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वास्तु, ज्योतिष , रोग, तंत्राचार आदि से सम्बन्धित प्रश्न और उनके उत्तर

प्रश्न – क्या प्रश्नों एवं शंका समाधान के लिए शुल्क देना होगा?

उत्तर – नहीं । धर्मालय ऐसे सभी समस्या प्रधान प्रश्नों के जबाब देता रहा है; जिसमें व्यक्तिगत रूप से काम न करना पड़े । कुण्डली बनाना, फिर समस्या का समाधान बताना , नक्शा देखना, आदि काम है । इसमें समय लगता है । कोई ऐसी समस्या पर निदान पूछता है, जिसके अनेक कारण हो सकते है , तो कारण ढूँढने के लिए कुंडली बनाकर जनाना होता है । इन बातों पर मैं असमर्थ हो जाता हूँ । इनकी संख्या बहुत होती है । मैं पहले बता चुका हूँ कि मैं चंदा नहीं लेता, कोई दान नहीं लेता । उअर मुझे कोई सहायता प्राप्त नहीं होती । अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए मुझे भी काम करना पड़ता है ।

किसी रोग की औषधि के बारे में , कोई ऐसी समस्या जिसे पढ़ते ही मैं उत्तर दे सकूं, आध्यात्मिक- पारिवारिक वे समस्याएं , जिन पर मुझे काम न करना पड़े- मैं उत्तर देता रहा हूँ । एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जिसको मैंने उत्तर न दिया हो ।

प्रश्न – मकान में देवी-देवता का पूजन स्थान कहाँ होना चाहिए ।

उत्तर – ईशान (पूर्व+ उत्तर) और नैऋत्य (दक्षिण + पश्चिम) में ईशान में पूजा का आसन उत्तर एवं पूर्व मुखी लगता है । दोनों के फल अलग-अलग होते है; पर शुभ होते है । वैसे महाकाली , भैरव , महाकाल आदि में अपनी-अपनी दिशायें होती है; पर यह साधकों के लिए है । गृहस्थ के घरों में इनकी पूजा कम ही होती है ।

प्रश्न – वायुकोण में शौचालय हो; तो क्या अशुभ होता है ।

उत्तर – प्राचीन सूत्रों के अनुसार हाँ । परन्तु पहले के शौचालय या आज के शौचालय में अन्तर है । इसे गंदा न रखें और बंद रखें । ईधर खिड़की-दरवाजा हो और शौचालय भी हो, तो रोगों का आक्रमण और गलत कामों में व्यय होता है ।

प्रश्न – किसी भूमि का नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) कोण कटा हो, तो क्या करें?

उत्तर – यह कोण मस्तिष्क पर प्रभाव डालता है और आचरण पर भी । कम हो , तो भी अशुभ , अधिक हो तो भी अशुभ । सीधा करने की गुन्जाईस हो, तो सीधा कर लें ; खाली जगह में कम विस्तार की जड़ों वालें पेड़-पौधे , जो शुभ हो लगायें । गुंजाइश न तो , तो कम होने पर काले पत्थर या स्टील का अधिक का अधिक होने पर सफेद पत्थर या ताम्बे का पिरामिड लगायें । अन्य भी रास्तें है, पर वे बहुत खर्चीले होंगे ।

प्रश्न – क्या आपके बताये तरीके से सिद्धियाँ प्राप्त हो सकती है?

उत्तर – केवल मेरे ही तरीके से हो सकती है । प्राचीनकालीन गुरु अब नहीं है, जो सिद्धियाँ की साधना के आंतरिक रहस्यों को बताया करते थे । आज के गुरु मन्त्र देते हैं ; तो केवल बाहरी पूजा एवं क्रिया विधि बताते हैं । न ध्यान रूप होता है, न ही आंतरिक क्रियाओं का ज्ञान । इन्हें तो यह भी ज्ञात नहीं होता कि जिस शक्ति की साधना करने की बात है वह किस ऊर्जा- समीकरण की शक्ति है और वहां क्या –क्या होना चाहिए , दीपक- आसन, वस्त्र –दिशा – समिधा –हवन –नैवेद्य का वर्ग क्या है, यह भी ज्ञात नहीं होता । दिए मंत्र की पारीक्षा भी नहीं करते कि वह उस व्यक्ति के उपयोग की है या नहीं । ये मानसिक केन्द्रीकरण के विशेष क्रियाओं को भी नहीं बताते ।

प्रश्न – किसी शक्ति की सिद्धि में उपर्युक्त विषयों का निर्धारण किस प्रकार करते है?

उत्तर- प्रत्येक शक्ति या देवी-देवता का वर्ग होता है । उनके ग्रह, राशि, नक्षत्र आदि भी होते है । शक्ति चाहे सनातनी हो या कोई अन्य , उसकी प्रवृति के अनुसार उसका वर्ग सनातनी वर्ग में ही कहीं होता है । प्रत्येक राशि, नक्षत्र, ग्रह के वृक्ष, वस्तु, रंग , खाद्य, अनाज, जन्तु आदि वर्गीकृत है । यह सब राम-भरोसे तीर-तुक्का नहीं है । जिन्हें इन सूत्रों का ज्ञान है; वे सभी कुछ चुन सकते है ।

प्रश्न – सातवें में राहु, आठवें में शनि , बारह वें में चंद्रमा है । शादी के दो वर्ष हो गये । दाम्पत्य और ससुराल में कष्ट ही कष्ट है । एक दैवज्ञ (ज्योतिषी)के कहने पर ‘राहु’ का रत्न पहना, उसका मंत्र भी जप करती हूँ ; मगर हालत और खराब होती जा रही है ।

उत्तर – आपका उपाय गलत है । सातवाँ राहु- ससुराल, शरीर , पति से सम्बन्धित है । यह मानसिक विचारों से भी सम्बन्धित है । चंद्रमा बारह वें का अर्थ अति वृष्टि है । बहुत अधिक कल्पना प्रवाह , ब्रह्म रंध्र का असंतुलन है । पहले में केतु यानी मानसिक अस्थिरता । आपको बृहस्पति मंगल का उपाय करना चाहिए । राहु का मंत्र, पत्थर , हटाइये । आपके देवता गणेश जी है । मंत्र ‘ॐ’ है । आठवां शनि आपके योग में अशुभ अहि और ‘केतु’ को मार रहा है । कुत्ते को हल्दी मिली रोटी दें ।

प्रश्न – मेरे परिवार के लोग ही जादू-टोना कर रहे है?क्या करूँ?

उत्तर – इसके लिए पूरा डिटेल्स बताना पड़ेगा । आपने कैसे समझा कि ऐसा है?

प्रश्न – मैं चाहता हूँ कि मेरे घर में धन बरसने लगे ।

उत्तर – मैं भी चाहता हूँ और शायद ही ऐसा कोई हो, जो न चाहता हो; पर मिलता वही है; जो भाग्य में हो या प्रबल व्याकुलता के साथ सिद्ध मंत्र जप किया जाए । चाहने से क्या होता है? इच्छा पर तड़प भी होना चाहिए और कर्म भी । उस पर भी ज्योतिष योग न हो , तो जाने कितने उपायों को करने पर सफलता मिलती है । धन बरसता नहीं है । यह एक मुहावरा है । धन की आमदनी होने लगती है ।

प्रश्न – कोई ऐसा ताबीज है; जो कामशक्ति और स्तम्भन बढ़ाएं?

उत्तर – हैं; पर आंतरिक धातु दुर्बलता या लिंग की दुर्बलता हो, तो वह औषधि से ही दूर होती है । आंतरिक शक्ति ठीक हो, तो ताबीज ही काफी अहि; न हो तो औषधि के साथ ताबीज का प्रयोग करना होता है ।

प्रश्न – बुध ख़राब हो , तो क्या करें?

