राई

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राई (Brassica Nigra)

यह कई रोगों की दवा है .  राई के दाने के फायदे .गठिया  और वात रोग का यह  आयुर्वेदिक रामबाण इलाज है

 रोग – गठिया  और वात रोग

दवा- यह दो प्रकार की होती है. काली और लाल (क्रमशः); यह बहुत ही उग्र पदार्थ अहि। पीसकर शरीर(Body) पर लगाने पर फोले पैदा करता है। इसे मसाले में कहीं-कहीं प्रयुक्त किया जाता है। बिहार आदि में आम(Mango) के आचार (Pickle) के मसाले में इसे दिया जाता है। कम मात्रा में यह पाचन शक्ति (Digestive Power) को सही करता है। राई का स्वतंत्र प्रयोग नहीं किया जाता। यह कांजी बनाने का भी के प्रमुख घटक है।

इसका  लेप गठिया, जोड़ो के दर्द (Joint Pain) को ठीक करता है, पर कभी इसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं करना चाहिए।

हर प्रकार का दर्द की दवा

महाबला तेल – हमारे यहाँ काल भैरव तेल, महाबला तेल, महा दुर्गा तेल बनाये जाते है , जो माँगने पर ही बनवाये जाते है। ये तीन  प्रकार के तेल चमत्कारी ही नहीं अद्भुत है। ये 15 मिनट में जोड़ो के दर्द ( Joint Pain) , नसों के दर्द (Nerve Pain) , कमर दर्द , गठिया, वात से कमर झुकना, चलने में परेशानी, आदि अनेक रोगों में काम  आते है। इनमें अन्तर केवल शक्ति का है, जो इस प्रकार क्रम से बढ़ता है –  काल भैरव तेल –महादुर्गा — महाबला तेल à इनकी 10 बूँद या आधा चम्मच गर्म करके मालिश करने पर हवा से बचाने पर 15 दिन में रोग शमन हो जाता है। इनके साथ हरिद्रा शंख महायोग प्रयोग करें; तो विषम वातरोग, गठिया , दर्द (Pain) आदि जड़ से मिट जाये। केवल तेल का प्रयोग भी मिटा देगा, परन्तु इसे 6 महीने नित्य प्रयोग करना पड़ेगा।

भैरव तेल में 9, महादुर्गा तेल में 12 और महाबला तेल में 18 जड़ी बूटियों का काढा(Juice) जलाया जाता है।

विशान्त पटेल (धर्मालय सचिव):  (0) 8090147878

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3 Comments on “राई”

    1. आपके सुझाव के लिए धन्यवाद. हम जरूर आपके कहे गए विषय पे लेख पोस्ट करके आपको अवगत कराएँगे. तब तक कृपया धर्मालय के एनी लेखों को पढ़ें और धर्मालय का सोशल मीडिया द्वारा प्रचार करने में हमारी सहायता करें. धन्यवाद

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