सेक्स समस्या पर : नये नुस्खे विशेष जानकारियां

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कुछ लोगों ने शंका किया कि क्या सेक्स की इतनी गंभीर समस्याएं आपके ऊपाय से दूर होंगी ?

ऊतर हैं निसंदेह। अपने आस-पास फैले घास –फूस सुर वृक्षों को साधारण न समझिये। इनमें से जाने कितनी हमारी कई गंभीर समस्याएं दूर कर सकती है। सेक्स की समस्या वालों को लोग डराते है और सेक्स पॉवर बढ़ाने की दवा बेचते है। टैंक में पानी नहीं है या पाईप खराब है, तो तो पम्पिंग सेट का पॉवर बढाने से क्या होगा?

रोग पालिएगा, तो बढेगा। आपकी समस्या धन नहीं है। आपकी समस्या आपका आलस्य और आदते हैं।

इसमें जानकारी का अभाव परेशानियां पैदा करता है और एलोपैथिक एवं नीम हकीम सेक्स स्पेशलिस्ट के इलाज से और भी समस्याएं उत्पन्न होती है। इसे जानिए —

भैरवी तन्त्र, वाम तन्त्र, आयुर्वेद तीनों में प्रत्येक रोगों का एक वर्गीकरण है। उस वर्गीकरण के अनुसार एक ही प्रकार की समस्या लक्षण –भेद से तीन कारणों से होती है – गर्मी अर्थात पित्त के प्रकोप से, सर्दी अर्थात कफ के प्रयोग से , वायु के प्रकोप से ।

तीनों की चिकित्सा और औषधियां एक-दुसरे के विपरीत है। एक की दवा दुसरे में नहीं दी जा सकती। देंगे, तो रोग और भी बिगड़ेगा।

अब होता यह है कि आजकल अधिकांश सेक्स समस्याएं गर्मी से उत्पन्न होती है और सेक्स पॉवर बढाने वाली सभी दवाये अत्यंत गर्म होती है । एलोपैथिक ताकत की दवाएं भी गर्म होती है। फलतः दो-चार दिन उत्तेजना दिखाकर वे मामला और खराब कर देती है। यह स्त्री-पुरुष दोनों की बिमारी में होता है। फलतः ‘मर्ज बढ़त ही गया ज्यों-ज्यों दवा की’ – वाली हालत हो जाती है।

कृपया निम्नलिखितको याद रखें। इलाज में गलती की, तो नतीजे गंभीर भी हो सकते है –

  1. गर्मी है, तो पहले गर्मी का इलाज करें। जब तक यह रहेगी; ताकत की दवाएं, पौरुष की दवाएं, टॉनिक , शराब, भांग, गांजा अफीम और वियाग्रा जैसी दवाएं रोग को और बढायेंगी और विकृत करेंगी।
  2. स्वप्नदोष लिकोरियां है,  तो पहले इसकी चिकित्सा करें । जब तक यह रोग रहेगा, ताकत की दवाएं, दूध-मलाई , टॉनिक, जैस-जैसे बढ़ाएंगे, यह रोग बढेगा।
  3. नसें ढीली है या लिंग में बांकपन है, योनी ढीली हो स्तन ढीली हो, – इससे भी पुरुष स्त्री की धातु पतन होता है। एक तेल और एक लेप आपको ठीक कर सकता है। इसमें तेल ही बनाना कठिन है , तेल तो आप स्वयं कर सकते है। तेल हमारे एक परिचित वैद्य, हमारे ही फार्मूले पर बनाते हैं। सस्ता है।
  4. स्मरण रखिये – स्वप्न दोष , लिकोरिया, (स्त्री का धातु पतन) , सोमरोग(स्त्री का धातु मूत्र में बहना) प्राण लेवा है। इसकी शुरुआत मूत्र की रुकावट या अधिक मूत्र के रोग से होती है। इसमें शरीर के खनिज और धातु सार बहते रहते है और मृत्यु तक हो जा सकती है। अन्य गंभीर रोग भी हो सकते है।
  5. गर्भाशय के विकार से मासिक की गडबडी और उससे शरीर से लेकर सिर तक में दर्द, अन्य रोग, चक्कर, आज 75% स्त्रियों की समस्याएं है। इन्हें वे बहुत साधारण समझती है और शर्म से किसी को बताती नहीं ।यह भी गंभीर विकार है। सन्तान बाधा या सन्तान में विकार।
  6. कुछ लोग पूछ रहे है कि पुरुष में शक्राणु न हो, तो सन्तान कैसे हो?….. यह असम्भव है। तन्त्र में इसके कई अनुष्ठान है; पर ये कृत्रिम गर्भाधान जैसे है। देवता आमंत्रण और मानसिक अभिसार। इससे सन्तान योग्य और विवेकवान होती है; कृत्रिम गर्भाधान में बीज का पता नहीं होता। बस इतना ही अन्तर है। स्त्री के अंडाणु न बन रहे हो; तो भी यह असम्भव है, यदि यह रोग जन्मविकार से हो।

