वास्तु विद्द्या का प्राचीन विज्ञान – एक परिचय

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वास्तुविज्ञान का अर्थ यहाँ प्राचीन वास्तु विज्ञान है, जो वास्तव में सनातन पदार्थ विज्ञान है. जब यह सृष्टि उत्पन्न होती है, तो एक पावर स्ट्रक्चर बनता है, और इस ब्रहमांड की सारी इकाइयों में वही स्ट्रक्चर फॉर्म होता है.

इस पूरे स्ट्रक्चर से सूक्ष्म उर्जतरंगों का उत्सर्जन होता रहता है, जिससे चुम्बकीय बल रेखाओं का क्षेत्र बनता है और ये आसपास की इकाइयों पर अपनी सकती के अनुसार प्रभाव डालते हैं. सभी एक दूसरे को प्रभावित करते हैं. इसी सूत्र पर मकानों के सम्बन्ध में गणना की जाती है, पर यह केवल मकानों की विद्द्या नहीं है. यह ब्रहमांड का पदार्थ विज्ञान है.

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