बालकों के सामान्य रोग और इलाज

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  1. वमन, दस्त, खाँसी, ज्वर – अपने शहर की जड़ी-बूटी की दूकान पर चले जायें। नागरमोथा, काकड़ासिंगी , जवासा, अतीस और पीपल – 100-100 ग्राम लेकर धोकर सुखा लें। इन्हें कूटकर मिक्सी आदि से महीन चूर्ण बनाकर कपड़े से छान कर रख लें।

इस चूर्ण को जरा-जरा सी मात्रा में शहद में मिलाकर चाटने से नन्हे शिशुओं से लेकर किशोरावस्था तक की खाँसी , बलगम, अतिसार और ज्वर नष्ट हो जाते है। यह प्राचीन घरेलु नुस्खा है। वमन भी दूर होता है।

अतिसार (दस्त) के समय – धनिये का चूर्ण , धान की खीलों का चूर्ण , मुलेठी का चूर्ण , बेल की जड़ का काढ़ा  जादू  की तरह असर करता है।

 

  1. मूत्र के कष्ट – कम पेशाब , पेशाब में जलन होने से बालक बार-बार मूत्र नली पर हाथ रखता है। बहुत रोता है। पीपल, सोंठ, छोटी इलाइची , मिश्री इनको बराबर लेकर चूर्ण करें। सबका 10% सेंधा नमक का चूर्ण मिला दें। इस चूर्ण को शहद के साथ जरा-जरा सी मात्रा में चाटने से उसके मूत्र आदि की जलन या पेशाब के कष्ट दूर हो जाते है। मात्रा एक चुटकी से 3 ग्राम तक क्रामंक 1 या 2 में उम्र के अनुसार तय करें।
  2. सुखंडी रोग , दुर्बलता – बिदारीकंद (देखकर ताजा लें। काला पड़ा या सड़ा, घुन लगा न लें) जड़ी बूटी वालों के यहाँ मिलेगी। बिदारीकंद , धोकर चार पांच घंटा फुलाकर सुखाये हुए जौ और गेंहू और बिदारीकंद – इन तीनो की मात्रा बराबर लेकर पीस लें या पिसवा लें। इसकी 5 ग्राम से 10 ग्राम की मात्रा गाय के घी के साथ प्रातः सायं खिलाकर मिश्री मिला दूध पीलायें। यह वयस्कों के भी सुखंडी रोग की दवा है। उनकी मात्रा – 20 ग्राम होती है।
  3. सामान्य बल, मांस, कद वर्द्धक टॉनिक(दवा) – असगंध , शतावरी, बिदारीकंद , मुलेठी और वायविडंग – बराबर मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की मात्रा – 3 से 5 ग्राम प्रातः सायं घी के साथ है। वयस्क 10 ग्राम प्रातः सायं। ऊपर से पका केला और मिश्री मिला दूध पीयें।

यह टॉनिक(दवा) लगातार भी पीया जा सकता है। यह आयुवर्द्धक , रक्त शोधक , पेट के लिए और शरीर के सभी अंगों के लिए उत्तम है।

  1. दांत निकलने के समय का कष्ट – दंत पाली में शहद में 2% चूना मिलाकर थोड़ी मात्रा में मालिश करें। कहते हैं कि बालक के गले में सीप की माला डालने पर भी दांत जल्दी निकल आते है और कष्ट नहीं होता। केले के फूलों का रस पीने लगाने से दांत के समय के कष्ट , बुखार अदि भी मिट जाते है।
  2. नेत्र रोग – धतूरे के पत्ते, मदार के पत्ते या नीम की कोपलों का रस या ताजे पत्तों का तुंरत निकालकर गरम करके ठंडा करे और सहन करने लायक हो , तो कानों में डाले। इससे नेत्र दुखता हो, तो फ़ौरन आराम होगा। दोनों आँख में पीड़ा हो , तो दोनों कान में डालें एक में पीड़ा हो , तो विपरीत दिशा की कान में डालें। यदि इन रसों को बराबर गाय की घी मिलाकर गर्म करके उपर्युक्त तरीके से डालें, तो और भी अच्छा है। यहाँ दांतों की भीषण पीड़ा को भी नष्ट करता है , यदि दोनों कान में  डाला जाये।कान रुई से बंद कर दें। गुलाब जल या जीरे को रात भर  रखकर छाना गया पानी भी लाभप्रद है।

सावधानी  – एक ही बार के प्रयोग से काम हो जाता है। यदि दूसरी बार प्रयोग करना हो , तो कम से कम दो घंटे बाद करें। इससे दांतों के या आँखों के इन्फेक्शन , जर्म मर जाते है और जख्म में भी लाभ होता है। पर इसका प्रयोग अधिक बार न करें। दो बार में पीड़ा नष्ट न हो, केवल राहत मिले, तो मेडिकल परिक्षण करवाएं। यह इस बात का संकेत है कि पीड़ा का कारण  इन्फेक्शन या जर्म नहीं कुछ और है। बार –बार प्रयोग वर्जित है।

यह बड़ो की भी चिकित्सा है ।

विशेष – सफ़ेद प्याज या प्याज का (देशी) रस आखों में डालने से रतौंधी दूर होती है; पर यह आँखों में लगता है।

 

  1. पेट दर्द – (i) कब्ज हो, पेट फूल रहा हो, तो करेले के पत्तों का रस 5 ग्राम , ½ ग्राम हल्दी मिलाकर पिला दें। कै – दस्त होकर विकार निकल जाता है।

(ii) निम्बू के रस में जायफल घिसकर चाटने से अपचनी रोग नष्ट हो जाता है।

(iii) बढे पेट में ठंडे पानी में पुराना शहद मिलाकर रोज सबेरे पिलायें। यह बड़ो की भी चिकित्सा है।

(iv) कब्ज या मल रुका हो तो; तो रात में छुहारे पानी में रखें। सुबह उनको मसलकर पानी छान लें। इस पानी को बार-बार उसकी उम्र के अनुसार चम्मच या ग्लास से पिलायें। या कुछ गुलाब के फूल चीनी के साथ खिलाकर (हरी पत्ती, जो नीचे होती , निकाल दें) पानी पिलाएं। इससे दस्त होकर कब्ज समाप्त हो जाता है।

  1. लू या आग की लपक – एक देशी प्याज को आग में चुन लें और एक कच्चे प्याज के साथ पर पीसकर 2 ग्राम जीरे का चूर्ण मिलाकर 25 ग्राम मिश्री के साथ खिलाये। यह बड़े व्यक्ति की मात्रा है। छोटे की उम्रानुसार तय करें। प्याज 25 ग्राम का एक।
  2. कद वृद्धि – प्रतिदिन प्याज और गुड उम्र के अनुसार प्रातः सायं खिलायें। किशोर मात्रा – 20 ग्राम प्याज+ 25 ग्राम गुड़ है। यह 5 से 15 तक का नुस्खा है।
  3. बल वृद्धि – रातभर दूध में छुहारा रखें। मसलकर गुठली निकालकर, उसे उबालकर पिलाएं। मात्रा – 6 ग्राम से 30 ग्राम तक है।दो महीने से कम उम्र के बच्चों को यह न पीलाएं।
  4. तुतलाना – लघु ब्राह्मी का रस, ब्राह्मी का रस पीलायें। यह बहुत कड़वा होता है, मगर जीभ की कोमलता और मस्तिष्क की कोशिकाओं की कोमलता , बनाये रखता है।

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