विधि और आचरण का महत्व

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

सिद्धि प्राप्ति में किसी विशेष विधि या विशेष आचरण संहिता का कोई महत्त्व नहीं होता। एक ही कामना की पूर्ति की हज़ार विधियां हो सकती है।
इसका खान-पान , चन्दन –तिलक , व्रत-उपवास आदि से भी कोई सम्बन्ध नहीं है।इसका महत्व मार्गविशेष के अनुसार बदलता रहता है। कोई देवी की (किसी की) सिद्धि के लिए कठोर व्रत , उपवास , स्नान, तिलक, सात्त्विकता को अपनाने के लिए कहता है, तो कोई मांस , शराब , लहसुन, प्याज आदि को खाकर पूजा-साधना को सर्वश्रेठ बताता है।
कोई कामभाव को रोकने की सलाह देता है , तो कोई रतिक्रीड़ा में ही सिद्धि प्राप्त करने का मार्ग बताता है। सबके अपने-अपने तर्क है। पर महत्व उपर्युक्त है का है; इन सबका नहीं। ऊपर दिए पाँच तत्त्व नहीं हो या एक भी नहीं हो, तो सफलता नहीं मिलेगी; चाहे साधना करने वाले स्वयं शुक्राचार्य ही क्यों न हों।

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

12 Comments on “विधि और आचरण का महत्व”

  1. Mein apne hindu dharm k itihas ko scientific proven dkhr is universe k rhsyon ko ujagar krna chahti hu or khud ko janana chahti hu ki mujhme kya khas talent h jis s mein apne jnam ko sarthak bna skhun

    1. आत्म शक्ति को प्रैक्टिकल रूप से आंतरिक बिल पावर है .इसे किसी भी क्षेत्र के अभ्यास से बढ़ाया जा सकता है . पञ्च तत्व के लिए धर्मालय देखें ..

  2. जय गूरूदेव ,मेरा नम्र निवेदन ऐ हैकी , मेरा अपना मकान और जमिन नहि छै , ऐसै तैसे जिवन आज तक चलपडी , मकान और जमिन आदि पानेके लिए मूझे क्या करने पडेगा , कृपया सरल वा सुविधा उपाय मिलेगा ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *