आप यहाँ हैं
धर्मालय > दिव्यास्त्र और दिव्य गुटिकाएं > ब्रह्मास्त्र गुटिका

ब्रह्मास्त्र गुटिका

रीछ के बाल, गीदर के बाल, मनुष्य के बाल, बिल्ली के बाल, बकरी का बाल, मोर का पंख, कपास की गिरी, तज, जटामासी, शिवनिर्माल्य धान, बच, सांप की केंचुली, हाथी दांत, गाय के पूँछ के बाल या सींग, काली मिर्च, हींग, बकरी की मिंगी, आक, अपामार्ग, धतूरा, भांग, खुरासानी अजमाईन, ऊँट की विष्ठा –

इन सब को सुखा कर कूटकर श्री कृष्ण मन्त्र का जाप करते हुए 1188 बार ब्राह्मी का रस डाल-डाल कर घोंटे। पहले चूर्ण कर लें, फिर रस डालकर घोंटकर 5-5 ग्राम की गोली बना लें।

अंगारे पर रख कर इस गोली से धुंए उठाने पर सभी प्रकार के भूत प्रेत, पिशाच, ब्रह्म राक्षस आदि भाग जाते हैं,
(यह भूत प्रेत प्रकोपित का इलाज नहीं है। स्थान शुद्धि की गुटिका है। उस स्थान पर निवास करने वाली सभी दुष्ट शक्तियाँ भाग जाती हैं।)

Leave a Reply

Top