बालों, अधोवस्त्र आदि के प्रयोग से किया-कराया

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प्रयोग – यदि किसी कटे बालों को मन्त्र सिद्ध करके 9 दिन के अंदर धतूरे के किसी पुराने वृक्ष की जड़ में लकड़ी में छेड़ करके कुछ निश्चित संख्या में प्रत्यारोपित कर दिया जाये, तो क्या होगा?

बालों में जो एनर्जी मिलेगी, वह धतूरे की होगी। आपके बालों का जो ऊर्जा समीकरण है, वह धतूरे की ऊर्जा में परिवर्त्तन कर देगा।

विज्ञान संभवतः इसको न माने; पर सनातन –सूत्र यह कहता है कि किसी भी इकाई से जो ऊर्जा – तरंगों का उत्सर्जन होता है, उसके तीन रूप होते है। एक स्थूल ऊर्जा, जिसका आधुनिक यंत्रों से ज्ञान होता है; जैसे ‘औरा’। यह वृक्ष, जीव, पृथ्वी सबमें प्रत्यक्ष किया जा चूका है। दूसरा स्तर 6 लेयर में लिपटी एक ऐसी सूक्ष्म ऊर्जा का होता है; जिसमें एक में एक पाइप की तरह स्थूल बाहर, सूक्ष्म अंदर समाया रहता है। इनको अवशोषित करने वाली कोई ऊर्जा-पृथ्वी पर नहीं होती। यानी इनकी सूक्ष्मता के स्तर पर पृथ्वी पर कोई ऊर्जा नहीं पायी जाती। इनका अवशोषण किसी जीव – वनस्पति के अंदर ही हो सकता है, क्योंकि इन्ही से इनका उत्सर्जन होता है।

सनातन विज्ञान का एक अन्य सूत्र बताता है कि पृथ्वी पर जंतु जगत (-), वनस्पति जगत (+) है। ये भी अपने अपने स्तर पर +, – के वर्गों में बंटे हैं। यह वर्गीकरण केवल नर-मादा के स्तर पर नहीं है। सारे निशाचर (+) होते है और सारे दिवाचर (-)।

अब धतूरे के पत्तों और प्रत्यारोपित बालों से निकलने वाली तरंगों की (+) सूक्ष्म तरंगे बाल वाले को ढूंढेगी, क्योंकि उसका समीकरण उसके अनुरूप है। वह ढूंढ कर अपने उस नेगेटिव में समाहित होने लगेगी और यह निरंतर होता रहेगा। अब धतूरा खाने से जितने साइड इफ़ेक्ट होते है; उस व्यक्ति में उभरेंगे और सूक्ष्म स्थूल से अधिक तीव्र प्रतिक्रिया करता है, इसलिए वह व्यक्ति पागलों  जैसा व्यवहार करने लगेगा, अत्यंत कामुक हो जाएगा, नींद , आलस्य, क्षुब्धता , क्रोध, मतिभ्रम जैसे विकार से प्रभावित हो जाएगा।

और यदि उस धतूरे की जड़ के चारों ओर मिट्टी को खोदकर उसमें कुछ अन्य जीव-जंतुओं के अवशेष या रासायनिक खनिज डाल दिए जाए, तो स्थिति और भयानिक हो जाएगी। जड़ में अधोवस्त्र कूटकर डालने जैसे क्रियाएं की जाती है।

लोग विज्ञानं-विज्ञान चिल्लाते हैं। पर इन बातों को समझने के लिए तो सनातन विज्ञानं को गहराई से जानना पडेगा, जो किसी की कल्पना में भी नहीं है। भला सपेरों के पूर्वज को विज्ञान से क्या मतलब? हमारी यह सोच है। इस कारण किये-कराए , जादू-टोना को उपहास का विषय माना जाता है।

(जनहित को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी प्रक्रिया और मन्त्र, रसायन नाम आदि को गुप्त रखा गया है)

 

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One Comment on “बालों, अधोवस्त्र आदि के प्रयोग से किया-कराया”

  1. बहूत बहूत बढिया जानकारी है । धन्यवाद ।

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