आप यहाँ हैं
धर्मालय > धर्म का ज्ञान क्षेत्र > मिनटों, घंटों, दिनों में कुण्डलिनी जागरण? सावधान: यह खतरनाक धोखा है

मिनटों, घंटों, दिनों में कुण्डलिनी जागरण? सावधान: यह खतरनाक धोखा है

बर्दाश्त करते करते अति हो गई है. आज कल ऐसे ऐसे महान पैदा हो गए हैं जो घंटों दिनों में कुण्डलिनी जाग्रत कर रहे हैं. कुछ ऐसे अघोरी पैदा हो गए हैं,जो फोन घुमाते ही कोई भी समस्या दूर कर देतें है. इनके पैदा होने से मुझे एतराज नहीं है. मूर्खों की मूर्खता से ही चालक अपराधी जीता है. मुझे ऐतराज इस बात पर है कि ये अपना विज्ञापन धर्मालय के वेबसाईट और मेरे फेसबुक के प्रोफाइल और पेज के कमेन्ट में डाल  रहे हैं. मैं सभी धर्म  जिज्ञासुओं को सावधान करता हूँ कि ये सभी अपराधी प्रवृति के लोग हैं. इनसे सावधान रहें. इन लोगों का धर्मालय से कोई सम्बन्ध नहीं है और मैं इन्हें नहीं जानता.

दुनिया में ऐसा कोई नहीं है जो जो कपाल पर हड्डी फेर कर समस्याओं का निदान कर दे. मैं २२ बरसों तक सिद्ध पुरूषों, वास्तविक अघोरियों  के बीच भटकता रहा हूँ. उनसे बहत कुछ जाना समझा भी है भला किसी अघोरी का लोगों की समस्या से क्या लेना देना? या कोई साधक क्यों आपकी समस्या दूर करेगा? उसके पास समय कहाँ है? विज्ञापन करके आपको बुलाएगा? कोई वास्तविक साधक होगा, तो आपकी किसी प्राथना पर भी तब तक ध्यान नहीं देगा, जब तक वह द्रवित न हो जाये. ये सभी विज्ञापन करने वाले क्रिमनल हैं. सावधान रहें.

धर्मालय बार बार सावधान करता आया है कि तंत्र के प्रयोगों से सब कुछ संभव है, पर यह एक विद्या है, जैसे चिकत्सा शास्त्र एक विद्या है. यह जीव की चिकित्सा का शास्त्र है और किसी भी उपचार  की पूरी प्रक्रिया होती है. परीक्षण सहित. हाथ घुमा कर समस्याओं को दूर करने और हर समस्या का निदान करने वाला फ्रॉड होता है. इस दुनिया में सर्वशक्तिमान कोई नहीं है.

इसी प्रकार कुण्डलिनी की प्रसिद्धि को भुनाने वाले अनेक पैदा हो गए हैं. ये जो कुंडली के विषय में ज्ञान छंट रहे हैं, यह सड़क ज्ञान छाप पुस्तकों में सडक के फुटपाथों  बिकता है. इनसे पूछिये की लिंगमूल का क्या अर्थ है? मूलाधार कहाँ है, तो इनका ज्ञान सामने आ जाएगा.

ये मूर्ख तो यह भी नहीं जानते कि कुण्डलिनी केवल मूलाधर में नहीं होती. ये रीढ़ में 9,  शरीर में 99, कुल 108 होतीं हैं और कोई सम्पूर्ण शरीर, चाहे वह किसी भी इकाई का हो एक कुण्डलिनी ही होती है. ब्रह्मांड भी एक कुण्डलिनी है. यह एक ऐसी संरचना है जो सर्वत्र व्याप्त है. एक में एक समाई हुई, प्याज के परतों के सामान यह एक अति रहस्यमय, अति जटिल, विचित्र संरचना है. सनातनधर्म के सारे धार्मिक क्रियाकलाप, सभी पूजा पाठ, सभी देवी पिंडी, सभी शिवलिंग, या जो भी इस धर्म या तंत्र का सार्विज्ञानिक आधार है. उसके अन्दर कुण्डलिनी का ही विज्ञान है. कभी सोचा है की माला में 108 दानें क्यों होतें हैं? आयुर्वेद में 108 मर्मस्थल का रहस्य क्या है? दिव्य शिवलिंग 12 क्यों माने जाते हैं? देवी पिंडियों का रहस्य क्या है? जरूरत क्या है? बाबा लोग हैं? सब कुछ प्रदान करने वाले? मूर्खों के सर पर सिंग नहीं होते. वे देखने में आदमी जैसे ही लगते हैं.

जाने कितनी ही गुरु परम्पराओं, मार्गों, के साधक; साधू,संत अघोरी, नागासाधू, योगी कुण्डलिनी की साधना में पूरा जीवन लगाते रहे हैं और उनमें भी कोई विरला ही सफल हुए. अब उन्हें कहाँ मालूम है कि परमात्मा स्वयं अवतार ले चुकें हैं और घंटों में कुण्डलिनी जागृत कर रहे हैं.

भाई, भगवान हो, जनता की कुण्डलिनी जाग्रत करने के लिए मरे जा रहे हो; तो मोदी जी को बुला कर उनकी कुण्डलिनी जागृत करो न? समस्याएं दूर करने में इतने सक्षम हो, तो उनकी समस्या दूर करों न? यह देश बहुत सी समस्याओं से जूझ रहा है. हमारा प्रधानमंत्री उससे संघर्ष कर रहा है. बहुत से अडंगा लगाने वाले, बहुत से शत्रु उनको परेशान कर रहे हैं. उनको पत्र लिखो न कि तुम हवा में हाथ घुमा कर सारी समस्या दूर कर सकते हो. 

सावधान; ये क्रिमनल हैं. इन्हें ज्ञात नहीं कि धर्मालय क्या बला है वरना ये पास भी आने की हिम्मत नहीं करते. मैं इन लोगों को कड़ी चेतावनी दे रहा हूँ. हमारी किसी भी सम्बंधित वस्तु पर विज्ञापन करना भारी पड़ सकता है.

3 thoughts on “मिनटों, घंटों, दिनों में कुण्डलिनी जागरण? सावधान: यह खतरनाक धोखा है

  1. नमसकार
    Kundalni shakti aur Anhad naad me sambandh kya? Aur sach kya hai?
    Kya aapke darshnabhilasi ho sakte hai
    Mujhe aapka aashirvaad chahian.
    Dhanyavaad

    1. kundlni 9 chakron ki ek ladi hai , jo reedh men hoti hai . iske chakron ki ek vishesh sanrachana hoti hai .aajkal naye naye mah jaankar paida ho gaye hain ,mooladhaar ke nichle chakr ko kundalini bata rahen hain ,jo uska ek hissa matr hai .beech ka chakr anahat hai .isase hamara hriday viksit hota hai ..aadhunik bhasha men yh nabhik hai .yhana visfot hota rahta hai .isase pranurja ka utpadn hota hai kisi bhee sadhana men antarmukhi hone or yh sunai deta hai . milna sambhav nahi hai. pr day darjanon log milna chahte hain . itna samy nahi hota . iski jaroorat bhee nahi hai. main ek saadharan aadmi hun .

  2. प्रभु क्या कोई साधारण व्यक्ति भी अपनी कुंडलिनि जागृत कर सकता है अगर कर सकता है तो किस प्रकार कर सकता है यह जानना चाहता हूं और अगर नागा साधुओं और अघोरियों में क्या भिन्नता है कृपया कर मेरे इन 2 प्रश्नों का उत्तर देने की कृपा करें हर हर महादेव सदाशिव

Leave a Reply

Top