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सन्यास लेना चाहते हैं। इसकी प्रक्रिया क्या है?

सन्यास लेने या देने की चीज नहीं है। यह एक मानसिक भाव है, जिसके प्रति आकर्षण परमात्मा की कृपा से ही प्राप्त होता है। दीक्षा, आचरण के नियम, वेशभूषा, विधि आदि सम्प्रदाय या आश्रम विशेष या गुरु विशेष के होते है; पर संन्यास में इसकी कोई उपयोगिता नहीं है।
जब किसी भावनात्मक चोट से या स्वयं की विचार शक्ति से भौतिक जगत से मोह टूटता है, तो व्यक्ति स्वयं और स्वयं के जीवन का कारण तलाशने लगता है। सन्यास का प्रारंभ यहाँ से होता है। इसके लिए कोई नियम नहीं है। विधियाँ और नियम भौतिक साधनाओं के लिए होते है। सन्यास पूर्णतया भावनात्मक ज्ञानमार्ग है, जो विचार शक्ति, तर्क शक्ति, मनन शक्ति के द्वारा भौतिकता का बेध कर अंतिम सत्य तक पहुँचाता है।

श्री कृष्ण ने इसका एक सरल मार्ग बताया है। सब कुछ करो, पर उससे ‘राग’ मत रखो। स्वतंत्र होकर अपने और जगत के सत्य को जानने का प्रयत्न करो। गुरु का मार्ग निर्देशन और उपदेश सन्यास रुपी उपलब्धि का ईंधन होता है। पर यह सभी भाव प्रधान तर्क प्रधान होते है। विधि प्रधान नहीं।

इस संसार में कोई किसी के लिए प्रिय नहीं होता। सभी अपने ही लिए प्रिय होते है। यहाँ कुछ भी शाश्वत नहीं। न तो जीवन, न ही जीवन के सुख। हम नहीं जानते कि हम क्या है? कहाँ से आते है, कहाँ चले जाते है। इस सत्य को जानने के लिए प्रयत्नशील होना ही सन्यास धारण करना है। न तो कपिल को किसी ने दीक्षा दी थी, न ही शंकराचार्य को या आदिनाथ को। जो आचरण, नियम, व्रत के कठोर बन्धनों में बंधा है, वह सन्यासी कैसा? वह तो पाशबद्ध अज्ञानी है। स्मरण रखे। श्री कृष्ण से बड़ा सन्यासी कोई नहीं था और राजा जनक जैसे लोगों को भी महान सन्यासी कहा जाता है।

51 thoughts on “सन्यास लेना चाहते हैं। इसकी प्रक्रिया क्या है?

    1. Kya asp meri help karege mujhe khud ke bare me janna chahti ho sucide karne ki koshish kar chuki munt nai mili itni pareshna ho ke man shant nai ho raha agr aap meri help kar dege mujhe rashta dekhne me plz

      1. आप एक बार पहले यही बात लिख चुकी हैं .परन्तु जब हमारे यहाँ से पूरी परेशानी बताने और डिटेल माँगे गये ,तो चुप बैठ गयीं .धमाॆलय.भगवान का घर है .निसंकोच पूरी परेशानी बतें .हम जरूर हेल्प करेंगे .जब तक पूरी परेशानी ग्यात नहहीं हो ,हम निदान किसका करेंगे ?

    1. सन्यास नाम का कौन सा धर्म होता है भाई. सन्यास एक मानसिक स्थिति है इसे लिया और दिया नहीं जाता, यह अपने आप उत्पन्न होता है जो विरक्ति का भाव है. इस विरक्ति को ही सन्यास कहते हैं. गीता का अध्यन कीजिये और यदि दीक्षा लेकर सन्यासी बना चाहते हैं जो की वेश भूषा और आचरण संहिता से सम्बंधित है तो बौद्ध पंथ जैसे किसी पंथ को पकड़िये. बहुत सारे पंथ बचपन से ही लोगो को सन्यासी बनाते हैं. और बहुत सारे लोग सन्यासी बनाए के उत्सव में करोड़ो का व्यारा न्यारा कर देते हैं. सनातन धर्म की दृष्टि में यह सन्यास है ही नहीं, पासबद्धता है. स्वयं अपने नियन बनाकर उसमे स्वयं को जकर लो , चाहे मन सन्यासी हो या न हो वेश भूषा सन्यासियों की बना लो. कबीर दास ने इस पर बहुत कुछ कहा है और प्राचीन ऋषियों ने भी. पूरी की पूरी गीता सन्यास की ही व्याख्या है. मेरी समझ में पलायनवाद को सन्यास कहना अज्ञानता है.