      हाँ शक्राणु, अंडाणु कमजोर हो, तो सबल किया जा सकता है। अंडाणु किसी व्यवधान से बाधित है , तो चिकित्सा हो सकती है। पराशर स्मृति में नियोग अनुष्ठान का निर्देश है, जोवेद न्यास के द्वारा मत्स्यगंधा और शांतनु के परिवार में किया गया था। इसका तन्त्र में वृहत अनुष्ठान है।

   सन्तान बाधा के कई कारण है। इन पर अलग से जानकारी देने का प्रयास करेंगे।

  1. सिर भारी, मानसिक क्षुब्धता , ईर्ष्या , क्रोध, खान-पान में असावधानी , दिन की रति, कृत्रिम मैथुन , जीवन में अव्यवस्था , प्रकृति से दूर, वातावरण का प्रदूषण – ये सभी सेक्स की समस्याएं उत्पन्न करती है । आश्चर्य यह है कि हमारे जूते , चप्पल, मोज़े भी इसको बाधित करती है। 20 मिनट ही सही , किसी साफ़ जगह पर नंगे पाँव चलना चाहिए। पृथ्वी की तरंग बाधित होगी, तो + भी कम मिलेगा। स्त्रियों में कम होने पर गर्भाशय विकार उत्पन्न होंगे।

 

कुछ अन्य नुस्खें

गर्मी से स्वप्न दोष – 

  1. धनिया (बुरादा/डस्ट) 10 ग्राम – 200 ml पानी में रात में डालें – सुबह मल छानकर मिश्री मिलाकर पी जायें।
  2. शीशम, कैथ, बबूल के पत्तों में से कोई 25 ग्राम पीसकर कर रात में पानी में डालें। सुबह मसल छानकर मिश्री मिलाकर कर पी जाएं। यह नुस्खा अत्यंत उत्तम है। हम पहले भी बता चुके है। यह धातु भी मजबूत करता है।
  3. बबूल की गोंद पंसारी (जड़ी-बूटी की दूकान) पर मिलता है। 10 ग्राम 200 ml पानी में डालकर रातभर छोड़े। सुबह मल छानकर 25 ग्राम मिश्री मिलाकर पी जाए।
  4. प्रतिदिन 15-15 ग्राम त्रिफला मिश्री मिलाकर दूध में घोलकर पियें या चावल कजे माड़ में चीनी मिलाकर पिए। माड़ आजकल कूकर के कारण नहीं मिलता। 25 ग्राम चावल कूटकर 500 ग्राम पानी में उबालें । 200 ग्राम रहने पर चीनी मिलाकर पी जायें।
  5. 3 ग्राम हरड का चूर्ण + 10 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह शाम प्रयुक्त करें।
  6. जौ को कूटकर 50 ग्राम – 400 ग्राम पानी में उबालें। 200 रहने पर मसल-छानकर-10 ग्राम शहद डालकर पी जाएँ। सुबह-शाम। यह मधुमेह , बहुमूत्र में भी लाभ करता है।

 

सावधानी : केवल एक नुस्खा पर्याप्त है

किसी भी आयुर्वेदिक या तांत्रिक नुस्खे का प्रयोग, किसी भी रोग में हो रहा है।

लालमिर्च,  खटाई , खट्टी वस्तुएं, गरम मसाले, आलू, मटर, टिंडे, अरबी, कचालू, मैदे के पदार्थ . नशीली वस्तुए, फ़ास्ट फ़ूड , कोल्डड्रिंक , बोतल का पानी (पानी घर पर लाकर उबाल कर फिर ठंडा करें या घ में पानी को उबालकर प्रयोग करें। इसमें घटक केमिकल होता है।), प्याज, लहसुन, अंडा, पुलाव, बिरयानी, अत्यधिक-चाय –काफी – वर्जित है। विशेष निर्देश न हो तो।

