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ये सर्व शक्तिमान और रोता हुआ धर्म ज्ञान

आजकल धर्म की चमचमाती नदियों में बाढ़ आई हुई है. कोई धन दिला रहा है, तो कोई प्रेमिका. पति वश में नहीं है, तो ये तुरन्त एक उपाय से उसे आपका पालतू बना देंगे. काम नहीं बन रहा, बस एक नींबू काट कर आगे पीछे फेक दीजिये, सारे काम बनने लगेंगे. कैसे? क्यों? किस प्रकार से इन्हे कोई मतलब नहीं होता. औरतों का तो एक बड़़ा वर्ग ‌मजारों के मौलवियों तक के पास भाग रहा है, तो मर्द भी कम नहीं हैं, समस्यायें हैं, बस ‌कोई उपाय चाहते हैं कि कर‌ लें और सब सही हो जाये. चारों ओर खुशियाँ ही खुशियाँ हो. कुछ लोग ऐसा कर देने का दावा भी कर रहे हैं, बल्कि गली गली ऐसे लोग पैदा हो गये हैं. इस लिए पैदा हो गये हैं कि बिना परिश्रम किये, जादूई ताकतों से सब कुछ प्राप्त कर लेने की लालसा लोगों में इस प्रकार घर कर गयी है कि धर्म का मतलब ऐसी चमत्कारिक विधिय‌ाँ हो गया है, जो आनन फानन में मन की सारी अभिलाषायें ‌पूर्ण कर दे. ऐसे चमत्कारिक बाबा भी करोडों में पैदा हो गये हैं. अफसोस राम जी के समय में ये नहीं थे, वर्ना उन्हें रावण से यु‌द्ध करने की आवस्यकता ही नहीं होती.

कोई भी तंत्र क्रिया एक दिन में सम्पन्न नहीं होती. कोई भी पूजा एक दिन में सफल नहीं होती. कोई भी टोटका सभी के लिए नहीं होता और एक दिन में फल नहीं देता. कोई भी सिद्धि केवल विधियों को जान कर नहीं की जा सकती. कोई भी शक्ति बिना शारीरिक मानसिक श्रम किये फल प्रदान नहीं कर सकती. वह केवल परिस्थितियों को अनुकूल करती है और विघ्न को नष्ट करती है. और इनमें से कोई भी धर्म नहीं है, बल्कि धर्मज्ञान पर आधारित प्रयोग मात्र हैं. सनातन धर्म एक विज्ञान हैऔर जो इन प्रयोगों के नियम सूत्रों को नहीं जानता, उसके प्रयोग बिना theory के practical हैं, क्या अनर्थ करेंगे, कोई नहीं बता सकता.

लाखों लोग प्रति दिन ठगे जाते हैं. जाने कितने लोग, लोगों की कुडलिनी जागृत कर रहे थे. वे कह‌ाँ गये‌? मेरे दो शिष्य ने एक विश्व प्रसिद्ध देवी से, जिनके बड़े बड़े होर्डिंग्स 10-11 वर्ष पहले दिल्ली में पटे पडे़ थे, पूछा कि हमारे गुरू जी ‌तो कहते हैं कि कुंडलिनी की साधना बहुत उच्च साधना है और सामान्य व्यक्ति के वश का रोग ‌नहीं है? तो वे बिना उत्तर दिये उठ कर चलीं गयी. कहाँ हैं वे लोग, जिन्होंने कुंडलिनी जाग्रत करवायी थी?  एक विशव प्रसि‌द्ध महान थे, गणेश जी को बुलवा कर ही शादी करवा देते थे. सैकड़ों युवकों ने उनके आश्रम में माला जपते वर्षों समय नष्ट कर लिया. दोष इन लोंगों का नहीं है. दोष उनका है, जो पेड़ के अमृत फल की कामना करते हैं. पेड़ लगाने में तो मेहनत होती है. जब सुनते हैं कि सिद्धि में दो वर्ष लगेंगे और धन भी व्यय होगा, तो पहाड़ पर चढने की सुनते ही सिद्धि का भूत दिमाग से उतर जाता है. इन्हें दो घंटे में कुंडलनी जाग्रत करवा देने वाला चाहिये, वह भी दो चार हजार में. कोई समझना ही ‌नहीं चाहता कि कोई भ‌‌ी आधात्मिक कार्य खरीदा नही जा सकता. गरू दक्षिणा एक श्रद्धा से भरी परम्परा है कीमत नही .  

One thought on “ये सर्व शक्तिमान और रोता हुआ धर्म ज्ञान

  1. सही कहा आप ने सब लोग आसानी से हासिल करना चाहते है उसी सोच का फ़ायदा उठाते है लोग

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