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वशीकरण विधि

  1. हंसपदी (मूसली) की जड़, रक्तचंदन , गोरोचन एक – एल तोला लेकर उसका अर्क खींच लें। इस अर्क को सारिवा के साथ खाने-पीने से प्रियतम सदा वश में रहता है।
  2. आकाशवल्ली के पत्ते तथा पुष्प का अर्क एक सप्ताह तक स्त्री – पुरुष एक – दूसरे को दें, तो दोनों के वश में जगत होता है , अर्थात दोनों एक – दूसरे को और अन्यों को आकर्षित करते हैं।
  3. वनहल्दी से निर्जन स्थान में बनाया गया उन्मादि अर्क तीन दिन खाने से सभी स्त्री राजा (उपभोक्ता) के वश में आ जाती है। इस उन्मादि अर्क को जो स्त्री अपने पिता के घर जाकर नियमपूर्वक पीती है, वह वशीकरण सिद्ध कर लेती है।
  4. यहाँ एक प्रयोग दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि यदि स्त्री – पुरुष दोनों वारुणी मदिरा पी लें और एक-दूसरे में लिप्त हो जाये, तो वे दोनों लोकलज्जा भूलकर एक-दूसरे से रतिसंलग्न हो जायेंगे।
  5. काले धतूरे का पंचांग एवं काले सांप (काला नाग) की केंचुली के साथ मिलाकर उसे त्रिशूल से अभिमंत्रित करके इसका धूप जहाँ भी जिसको भी दिया जायेगा, वह मोहित हो जायेगा। वाहन भी मोहित हो जायेगा (इसका तात्पर्य घोड़ा –  हाथी है) ।  काले धतूरे के बीज का अर्क निकाल लें।  इससे हड़ताल को भावित करें (शोधित हड़ताल)।  दस बार भावना देकर इसकी गोली बना लें।  इस गोली को जिसे भी खिलाया जाए, वह मोहित हो जाता है।
  6. गुरुहेली (गुडहल) , कामफली ( एक विशेष आम) , कठूमर एवं भुइफाली – इनको समान भाग में लेकर कूटकर अविवाहित कन्या एवं पुरुष के मूत्र की सात भावना दें। धतूरे के अर्क से इसमें भावना दें (जितनी भावना देंगे , गोली शक्तिशाली होगी) ।  इस गोली को घिसकर आज्ञाचक्र पर तिलक लगाने से तीनों भुवन के मोहित होते है।

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