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साधना कैसे करें?

भैरवी को माध्यम बनाकर सभी देवी-देवता, काल्पनिक शक्तियों से लेकर भूत-प्रेत-पिशाचिनी-डाकिनी तक सिद्ध किया जाता है।महाकाल, रूद्र, काली, दुर्गा, कमला, अर्द्धनारीश्वर, श्री कृष्ण, विष्णु आदि की भी सिद्धि कि जाती है।

नित्या रुपी सभी देवियों की साधना भैरवी के माध्यम से की जाती है। भैरव जी, अगिया बैताल आदि की भी। वस्तुतः यह कोई साधना नहीं है, साधना मार्ग है। इसमें कुछ भी सिद्ध किया जा सकता है। मन्त्र भी और काल्पनिक शक्तियां भी।

इसमें इस ज्ञान की आवश्यकता है कि किस बिंदु से किस शक्ति का सम्बन्ध है। जैसे कर्ण पिशाचिनी। यह वायुतत्व से सबन्धित शक्ति है। यानी कंठ और स्वाधिष्ठान चक्र। इसकी ताकत को आज्ञाचक्र पर केन्द्रित किया जाता है।

शास्त्रों में ऐसी किसी भी देबी के लिए संस्कृत के शाबर मंत्र प्रयुक्त होते है यानी भाव मंत्र। शायद ही कहीं बीजमन्त्रों का प्रयोग होता है। संभवतः इतनी योग्यता इनके प्रवर्त्तकों में नहीं थी। भाव मंत्र भी काम करते है; पर इसकी शक्ति भाव पर है। बीजमन्त्र सीधे चक्र को प्रभावित करते है; क्योंकि इनकी उत्पत्ति ही इन चक्रों से हुई है। 50 मात्रिक वर्णों की उत्पत्ति ही हमारी देवनागिरी वर्ण माला है।

दूसरा ज्ञान वर्ग भेद का होना आवश्यक है। सूर्य प्रधान स्त्री के साथ आप भैरव जी को नहीं सिद्ध कर सकते। वहाँ विषाणु, कृष्णा, राम, अर्द्धनारीश्वर, राजराजेश्वर शिव,सूर्य, अग्नि,चन्द्रमा, बुध, बृहस्पति –(शिव, पार्वती, गणेशजी, रूद्र, दुर्गा आदि) सब सिद्ध आकर सकते है। लक्ष्मी भी सिद्ध कर सकते है; पर काली या भैरव सिद्ध नहीं होंगे।

इसी प्रकार शनि प्रधान स्त्री से आप सूर्य प्रधान, चन्द्रमा प्रधान  शक्तियों को सिद्ध नहीं कर सकते। होगा भी तो भाव शनि होगा इनका नहीं।

 

One thought on “साधना कैसे करें?

  1. sir mujhe karan pishachini ki siddhi ke baare mai janana hai ishko kese siddh kiya ja sakta hai or koi nuksaan to nahi ho sakta or ishke niyam kya hai jaise daru nahi pina maas khana

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