अधिक भोजन, कम भोजन , कम नींद, अधिक नींद, दिन में सोना, रात में जागना, रोग की चिंता में रहना, अधिक परिश्रम करना या बिलकुल न करना।

 

रक्ताल्पता (एनीमिया)

रक्त की कमी है; तो पहले गर्मी निकालिए फिर नीचे लिखे उपाय कीजिये। यह स्त्री-पुरुष दोनों के लिए है –

  1. दूब; एक घास, जो प्रत्येक के घर के लॉन , पार्क , सड़क के किनारे, खेतों-जंगलों में पर्याप्त मात्रा में पायी जाती है। 50 ग्राम जड़ सहित उखाडिये । बढ़िया से धोईये। पानी में पीसकर 2 ग्लास पानी में रातभर छोडिये। प्रातःकाल मसल छानकर पानी में 10 ग्राम शहद, 5 ग्राम घी और 2 ग्राम काली मिर्च डालकर लस्सी की तरह 5 मिनट फेंटिए और पी जाइए। प्रातःकाल नित्यक्रिया से निबट कर।एक महीने चमत्कार देखिये।

( घी और शहद कहीं भी समान मात्रा में नहीं मिलाना चाहिए। यह विषैला हो जाता है)

 

स्तम्भन

  1. लिंग में ताकत हो, रक्त भी अधिक हो और स्तम्भन नहीं होता हो; तो हमारे परिचित वैद्य के यहाँ से स्तम्भन चूर्ण मंगवा कर निर्देशित तरीके से खाइए। 2 ग्राम – दूध, शहद, घी के साथ रात में भोजन से एक घंटा पहले। यह 1100 रु. + 100 रु. डाक व्यय में आपको घर पर मिल जाएगा।या हमारी वेबसाइट पर दिया गया विवरण देखिये। गर्म प्रकृति है. तो दूध मलाई, खीर, ककड़ी आदि ठंडी चीजे , बेलपत्र, घृत कुमारी का गूदा – 25-25 ग्राम शरबत बना कर पीजिये। ठंडी प्रकृति हो, तो शराब, भांग, जिमीकंद, प्याज, लहसन आदि सेवन करें। वायु का जोर हो, तो घी, मूंगफली या सूरजमुखी का तेल प्रयुक्त  करें।
  2. गर्मी का प्रकोप हो, स्तम्भन न होता हो, स्वप्नदोष हो, तो शीशम, कैथ, बबूल के पत्तों वाला नुस्खा प्रयोग करें। सुबह-सुभ ईसबगोल की भूसी 5 ग्राम – मिश्री 5 ग्राम , गर्म दूध 250 ml लें।
  3. वीर्य की कमी , लिंग या योनि का कमजोर होना, नस विकृति, – नस विकृति के लिए हमारा तेल लगायें। धातु और रक्त की कमी हो, तो पका आम, पका केला, कच्चे नारियल की गिरी, नारियल का पानी, अंगूर , खजूर, सिंघारे या ताल मसाने का चूर्ण मिश्री मिलाकर कर खाए।

या बल वर्द्धक धातु वर्द्धक चूर्ण हमारे परिचित वैद्य के यहाँ से मिल जाएगा। मिश्री मिलाकर मात्रा 10 ग्राम प्रातः 10 ग्राम शाम दूध के साथ है। मिश्री बराबर मिलाया जाता है। 1100 रु. + 250 रु डाक व्यय में एक किलो चूर्ण मिलता है।इसमें एक किलो चीनी का बुरादा मिला दे , तो 110 दिन का कोर्स हो जाता है।

 

 

 

धातु पुष्ट कर नुस्खे

  1. सफेद प्याज का रस 10 ग्राम , अदरख का रस 6 ग्राम, शहद – 5 ग्राम, घी- 3 ग्राम – मिलाकर प्रातःकाल लें । 45 दिन में लाभ होता है । 108 दिन स्थायी लाभ होता है।
  2. 20 ग्राम उड़द की छिली डाल रातभर पानी में रखें। सुबह इसे पीसकर आधा किलो दूध में खीर बनाये। आधा दूध रहने पर 25 ग्राम मिश्री मिलकर खा जाए। लाभ तो एक महीने में नजर आता है, पर कोर्स 108 दिन का है।
  3. गोखरू, विधारा, शातावारी, असगंध, मुलेठी, कौंच के बीज, अकरकरा, विदारीकन्द , दोनों मूसली – अलग –अलग पीसकर मिला लें। इसमें बराबर मिश्री मिलाएं। 10 10 ग्राम सुबह शाम दूध के साथ लें