उत्तर – किस कारण खराब है? कारण को दुरुस्त कीजिये । बुध ख़राब हो , तो महा दुर्गा यंत्र स्थापित करके दुर्गा जी का मंत्र जपें, कुंवारी लड़कियों को मीठा खिलाएं , चाहे वह बहन ही क्यों न हो । हवा वस्त्र , ताबीज , गोल मनके की माला , खाली डब्बे आदि से दूर रहें । फर्श का मध्य और उत्तर दिशा में गड़बड़ी होगी । उसे ठीक करें ।

प्रश्न –मैं वशीकरण करवना चाहता हूँ ।

उत्तर – यह खर्चीला काम है और उचित –अनुचित भी देखना होता है । डिटेल्स भेजे ।

प्रश्न – शादी के वर्ष भर हुए है; मेरे पति अच्छे भले थे, पर बुझ गये है । शक्ति भी गवां बैठे है । मुझे एक पर शक है कि कुछ खिला दिया है ।

उत्तर – प्रकट में कोई कारण न हो , तो ऐसा हो सकता है । डिटेल्स भेजे । वैसे पति को कोई डर, कोई मानसिक भय भी हो सकता है ।

प्रश्न – मासिक बंद हो गया है? बहुत कम होता है ।

उत्तर – 5-5 ग्राम अजमाइन गर्म पानी के साथ दिन में तीनचार बार प्रयुक्त करें । दूसरा नुस्खा प्रातः सायं 20 ml ब्रांडी है । तीसरा नुस्खा है – काला तिल और गोखरू 25-25 ग्राम कूटकर रात में दो ग्लास पानी रखें । सवेरे मसले छानकर 25 ग्राम गुड मिलाकर पी जाएँ । ऐसा लगतार 15-20 दिन करें । मासिक नियमित हो जाएगा । चौथा – सिर के चाँद से निकले बाल को तर्जनी ऊंगली में लपेटकर कंठ-गले में घिसें ।

प्रश्न – सन्तान के लिए स्त्री क्या करें?

उत्तर – अश्वागंधा लाकर कूट-पीसकर छान लें । ऋतुकाल के १५ दिन पहले से १० ग्राम घी के साथ ५ ग्राम चूर्ण प्रातःकाल लगातार पीते रहें । यह एक टॉनिक भी है । इसे लगातार प्रयोग किया जा सकता है । स्त्रियों के कई शारीरिक रोग भी दूर होते है । वैसे कई दवाएं चमत्कारिक हैं, पर उन्हें बनाना अत्यंत कठिन है ।

प्रश्न – आयुर्वेद में कोई गर्भ निरोधक भी है?

उत्तर – करेले का रस और लौंग – प्रातःकाल जब तक पीते निगलते रहें गर्भ नहीं रहता , ऐसा प्रसिद्ध वैद्यों का कथन है । नारियल तेल में नमक मिलाकर योनि एवं लिंग में लगाने पर भी गर्भ नहीं रहता । रति के तुरंत बाद योनि में कालीमिर्च पतले कपड़े में बनी थैली डालने से भी गर्भ नहीं रहता । मेंढक की हड्डी कमर में बांधे रहने पर भी गर्भ नहीं ठहरता ।

प्रश्न – स्त्री की काम शक्ति बढ़ाने के भी उपाय है?

उत्तर – हाँ , परन्तु ये औषधियां शादीशुदा व्यक्तियों को ही भेजी जाती है । यह शारीरिक शक्ति, गर्भाशय की शक्ति , काम शक्ति बढाती है । योनि विकार नष्ट करती है और मन को प्रसन्न रखती है ।

प्रश्न – मोटापा दूर करने की औषधि मिलेगी?.

उत्तर – हाँ , मोटापा दूर करने और इसे बढ़ाने दोनों की तंत्र सिद्ध औषधि मिल सकती है ।

प्रश्न – कुरुकुल्ला यंत्र और उसकी सिद्धि विधि चाहिए । अभिचार करने की विधियां भी ।

उत्तर – इसका अधिकतर उसी में प्रयोग होता है; क्योंकि सभी देवियों की शक्ति इसमें समझी जाती है । यह गोपनीय और अविश्वसनीय रूप से चमत्कारिक यंत्र है । सिद्धि मूल यंत्र पर होती है ; पर अलग अलग क्रियाओं के यंत्र क्रिया विधि के लिए साथ होते हैं । मूल के साथ १० का सेट जाता है । व्यय 6100 रु + 2000रु = 8100 रु है ।

 

 

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