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परमात्मा से हम क्या प्राप्त कर सकते हैं ?

परमात्मा से आप क्या प्राप्त कर रहे हैं? सिर के चाँद से हो कर वह परमात्मा ही शरीर में अमृत पम्प करता है, जिससे सभी का जीवन है और साँसे चलती है । उसकी यह व्यवस्था परमाणु से लेकर ब्रह्माण्ड तक में व्याप्त है। बच्चों के सिर में , जब वे जन्म लेते हैं यह पम्पिंग साफ दिखाई देती है। इसी के कारण शरीर नहीं सड़ता और इसी की कमी से झुर्रियां पड़ती अहिं और आदमी बुढा हो जाता हैं।जब इसकी सप्लाई बंद हो जाती है , तो मृत्यु हो जाती है।

 इसके बाद भी आप जो चाहते है , वह आपको प्राप्त होता है। उसके नियम बने हुए है , जो भी उन नियमों का पालन करता है ,वह उसे प्राप्त होता है। यदि प्राप्त नहीं होता , तो इसका अर्थ है आपने उन नियमों का पालन नहीं किया या अप उसमें कमजोर है। उसकी दुनिया में नियमों का शासन है। खेल के नियम बने हुए है , जिसने भी उसका मन की गहराइयों से पालन किया । उसको वह प्राप्त हुआ, जो वह चाहता है। उसके नियमों की उपेक्षा करके कोई एक ग्लास पानी भी नहीं पी सकता। इस प्रकृति के अनगिनित जीवों एवं ईकाइयों की कामना की पूर्ती उसके इन्ही नियमों से होती है। अब यह दूसरी बात है कि तितली की कामना फूलों का रस होती है और गिद्ध की सड़े हुए मांस की। कामना की पूर्ती दोनों की होती है।

इसलिए यह प्रश्न ही निरर्थक हैं कि हम परमात्मा से हम क्या पारपत कर सकते हैं? हम जो भी प्राप्त करते हैं , जो भी हमे प्राप्त है, वह उसी देन है।

4 thoughts on “परमात्मा से हम क्या प्राप्त कर सकते हैं ?

  1. वो नियम कोनसे है,जेसके पालन से हम परमात्मा द्वारा प्रदत्त अमृत सदा ही प्राप्त कर सके,प्रेमकुमार जी,बताने का कष्ट करे,

    1. सर के चन्द और तलवे को साफ और डंडा रखो. परमात्मा का अमृत तो सबको प्राप्त होता रहता है .मुर्ख उसके बारे में नहीं जनता और बताने वालों का मजाक उडाता है .धर्मालय का गायत्री और राम के मन्त्र का रहस्य पढो . मगर कुछ लोग पढ़ते नहीं, पढ़ते हैं तो समझते नहीं .वे पहले से सब जानते हैं .सरे आचार्यों ने इससे दूर रहने की सलाह दी है .

  2. बाबा ने लूट मचा रखी है। astrospeak site pe baba ki 1 year analysis ki fees ₹80000 or one question ki ₹6000 aam aadmi bechara aise hi rota rahega usse kabhi bhartiye tantra mantra ka fayda nhi milne wala प्रेम कुमार जी तो पैसो वालो के रक्षक और मार्गदर्शक है।

    1. बिलकुल सही है .मुफ्त खोरों का कोई लंगर हम नहीं चलाते , नहीं चलने पर तो हाल यह है कि ऐसे लोग हजारों की संख्या में टूट पड़े हैं .बिना यह सोचे कि गुरु केवल एक एक शब्द बताने लगे तो उसे खाना खाने का भी वक्त नहीं मिलेगा .मैंने ऐसा कोई व्रत नहीं ले रखा है कि लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं और सिद्धियों में सहायता करूं. न ही धर्मालय इस प्रकार की सार्वजनिक सेवा का विज्ञापन कर रहा है. यह ज्ञान प्रसार सेवा है . उससे लाभ उठा सकते हैं तो उठाईये .ज्ञान के क्षेत्र नें पूछे गए प्रश्नों का यथासंभव जबाब भी दिया जाता है. हमारी कोई ऐसी घोषणा नहीं है कि हम सिद्धि भी करवा देंगे और जीवन का फल भी बता देंगे . बार बार यह कहने के बाद भी की यह कोई ट्रस्ट नहीं है .जो किया जा रहा है वह व्यक्तिगत सिमित आय में की गई सेवा है ,लोग केवल आपना लाभकैसे होगा बिना कुछ कर्च किये कैसे मिलेगा इस लालच में अंधे हो रहे हैं .बहुत से लोग विज्ञापन करके मुफ्त में रेवड़ी बाँट रहे हैं उनसे संपर्क क्यों नहीं करते ? .

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