लालच के मारों को सिद्धियाँ प्राप्त नहीं होतीं

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सिद्धि साधना पाने की योग्यता

जब हम कोई भी काम करते हैं, तो उसमें कोई न कोई कामना होती है. पर काम के समय हमें काम पर घ्यान देना होता है, न कि कामना पर. यदि हम अपनी कामना की लालच में ही डूबे रहे, तो उस काम में ध्यान नहीं होगा और सफलता नहीं मिलेगी, बल्कि हानि भी हो सकती है.

यह सत्य बड़े कामों में और शक्तिशाली होता है, क्योंकि वह कई छोटे टुकड़ों का जटिल जोड़ होता है. सिद्धि जैसा काम,जो वर्षों के कठिन परिश्रम का होता है, 80% मानसिक होता है. यदि साधक हर समय इस भाव में डूबा रहा की सिद्धि प्राप्त करके वह क्या क्या करेगा, तो उसे कभी सफलता प्राप्त नहीं होगी. मकान अपने ही सुख के लिए लोग बनाते हैं, पर बनाते समय उसके निर्माण के स्टेप की जरूरतों पर ध्यान देना होता है.

सिद्धि कैसे पायी जाये?

सिद्धि कोई सरल काम नहीं है. यह खाना बनाने की विधि नहीं है. यदि कोई तुरंत किसी सिद्धि को दिलाने का दावा कर रहा है, तो वह फ्राड है. बांस केला का फल भी साल भर में अंकुरित होता है, सिद्धि कैसे दिनों में प्राप्त हो जायेगी? प्राचीन आचार्यो ने भी इसे वर्षों का काम बताया है.

उस पर आज गुरू को ही ठग कर सिद्धि प्राप्त करने वालों की भरमार है. ये कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि करके समाज की भलाई करना चाहते हैं, पर मिनटों में उपाय जानना चाहते हैं, जैसे यह बैगन का भुरता बनाने की विधि हो.

शास्त्र कहते हैं की आधी संपत्ति या सबसे प्रिय स्वजन गुरु को दान कर दो, देवता को स्वयं को समर्पित कर दो, पर ये दोनों से केवल लेना चाहतें हैं, देना नहीं चाहते. यहाँ भी चालाकी से काम निकल जाए, यह भावना होती है. ठग इनकी लालच का फ़ायदा उठाते है और अनेक बहानों  से ठग लेते हैं, तो भी अपनी गलती को नहीं, विद्द्या को ही बदनाम करतें है.

यदि आपकी भी यही प्रवृति है, तो व्यर्थ समय नष्ट मत कीजिये. हजार जन्मों में भी कुछ नहीं मिलेगा, क्योंकि आप इसकी पहली ही शर्त तोड़ रहे हैं कि मन को निर्मल करो.

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