज्ञान होता है, यह इस प्रकार है –

खाना – 1 – अपना आत्मिक बल , रूप, रंग, शरीर, गुण, तेज , यश, सिर, चेहरा, व्यक्तित्व , परवृत्ति आदि।

खाना – 7 – शारीरिक बल, शरीर का स्वास्थ्य , पति का रूप-गुण, तेज – प्रवृति , दाम्पत्य सुख, वैवाहिक सुख, धन-सम्पत्ति आदि

खाना – 2 – अपनी मानसिक शक्ति, नाक, आँख , मुख , धन, विद्या, वाणी , ललाट , मानसिक स्थिरता – अस्थिरता , आदि। इस खाने से अन्यों के साथ रोग, मृत्यु आदि की भी गणना की जाती है।

खाना – 8 – अपनी आयु , पति की आयु, पति के गुजरने का समय, पति के गुप्त रोग, अपने रोग, कर्ज, मानसिक चिंता, पति को न्यायिक दंड, विवाह का टूटना, पति की दूसरी शादी आदि।

खाना -3 – भाई- बहन और मित्रता का दायरा, दोनों बाँहें , साहस , संघर्ष करने की शक्ति, बौद्धिक स्तर, कंठ, स्वर , कान , देवरानी, ननदोई आदि।

खाना – 9 – अपने पिता, पति के पिता, पति का पैत्रिक धन – पति की जन्मगत प्रकृति , पति के भाई-बहन , आदि।

खाना – 4 – माता की स्थिति , भावनाओं की स्थिति , मानसिक मस्तिष्क सम्बन्धी स्तर , शरीर में जलतत्व की स्थिति , सुख-दुःख , मायका, मायके की दशा , प्रेम , मधुरता , कोमलता, पति के प्रति निष्ठा , पर पुरुष सम्बन्ध या उनके द्वारा मानसिक दबाब।

खाना – 10 – पति का कार्य क्षेत्र , अपना कार्य क्षेत्र , ससुराल का धन, पति का या अपना व्यवसायिक या आमदनी का स्वरुप, अधिकार , सम्मान आदि।

खाना – 5 – अपनी बुद्धि , विद्या , गर्भाशय , सन्तान , अनायास धन की प्राप्ति, रोमांटिक भाव, ह्रदय , लीवर , आमाशय आदि।

खाना – 11 – पति की आय, आय के स्रोत , (कार्यकाजी का अपना भी) कामनाएं, कामनाओं की पूर्ती की दशा , जेठ या पति की बड़ी बहन , सास , सास की आयु ,मृत्यु ( खाना – 6 के साथ)

खाना – 6 – शत्रु , विरोध और विरोधी, रोग, दुर्घटना , तनाव , कर्ज , गुर्दा, अंत , पुत्रधन , आदि।

खाना – 12 – रात की नींद, मस्तिष्क का सुख –चैन , कष्ट, शय्या सुख, पति-वियोग , मृत्यु के बाद की दशा , पति द्वारा प्राप्त धन का व्यय।

जैसा कि हम पहले बता चुके है। कुंडली भाव एक दूसरे से सम्बन्धित होते है। इनमें कई तरह के सम्बन्ध होते है। सामान्य रूप से जानकारी प्राप्त करने के लिए, कम से कम किसी भाव के सातवें खाने का सम्बन्ध जरूर देखना चाहिए। यहाँ इसलिए उल्टा रूप भी दिया जा रहा है।

सातवाँ – पहला खाना – पति , विवाह , वैवाहिक जीवन , अपना शरीर , यौनांग और कमर , सेक्स का सुख, काम भाव की स्थिति, पति से टकराव-अलगाव , तलाक , दहेज़, पति की मृत्यु, चरित्र , पारिवारिक कलह, अपनी मृत्यु के कारक , दिखाई देने वाली विरोधी, अपना व्यवस्था , अपना धन, पति का रंग रूप, प्रकृति , स्तर, ससुराल में सुख आदि।

आठवा + दूसरा खाना – अपनी आयु , जीवन-मृत्यु , कर्ज , शत्रु , जय –पराजय, बदनामी , अचानक धन – प्राप्ति , मृत्यु का कारण , सेक्स रोग, अपमान – मान, मानसिक शांति-तनाव , बंदिनी की स्थिति या स्वतंत्र आदि। पति का मारक कारण , वैधव्य , पति का स्वभाव, नेत्र , मुख, विद्या, वाक् शक्ति आदि।

नवमा , तीसरा खाना – अपना भाग्य, धार्मिक भावना का स्तर, गुरु का स्तर और गुरु के प्रति श्रद्धा , देवता एवं गुरु की कृपा, वैराग्य का भाव या सांसारिक भाव, शील , सदाचार , पिता, ज्ञान , संतान , पौत्र , कुल्हे, नितम्ब , जंघाएँ (आकृति एवं शक्ति) आदि। पति अक साहस , पराक्रम , बुद्धि आदि

दसवां , चौथा खाना – राज सम्बन्ध , अधिकार , कर्म क्षेत्र , प्रभुता , सम्मान, उच्चता , पिता या श्वसुर से प्राप्त धन , पद, उन्नति , प्रतिष्ठा , व्यक्तित्व के प्रसार की दशा , कार्य क्षेत्र की बाधा उन्नति , माता-पिता की मृत्यु , पीठ-घुटने , केश , नाखून , पुत्र रोग आदि की दशा । सास , आवास , पति की अचल सम्पत्ति , सुसराल ।

ग्यारहवाँ भाव पांचवा खाना – आय , लाभ , प्राप्ति बुद्धि , शत्रु रोग , चोट, कष्ट , टांग – टखना – आदि।

 

बारहवां एवं छठा खाना – व्यय , गुप्त शत्रु, हानि , दंड , गुप्त कर्म और उसके परिणाम , निराशा , रात्रिकालीन सुख, परलोक की दशा , आत्म हत्या , अपनी हत्या, धोखा-विश्वास घात , पति की हानि – उसका कर्ज उसके शत्रु , उसका मानसिक तनाव ।

पूरा फल और सटीक जानकारी तो जटिल गणना का विषय है; पर कोई भी पढ़ी –लिखी स्त्री हमारी अगली पोस्टिंग से अपने जीवन , पति, कार्य , विद्या , सन्तान आदि का ज्ञान मोटे तौर पर हमारी सारिणी (चार्ट) के अनुसार कर सकती है।

 

स्त्री जातक कैसे देखें अपने जीवन का फल – अगली पोस्टिंग

 

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