सिद्धियों के शाश्वत वैज्ञानिक क्षेत्र

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सारे विश्व की लगभग 9 % आबादी आध्यात्मिक क्रियाओं से फल की प्राप्ति में लगी रहती है। कोई पूजा करता है, कोई मन्दिर में जाता है , कोई मस्जिद में नामज़ पढता है , कोई घर पर नमाज़ पढता है , कोई बाइबिल का पाठ करता है , तो कोई कुरान या गीता का – पर इनमे से 100% इन कर्मों से प्राप्त होनेवाले फलों से संतुष्ट नहीं है। किसी का मानना है कि वह भगवान उसकी सुनता ही नहीं; जाने किस जन्म की परीक्षा ले रहा है। कोई कोई गहरा निःश्वाँस लेकर कहता है, खुदा की यही मर्जी।

लेकिन इनमें से कोई नहीं जनता की वह चाहे, तो असंभव को भी संभव कर सकता है। उस परमात्मा या खुदा ने उसे सबकुछ देकर एक ताकत से संपन्न यन्त्र के र्रोप में बनाया है। वह जो चाहे प्राप्त कर सकता है ; पर उसे अपनी कामना की पूर्ति के लिए एक ‘गेम’ खेलना होगा। इस ‘गेम’ के नियम सबके लिए एक जैसे है। कामना चाहे ‘शराब’ की हो या किसी आध्यात्मिक – तांत्रिक – यौगिक – मान्त्रिक सिद्धि की नियम सबके लिए एक ही है। वह परमात्मा अपवादात्मक नियम नहीं बनता।

सभी को शरीर के रूप में एक ही यन्त्र मिला हुआ है। इस यन्त्र का पॉवर-स्ट्रक्चर , इसके काम करने की प्रक्रिया एक ही प्रकार की है। इनकी क्षमताओं का असीमित विस्तार किया जा सकता है , पर पर यह जादू-टोने की तरह हाथ हिलाते ही नहीं होता इसके नियम है। नियमों का पालन कीजिये; आपकी कोई भी कामना हो वह पूर्ण होगी। चाहे वह असंभव कल्पना ही क्यों न हो।आपने नियमों का पालन किया है, तो वह पूरी होगी। यह प्रकृति परमात्मा के नियमों से बंधी है। अपनी प्रत्येक इकाई की कामना की पूर्ति करना इसका कर्तव्य है। इसकी डिक्शनरी में असंभव नामक कोई नही चीज नहीं है।

इस रहस्य को न जानने के कारण ही आपकी पूजा सफल नहीं होती। इस रहस्य का ज्ञान लाखों-करोड़ो सिद्धि-साधना में लगे साधु- संतों, विभिन्न धर्मों के धर्माचार्यों को भी नहीं है। वे शास्त्रों , विधियों, उपदेश और आसनों में व्रत , उपवास, निराहारव्रत , निर्जलाव्रत , जाल में खड़े होना आदि में सिद्धियाँ ढूंढ रहे है। इनका महत्व तब है, जब आप उस मूल रहस्य को जानते हो; वर्ना सबकुछ करके भी कुछ प्राप्त नही होगा।

हमारे गुरु जी के पास साधक , साधु , योगीराज, सामान्य धार्मिक जिज्ञासु, अपनी सिद्धियों में बरसों लगे रहकर भी कुछ नहीं प्राप्त करने वाले लोग आते रहते है। गुरूजी जब उनसे पूछते है , तो शास्त्रीय श्लोक , मंत्र , विधि, प्रक्रिया आदि के बारे में बताने लगते है और गुरूजी फिर सिर पर हाथ रख लेते है; क्योंकि उनका गुरु सब कुछ बताता है; पर उन गुप्त रहस्यों के बारे में नहीं बताता ; जो सभी प्रकार की सिद्धियों की आत्मा है। इन्हें जाने बिना किसी भी प्रकार की सिद्धि असम्भव है ।

यहाँ अच्छी तरह समझ लें कि सिद्धि का अर्थ सिद्ध होना यानी सफलतापूर्वक किसी कार्य या शक्ति को राप्त करके उसका प्रयोग करना। यह भौतिक ‘कामना’ के लिए भी है और आध्यात्मिक कामनाओं के लिए भी।

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22 Comments on “सिद्धियों के शाश्वत वैज्ञानिक क्षेत्र”

    1. हरी ॐ जी कृपया आप .. अन्य पोस्ट देखे उसमें आपको हमसे संपर्क के साधन प्राप्त हो जाएँगे ..

    2. में एक साधक हु मुझे जल्दी साधना करनी ह क्या करु कृपा मेरा मार्ग दर्शन करे.

      धन्यवाद.

    1. हम पहले बता चुके हैं और यह विवरण हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध है कि सिद्धि और साधनाएं रेवरी नहीं होती. यह बहोत कठिन मार्ग है और बरसों गुरु की सेवा करने के बाद शिष्यों को प्राप्त हुआ करती थी. आधुनिक युग में ऐसे बहुत से लोग हैं जो यह समझते हैं कि हलुआ और बर्फी बनाने की विधि कि तरह साधनों की विधि प्राप्त हो जाये तो कोई सिद्धि प्राप्त करके मौज करें. मुश्किल यह है कि हम कई बार यह समझा चुके हैं कि हमारे पास आपकी इच्छा का कोई निदान नहीं है, परन्तु लोग हैं कि मानते ही नहीं. प्रतिदिन 10 व्यक्ति का रिक्वेस्ट आता है. सबको उत्तर लिखते लिखते हम परेशां हो चुके हैं. आश्चर्य यह है कि हमसे संपर्क करने से पहले वो धर्मालय पर इस विषय को पूर्णतः पढ़ते भी नहीं.

  1. माँ दुर्गा के सप्तशती की सफल साधना सिध्दि का मार्गदर्शन व्यय सहित बतायेँ ।

  2. महाराज क्या किसी अलोकिक शक्ति से संपर्क करना संभव है.Mai उपाय नहीं पूछ रहा mai सिर्फ यह पूछ रहा हूँ की क्या ये संभव है।

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