यह पाउडर कुछ और चीजो को मिलाकर हमारे एक मित्र बनाते है। बिना मिश्री मिला – 1100 रु. किलो + 250 रु. डाक व्यय ।

  1. घी में भुनी म्च्च्लियाँ और रोटी-चवल- दाल आदि परपरागत खाद्य के साथ खाने वाला (प्रतिदिन । यह छोटी मछली होती है । जंगली कबई आदि हो, तो और अच्छा ) काम क्रीडा में कभी पराजित नहीं होता।
  2. एक अंडा , 10 ग्राम घी, तीन बताशा – ग्राम करके प्रतिदिन खाने से धातु पुष्ट होता है (गर्मी में इसे प्रयोग न करें)
  3. बकरे के आधा किलो अंडकोष ले आयें। इन्हें कुचल पीसकर आठ गुना पानी में उबालें। एक चौथाई पानी रहने पर मसल कर छान लें। इसमें चार गुणा दूध मिलाये यानी चार लीटर- इसमें देशी पीपर का चूर्ण डाल दें। खोआ बने, तो बनाकर रखें।

इसे घी में भूंजे बराबर बेसन में भूंजे,= और चीनी की चासिनी डालकर घोंटकर 10-10 ग्राम के लड्डू बना लें। सुबह-शाम खाए।

  1. 1 किलो काला तिल लें। धोकर सुखा लें । अब प्रतिदिन 1 पाव बकरे का अंडकोष पीसकर 1 2 लीटर दूध में औटाये। जब वह साझ जाए तो ठंडा करके मसल छानकर दूध तिल में डाल दें। 12 से 15 घंटा रहने सें। फिर तिल को छानकर सुखालें। दूध पी जाए। सूख जाने पर फिर तिल को इसी प्रक्रिया से भिंगो कर सुखाये 5 बार ।

इस तरह बनाकर सुखाये तिलों से 5 ग्राम + 5 ग्राम मिश्री सुबह शाम लें।

  1. केकड़ा, कछुआ (आज कला यह संरक्षित है) , झींगा, मछली, प्रत्येक जंगली मछली, घोंघा का मॉस, बगेरी का मांस – घी में भुनकर खाए।
  2. उड़द की दाल को धोकर सुखाकर पाउडर बना लें। इसे एक चौथाई घी डालकर हल्का भुन लें। चीनी की चासनी में 20 20 ग्राम का लड्डू बना लें। सुबह शाम – 10 ग्राम घी+ 6 ग्राम शहद के साथ लें। यह पचने में भारी होता है। कुछ दिन केवाल सुबह लें। पचने लगे तो शाम में भी लें।
  3. सुश्रुत में कहा गया है कि पीपल नामक वृक्ष की जड़ की छाल , इसका फल, इसकी कोपलें, जो मिल जाए , सुखाकर, चूर्ण करके 15 ग्राम की मात्रा एं दूध में औटा कर पिने से अपार मैथुन शक्ति बढती है। यह 6 महीने तक पीने की सलाह है।
  4. अपनी पाचन शक्ति के अनुसार गे के दूध में छुहारे औटा कर सूए खाकर वह पिने से भी धातु पुष्ट हो जाती है।
  5. जौ. गेंहू – इनको बो दें। जब तीन-तीन इंच के पौधे हो जाए, धोकर सुखाकर चूर्ण कर लें। इसमें शहद मिलाकर रखें। 10 ग्राम और 200 ml दूध के 15-15 ग्राम सुबह –शाम लें।

 

ये सभी चमत्कार करेंगे, पर सुबह खाया शाम में रिजल्ट नहीं होगा।ऐसा रिजल्ट कीमती दवाओं में भी नहीं होता। उसमें भी ४० दिन लगता है। यह 108 दिन में पूर्ण प्रभाव में होगा।

यह स्त्री-पुरुष दोनों का नुस्खा है।

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8 Comments on “सेक्स समस्या पर : नये नुस्खे विशेष जानकारियां”

  1. Sir blockage hoti hai aur penis mein dard rehta hai.. bohat dwa bhi li hai aur doctor outing 1 mahine mein 2-3 baar krne ko bolta hai ..iss ke baad bhi koi faida nahi hai koi kaargar nuska bataye .

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