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प्रकट कौन होता है?

 

प्रत्येक मृत व्यक्ति बुलाने पर नहीं आता । जिस आत्मा का मैंने जिक्र किया है वह ब्रह्माण्ड की आयु तक जीवित रहता है। उसके चरों ओर उसी जैसे सर्किट का जो खोल होता है वह नष्ट हो जाता है। परन्तु वह कण अपने पूर्व के ट्यूनिंग में वातावरण में होता है। और अपने चार्ज के अनुरूप नया सर्किट ढूढता है। उसका तुरंत जन्म भी हो जाता है और देर भी लग सकती है। जिसका जन्म हो गया है वह किसी भी माध्यम पर नहीं आता। जिसका नहीं हुआ उसमें भी सभी नहीं आ सकते। जिसका मोह जहाँ बंधा होता है वह उसी और आकृष्ट होता है। यह एक विशाल तकनीकी विषय है और पूरा विवरण बताने में बहुत समय लगेगा । हम कोशिश करेंगे कि इस पर प्रकाश डाल सके। वैसे हमारे धर्मालय की वेबसाइट के प्रभाग ‘ज्ञान क्षेत्र’ में इसपर बहुत कुछ कहा गया है। पुनर्जन्म के सारे नियम इसी आधार पर आधारित है। अब प्रश्न उठता है कि राम, कृष्ण जैसे अवतार पुरुष और सिद्ध आत्मा क्या अब भी किसी लोक में विद्यमान है? या वे मुक्त हो गये? मुक्त हो गये , तो फिर प्रकट कौन होता है? जो एक दुर्लभ सिद्धि है परन्तु होती है। यह साधारण ज्ञान का विषय है कि जिनके बारे में यह कहा जाता हो कि नाम जपने से ही मुक्ति मिल जाती है , वे तो मुक्त ही हुए होंगे। फिर वह कौन है जो प्रकट होता है? इसके लिए आपको आध्यात्मिक क्षेत्र के विज्ञान को जानना होगा! जिसे तन्त्र कहा जाता है – तन्त्र का अर्थ कोई जादू टोना नहीं है , इसका अर्थ सिस्टम है और यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सिस्टम से सम्बन्धित विज्ञान है।

आध्यात्म के दो रूप है एक सामान्य लोगों के लिए और दूसरा इसका वैज्ञानिक रूप। जिनपर तमाम मन्दिर, देवी-पीठ, पूजा के चक्र, यज्ञ की वेदियाँ, और अनंत प्रकार के तत्व है। तन्त्र का एक सूत्र कहता है कि ब्रह्माण्ड में जो ऊर्जा का प्रवाह है वही तमाम समीकरण उत्पन्न कर रहा है। इस ऊर्जा से हम अपनी मनचाही शक्ति प्राप्त कर सकते है। इसका साधन भाव होता है। हम जिस भाव को मानसिक केन्द्रीयकरण से अभ्यासित करेंगे सिद्धि होने के बाद वही हमारे सामने प्रकट हो जाएगा।जब हम राम एवं कृष्ण जैसे व्यक्तियों के भाव में डूबकर मन्त्र जप ,या साधना करते है, तो वातावरण में उस भाव की ऊर्जा केन्द्रियभूत होने लगती है। चूँकि वह पॉजिटिव होती है इसलिए शरीर में समाहित होने लगती है। अत्यधिक एकाग्रता के बाद वह प्रकट हो जाती है। समस्त प्रकार की सिद्धि साधनाओ का रहस्य यही है। जब हम तन्त्र-ग्रन्थों को पढेंगे, और प्राचीन आचार्यों के द्वारा बताई गयी साधना विधियों को देखेंगे, तो हमे स्पष्ट होगा की एक ही देवता के सैकड़ों रूपों की आराधना की जाती है। राम और कृष्ण के भी अनेक रूपों की साधना की जाती है। जो साधक जिस रूप का ध्यान करता है वही रूप प्रकट होता है। और यह बात पूर्णतः बकवास है कि कोइ व्यक्ति किसी सिद्ध पुरुष को या अवतार को बुलाकर किसी दुसरे को प्रत्यक्ष करवा सकता है! यह नितांत व्यक्तिगत अनुभूति है। जो ऐसा करता है वह या तो पाखंडी है या सम्मोहन विद्या का जानकार

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