      1. विरक्ति भाव जब मन में भर गया हो और ये जानने की प्रबल इच्छा हो की मनुष्य और समस्त जीवजगत का इस जीवन में आने का प्रयोजन क्या है तो क्या किया जाए?
        सभी नाते रिश्ते बेमानी हो जाएं,स्वार्थ पर आधारित हो जाएं। जहाँ नजर जाए सभी कुछ स्वार्थ आधारित दिखे। और इन सब को बदलने की कसमसाहट आपके ह्रदय में बार बार उठे तो……..ह्रदय में वैराग्य उत्पन्न होता है।

  1. जी मेरी उम्र 21 साल है मैं अब् इस कर्म रूपी जीवन से थक गया हु मैं सन्यासी बनना चाहता हु लेकिन जब मै ये बात माँ पिता से कहता हु तो वे रोने लगते है मै क्या करू

    1. सन्यास मन की विरक्ति होता है . विरक्त हो कर किया गया कर्म ,जो ग्रहस्थी से भी सम्बंधित हो , सच्चा सन्यास है भेष भूषा व्रत सनम में सन्यास नहीं सम्प्रदाय मिलता है .गीता को समझ कर पढ़ें .हर प्रश्न का उत्तर मिलो जाएगा.

  2. जी असल में बात ये है की मैं भी सिद्धि प्राप्त करना चाहता हु मुझे क्या करना होगा।

  3. Mujhe apne jiwan me ab sirf do raaste nazar aa rahe h sucide Kar lu yaa sanyaas le lu Mai is duniya ki moh Maya ko tayagna cha h ta hu sab kuch dekh liya apni 20 saal ki umar me do raaste hi h mere pass dono s se suru hote h kya aap meri madad karunga snyasi banne me

    1. jaisa ki aapne likha hai suicide ki to bilkul sochna bhi mat kyoki is dunia se to mukti paa loge lekin is dunia se oopar ek aur dunia hai vaha bahut kasht jhelna parega abhi aapko ye dunia sachi lagti hai sharir chorne ke baad vo dunia sachi lagegi aur abhi ke mukable bahut dukhi feel karoge. agar mai tumhari kuch help kar sakta hoo to mujhe karunadep2006@yahoo.co.in par contact kar sakte ho. mujhse jo help ho saki karunga.

    1. मैं हर तरह से आपकी मदद करूगा ,पर पूरा डिटेल जानने और परिचय जानने के बाद .वैसे सन्यास एक मानसिक भाव है ंयह लेने देने की चीज नहीं होती .ग्यान जिग्यासा ही स्न्यास मागे है .गृह्स्थ जीवन का होना न होना इसका फैक्टर नहीं है .भौतिक जीवन सेविरक्ति और संसार का सत्य जानने की व्याकुलता ही सन्यास है .

  4. मान्यवर,

    यदि आपको बहुत बुरा न लगे तो मैं आपसे कुछ जानना चाहता हूँ।

    मेरी हार्दिक इच्छा है कि मैं अपने सनातन धर्म के बारे में गहनता से अध्यन करना चाहता हूं और अपने जीवन को कृतार्थ कर सकु।

    यदि मेरे सब्दो से आपकी भावनाओं को आहत किया हो तो उसके लिए आपसे छमा प्रार्थी हूं।

      1. मान्यवर मुझे आपसे अपेछा है कि आप उन ग्रंथो के कुछ नाम हमें सुझाये कृपया मार्ग दर्शन करे

  5. जिबन मे यदि ज चाहते हो नामिले त क्या करना चाहिए । सन्न्यास अथबा मिलने कि अपेक्षा

    1. मूर्खों को कुछ भी नहीं मिलता .निराशा का भाव वैराग्य नहीं है .यह प्रकृति हर एक की कामना की पूर्ति करती है पर चालाकी और आसान प्राप्ति के प्रयत्न करने वालों और एक ही बार में सब चाहने वालों को कुछ नहीं मिलता .

