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वशीकरण के देवता और उनकी सिद्धि (गणेश सिद्धि)

वशीकरण के वास्तविक देवता गणेश जी है। वैसे तो सभी सिद्धियों के विधाता है; पर वशीकरण की क्रिया में मानसिक तरंग प्रभावित होती है और वह गणेश जी की ही सूंढ़ है। हम भजन करते है – ‘देवा कब आओगे?’ – पर गणेश जी जाते कहाँ है?वे हमेशा हमारे साथ रहते है। जब शरीर नहीं रहता, तब भी; क्योंकि ‘आत्मा’ के सर्किट में भी उनका स्वरुप और स्थान वही है। इसी से तो उसके केंद्र को अनुभूति होती है। वहाँ ‘0’ होता है। हम कोई काम, कोई क्रिया इनके बिना नहीं कर सकते। यहाँ तक कि सोच भी नहीं सकते। इसी के बिगड़ने से लोग पागल हो जाते है।

सभी सिद्धियों का एक ही तरीका है। आज्ञा चक्र में ईष्ट को बुलाकर स्थापित करना और उनके ध्यान में मन्त्र जप करना। केवल भौतिक क्रिया बदलती है, मानसिक क्रिया वही रहती है।

मन्त्र- गणेश जी के भी मन्त्र अन्य देवताओं की भांति अनेक है। सबसे सरल मन्त्र ‘ओम’ है। इसमें तीन वर्ण है और यदि इसमें अनुस्वार की ध्वनि करते हुए थरथराहट के साथ इस मंत्र सात स्वरों में जपते हुए आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाया जाये, तो 6 महीने में ये स्थापित हो जाते है। आगे चाहे जितना ले जाएँ।

अन्य – ॐ भ्रों भ्रों भ्रों फट स्वाहा।

ये वशीकरण के आधार देवता है। वैसे अन्य देवी देवता के साधक भी यह कर सकता है।

समय – ब्रह्म मुहूर्त  – महाकाली रात्रि

दिशा – पूर्व –पश्चिम

वस्त्र – श्वेत – एक वस्त्र (सूती/ऊनी/रेशमी)

आसन – श्वेत – (सूती/ऊनी/कुश/रेशमी)

चन्दन – लकड़ी का चन्दन+ श्वेतार्क का दूध

दीपक – घी+ कपास

ध्यान रूप – जगमगाते गणेश जी या ॐ का ।

साधना काल – पूजा आसन स्थापना तैयारी आदि में चाहे जो समय लगे। इनकी ध्यान जप साधना 10 मिनट से अधिक नहीं करना चाहिए।

सावधानी :-  इनके ध्यान में शरीर एवं मस्तिष्क के अंदर का स्नेहन (लुब्रिकेशन) सूखता है। ये वायु देव भी हैं। ज्योतिष में यहाँ बृहस्पति का निवास माना जाता है। आयुर्वेद में वायु रस को सुखाने वाला माना जाता है। इसलिए रात में प्रतिदिन सिर के चाँद , कानों के अंदर, गुदा में, नाभि में गाय का घी/ जैतून का तेल/ बादाम का तेल/ कुछ न मिले तो शुद्ध सरसों का तेल प्रतिदिन डालें। कान में डालने के लिए गर्म कर लें। ठंडा तेल कान में नहीं डाला जाता।

वशीकरण की क्रियाएं

(पौरुष बंधन सहित)

  1. अपने शरीर के सिर एवं अंगों के बालों को एवम साध्य के शरीर के बालों को (चाहे एक जगह का ही) काले धतूरे, सौंफ, गुलाब के फूल, तिल, अपामार्ग के बीज के साथ आम की लकड़ी की समिधा में पहले 108 मन्त्र जपकर 108 मन्त्रों से 21 दिन हवन करने से वांछित स्त्री-पुरुष वशीकृत होते हैं। 45 दिन में सदा के लिए। ऐसा हवन का 2 ग्राम राख भी किसी वास्तु में खिलाने से भी होता है।

मंत्र – ॐ   दूं   दूं  दूं  दूं   दुर्गाये  नमः

  1. स्वयं से प्रणयभाव रखने वाली स्त्री/ अपनी स्त्री और अपने मूत्र में काले धतूरे की जड़ को घिसकर शोधित हरताल को दस बार भावित करें। डाल डाल कर सुखाएं। फिर इसमें काली मिर्च और शहद डालकर अपामार्ग, काला धतूरा, सौफ, तिल, दूर्वा, कमल के फूल डालकर नाम ग्रंथित करके 10,000 हवन किया जाए, तो अपरिचित राजा-रानी भी वशीकृत हो जाते है।

मन्त्र – ह्रीं त्रीन् त्रीन् त्रीन् क्रीं फट स्वाहा

  1. साध्य के जन्म नक्षत्र के वृक्ष की लकड़ी को पीसकर उसकी पिष्टी में उसका पसीने आदि से युक्त कोई चीज डालकर एक पुतली बनाएं। उस पुतली को सामने रखकर उसके जन्म नक्षत्र के वृक्ष के फल-फूल या पत्तों काले धतूरे एवं हरताल के साथ से 21 दिन तक हवन करने से साध्य कही भी हो व्याकुल होकर साधक के पास आ जाता है।
  2. सत्य में सिद्धि किये हुए कोई व्यक्ति छवि को ध्यान में लाकर( चाहे तस्वीर से) प्रतिदिन महाकाल रात्रि में अपने ईष्ट के मन्त्र को जपते हुए एक-एक घंटे कामना कर, तो 21 दिन में, उसकी कामना पूर्ण हो जाती है।

( इसमें हजारों नुस्खें एवं मन्त्र है)

 

सम्मोहन – वशीकरण में अंतर है

सम्मोहन में आज्ञाचक्र पर काबू किया जाता है। उस समय व्यक्ति सम्मोहन कर्त्ता के नियन्त्रण में रहता है; पर वशीकरण में मस्तिष्क ही बदल दिया जाता है। वह स्वयं ही साधक या लक्ष्य को पसंद करने लगता है।

 

5 thoughts on “वशीकरण के देवता और उनकी सिद्धि (गणेश सिद्धि)

    1. यकीन एक व्यक्तिगत विछार है. इसका सम्बन्ध खुद की जानकारियों से होता है .विशेष जानकारी के लिए धर्मालय को पूरा पढ़ने .सायद कुछ समझ में आ जाए .

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