मनोकामना पूर्ति के चमत्कारीक उपाय क्या हैं?

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अपने स्व को मजबूत करके मानसिक शक्तियों  को मजबूत बनाना .जब तक आप किसी अल्ला-उद्दीनी चिराग की तलास में हैं कोई सफलता नहीं मिलनेवाली . धर्मालय के पोस्टों को पढ़ कर,एकाएक हजारों लोग सिद्धि पाने के लिए दौड़ परे . मनो यह कोई टेक्निक हो और जन कर हो और जन कर हेर अमास्या को दूर कर लेंगे ,जो साधक वास्तव में सीधी कर रहे होंगे ,वे हंस रहे होंगे ,बहुत कठिन है डगर पनघट की . यह प्रबल मानसिक अभ्यास और ताप का मार्ग है, चाहे वह तुच्छ शक्तियों की सिद्धि हो .सब मिला कर दस स्टेप नोट हैं और तीन बरस से कम समय नहीं लगता . इसे जाने बिना जो भी यह सोचता है की यह बिना परिश्रम मिलने वाला जादुई अंगूठी है और बिना गुरु को उचित प्रतिदन एवं आदर श्रधा दिए उससे चालाकी सेजान  लेगा वह हास्य का पात्र है ,                                                                                                                                फिर सिद्धि मिल भी गई तो भी अलग अलग मनोकामना के लिए ,अलग अलग परिश्रम करना होता हैसिद्धि, तंत्र , मन्त्र , गंदे, ताबीज आदि आपको ही सशक्त और अनुकूल बनाते हैं परिस्थितियां और वातावरण चमत्कारिक रूप से बदलते हैं अप्रत्यासित घटनाएँ घटने लगती हैं .ये ही चमत्कार  होता है जिसका सनातन विज्ञानं का वेज्ञानिक आधार है.न तो छत से सोना बरसता है ,न ही सुन्दर कामिनी नाचती हुई आ जाती है .१२०० बरस पहले इस देश में कुछ ऐसे लोग पैदा हुए ,जिन्होंने सनातन धर्म को नाश करने के उद्देश्य से ऐसी साधनों का प्रचार शुरू किया और  लोगों को अपना अनुयाई बनाने के लिए झूठ का सुनहला महल खरा कर दिया,गहने दे जाती है, जो मांगो  सब देती है ,जिस कामिनी की इच्छा करो वह नाचती हुई आती है. वशीकरण का यह रूप ,सरलता से मनोकामना की पूर्ति .लोग टूट पड़े . सनातन धर्म की कठिन साधनाएँ उनेह बेकार लगने लगीं .मनोविय्ज्ञानिक रूप से हर पंथ को नष्ट कर देने की यह साजिश आज भी चल रही है.मुर्ख और लालची लोग मस्तिष्क और बुद्धि को परे रख कर परवाने की तरह जल जाने के लिए दौड़ रहे हैं . उन्हें लाख अम्झाओ की चमत्कार भी परमात्मा के नियमों से होता है .देवी देवता से ले कर हर इकाई इससे बंधी हुई है , पर लकच सोचने का मौका ही नहीं देती की राम को भी रावण से युद्ध करना पड़ा था और कृष्ण के होते हुए भी पांडवों को कर्म करने पड़े थे .सिद्धि पूजा मन्त्र  जप आदि सक्तिशाली बनाते हैं ,पर मशीन कितनी भी सक्तिशाली हो जय ,उसे चलाना पड़ता है .मुर्ख ही उसकी पूजा आरती करके फल की कमाना करता है .

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