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शिवलिंग पर चढ़ाया जल, क्या वास्तव में कोई लाभ पहुंचाता है? या यह केवल आस्था है?

यह आस्था नहीं विज्ञान है। शंक्वाकार पिरामिड नुमा मन्दिर धरती की ऊर्जा तरंगों को पॉइंटेड करते है। इससे उसके ऊपर वैसी ही एक नैसर्गिक ऊर्जा बनती है और मंदिर के मध्य में मिलती में गिरती है। यहाँ शिवलिंग होता है। इसका सम्बन्ध भी धरती की ऊर्जा तरंगों से होता है। इस पर निरंतर ब्रह्माण्ड से एक नैसर्गिक ऊर्जा गिरती रहती है, जो प्राकृतिक रूप में नहीं पायी जाती।

शिवलिंग पर चढ़ाया जल इस ऊर्जा से आयनित होकर अमृत रूप हो जाता है। यह रोग, शोक, चिंता, क्लेश को दूर करने वाला होता है। बशर्ते कि मन्दिर, मन्दिर का परिसर, शिवलिंग – स्वच्छ हो।

तन्त्र में इस बाह्य नहीं, अपने मूलाधार के शिवलिंग पर सर के चाँद से सावित्री की धारा को खिंच कर गिराया जाता है। यह सावित्री ही गायत्री या गंगा है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। इससे सिद्धियाँ और शक्ति प्राप्त होती है।

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