  6. Sanyas lene ki Deeksha kaha se le li jati hain…Mera divorce ho gaya hain ab muchko 2nd marriage nahi karni aur sanyas lena hain

  7. sanyas lena hai to ghar ko chood kar jana jaruri nahi hai, logo ki seva karo, janklayan k liye kuch karo, sanyas ghar me rehkar bhi liya jaa sakta hai ,

    1. सन्यास मानसिक होता है, यह विरक्ति या ग्यान से उत्तपन्न होता है .परा जगत और इस प्रकृति के रहस्य को जानने की व्याकुलता जब भौतिकता से विमुख कर देती है ,तो मनुष्य सन्यास का मागीॆ होता है .जब ग्यान प्राप्त कर लेता है, तो स्वत: सन्यासी हो जाता है .यही सत्य है .किसी पंथ विशेष में दीक्छा लेकर बाल मुड़वीने को सन्यास नहीं कहते .

  8. Mera naam Santosh Rana h. Main jharkhand Ke Ramgarh jile me rahta hu.. guru ji main sanyas Lena chahta hu aur khud ko behtar roop me jaannna chahta hu ki main asal me kaun hu… Maine b.com graduate kiya hai.. main apna saara jivan bhagwan Ke charno me samarpit krna chahta hu… Mujhe gyan chahiye guru ji mera contact no. +91 7762873413 hai… Guru ji mujhe apna sisya banaiye… Main pratiksha krunga…

  9. Namaskar dharma sanchalak ji…
    Main apne jivan se dukhi ho gyi hu… maine sucide krne ka b soch liya tha lekin apka commnt pdha to ehsas hua ki ye jivan anmol h……
    Maine soch liya h ki main baaki jivan sanyas le kr gujarna chahti hu….
    Plzz meri help kijiye…

  10. प्रणाम आचार्य ,
    मैं भारतीय संस्कृति की विद्या को उसके पारम्परिक शिक्षकों से पढ़ना चाहता हूँ I
    पर मुझे सन्यास कि इच्छानहीं हैं महोदय, मैं ग्रहस्त्य जीवन बिताना चाहता हूँ, क्यूंकि मैं चाहता हूँ कि इस संस्कार को मेरे पुत्र आगे बढ़ाये, मेरी कामना विद्या हैं , क्या यह गलत है आचार्य ?
    और मैं इस संस्कार का प्रचारक बनना चाहता हूँ |

    और मैं ब्राह्मण कुल का नहीं हूँ , क्या मुझे कोई गुरु अपना शिष्य स्वीकार करेंगे ?
    मेरे दादा की पिताजी सिद्ध वैद्य के शिक्षक रह चुके हैं , ऐसा मैं ने सुना है, और मुझे आयुर्वेद के सिद्धांतो से बड़ी आकर्षण होती हैं | मेरे दादाजी किसान हैं और मेरे पिताजी के आलावा सारा परिवार कृषि में ही अधिकतर व्यस्त रहते हैं |
    क्या आप कृपा करके मुझे कोई उपाय बता सकते हैं ॥

  11. मैं भगवान को पाना चाहता हूँ मुझे इसके लिये क्या करना होगा मुझे एक अच्छा सद्गुरू कहाँ मिलेगा

  12. सर मै अपना जीवन ईश्वर की भक्ति में समर्पित करना चाहता हूँ! पर गृहस्थ जीवन में ये संभव नहीं हो पा रहा है!

  13. Pranam aachary
    me sanyasi banna chaahata hu par me apne maa or papa ko chhodna nahi chahta bas moh maha se dur rahna chahta hu or apna puri jindagi maa or papa ke liy samarpit karna chahta hu.or prabhu ki sharan me rahke unka bhajan kirtan me apna jivan ko sarthak banana chata hu .bas yhi sapna mujhe aa raha he .aachary kuch upay bataiye

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