शिवलिंग का रहस्य

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इस आधाशक्ति की प्रतिक्रिया में इसकी एक उल्टी प्रतिकृति इसके ऊपर इसी के समकक्ष बनती है , पर इसकी धाराओं घनत्व कम होता है।

इस पर भी ‘0 ’ के घर्षण से चार्ज बनता है; जो पहली संरचना के आवेश से विपरीत प्रकृति का होता है।

यही शिवलिंग है, जो विपरीत आवेश के कारण पहले में समा जाता है।

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