सन्यासी कौन ?

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सन्यास नाम का कौन सा धर्म होता है भाई. सन्यास एक मानसिक स्थिति है इसे लिया और दिया नहीं जाता, यह अपने आप उत्पन्न होता है जो विरक्ति का भाव है. इस विरक्ति को ही सन्यास कहते हैं. गीता का अध्यन कीजिये और यदि दीक्षा लेकर सन्यासी बना चाहते हैं जो की वेश भूषा और आचरण संहिता से सम्बंधित है तो बौद्ध पंथ जैसे किसी पंथ को पकड़िये. बहुत सारे पंथ बचपन से ही लोगो को सन्यासी बनाते हैं. और

बहुत सारे लोग सन्यासी बनने के उत्सव में करोड़ो का व्यारा न्यारा कर देते हैं. सनातन धर्म की दृष्टि में यह सन्यास है ही नहीं, पासबद्धता है. स्वयं अपने नियन बनाकर उसमे स्वयं को जकर लो , चाहे मन सन्यासी हो या न हो वेश भूषा सन्यासियों की बना लो. कबीर दास ने इस पर बहुत कुछ कहा है और प्राचीन ऋषियों ने भी. पूरी की पूरी गीता सन्यास की ही व्याख्या है. मेरी समझ में पलायनवाद को सन्यास कहना अज्ञानता है.

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