पति-पत्नी: दाम्पत्य एवं सेक्स समस्याएं

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आधुनिक युग में पति-पत्नी के बीच कलह, तनाव, उपेक्षा, अवैध सम्बन्ध की समस्याएं हर जगह व्याप्त है। पति-पत्नी का सम्बन्ध औपचारिक हो गया है। सामान्यतया इसे बेडरूम का सम्बन्ध माना जाता है। इस रिश्तें में जो प्रेम , अपनापन, कर्तव्य, त्याग, ममता, धीरज आदि का भाव था, वह समाप्त हो गया है। अधिकांश रिश्तों को ढो रहे है।

पर इसके कारण क्या है?

सनातन सूत्र के अनुसार हर एक बात के पीछे कारण होता है। इसके भी कारण मौजूद होते है –

  1. मानसिक समीकरण का न मिलना।
  2. शारीरिक नस्लों का न मिलना। मनुष्य योनि में सभी योनि जीव पाए जाते है। योनि-योनि भेद से लिंग – योनि – शरीर, आदि के भेद है। इसी वर्गीकरण पर यौनांग का छोटा-बड़ा होना भी है। शशक प्रकृति और अश्व प्रकृति में पूरे शरीर मन आदि का अन्तर होता है। ऐसे विपरीत नस्ल के स्त्री – पुरुष मिल गये , तो रतिक्रीड़ा सही ढंग से नहीं हो सकती है और दोनो मन से एक –दूसरे से बेजार हो जाते है।
  3. विवाह आजकल २७-३४ तक में होता है। १६ वर्ष की उम्र से कामवेश उमड़ने लगता है । इस उम्र तक कोई भी सयंम नहीं रख सकता। तब पार्टनर न मिलने पर कृत्रिम साधनों से सेक्स करना, स्त्रियों द्वारा विवाह पूर्व किये गये सेक्स गर्भपात आदि कराना, गर्भ निरोधक कैप्सूल का अधिक व्यवहार। अधिकाँश सेक्स समस्याएं इनसे उत्पन्न हो रही है।
  4. तीसरी पार्टी के कारण। अक्सर पुरुष पराई औरत के चक्कर में पड़ता है । स्त्रियों के पर-पुरुष सम्बन्ध बनते है। और ये आपसी कलह दुःख के कारण होते है।
  5. किया-कराया से भी ये समस्याएं उत्पन्न होती है। योनि बंधन, लिंग बंधन, कोस बंधन आदि क्रियाएं पति-पत्नी के बीच सेक्स समस्याएं पैदा करता है।

निदान के लिए ज्योतिष का सहारा लीजिये

शादी विवाह में गुण मिलाये जाते है; पर यह पर्याप्त नहीं है। शादी विवाह में ग्रह योगों को पूरा मिलाना चाहिए। इससे समस्या के कारण ज्ञात हो जाते है और निदान सरल हो जाता है।

शत्रु ग्रह प्रधान स्त्री-पुरुष का विवाह होता है, तो ये जन्म विरोधी होते है। मित्र ग्रह हुए तो ये पट जाते है और कहीं शुक्र, बुध, मंगल, प्रभावित हुआ , तो यौन समस्याएं उत्पन्न होती है या तीसरा आ जाता है।

सूर्य शुक्रा के प्रभाव में हो तो दाम्पत्य में गर्मी, कलह, क्रोध, आदि होते है। शुक्रा बृहस्पति हुआ, तो औरत एबम दाम्पत्य सुख, धुल की तरह उड़ जाता है और दुखदायी हो जता है। शुक्र-बुध का संयोग हो, तो दाम्पत्य में भौतिक एवं बौद्धिक सुखों की प्राप्ति होती है। शुक्रा चन्द्रमा के प्रभाव में हुआ तो कीचड़ युक्त पानी जैसा जीवन होता है। स्त्री, भावनाओं को एवं भावनाएं स्त्री को दुःख करती है। शुक्रा मंगल के साथ हुआ और सूर्या का संयोग न मिले, तो बहुत हानि करता है। पत्नी, गृहस्थी, दाम्पत्य गर्म मिट्टी की तरह यन्त्रणा देते है। शनि का योग हुआ तो शुक्र सौन्दर्य , मर्यादा , रूढ़ संस्कारों से लगाव होता है। कुटिलता होती है। मंगल-शुक्रा में पत्नी जलती है।

शादी से पूर्व ग्रह योग पूरा मिला लेना चाहिए। ऐसी शादी से क्या लाभ, जो दुखदायी हो जाए? यदि शादी हो गयी , तो फ़ौरन निदान करना चाहिए। तीन साल बाद यह क्रोनिक हो जाता है। सेक्स समस्या हो, तो उसे तुरंत दूर करना चाहिए। अधिकतर सेक्स की समस्याएं क्योर हो जाती है।

सबसे कठिन स्थिति किये-कराये और बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप होता है। ये हाजारों तरह होते है और पहचान कर निदान करना होता है। इसमें न्यूनतम १५ दिन या फिर २१ दिन लगते है। शेष सभी उपाय सामयिक होते है। इनसे दो-चार दिन की राहत मिल जाती है, पर जड़ नष्ट नहीं होती।

आधुनिक समाजशास्त्र कहता है कि पहले एक-दूसरे को समझ लेना चहिये; परन्तु असफल दाम्पत्य प्रेम विवाह में भी कम नहीं होते।

वस्तुतः विवाह एक सामाजिक कर्तव्य है और कर्तव्य पालन की राह आसान नहीं होती। इसमें त्याग, कष्ट, पीड़ा आदि भी होती है। आधुनिक युग में यह भाव नष्ट हो गया है। शादी अब दो ‘मैं’ की संतुष्टि और समझौते पर आधारित हो गयी है। इस भाव के रहते संतुष्टि की कल्पना बेमानी है। कर्तव्य का बोझ बंधन और निरर्थक बोझ लगने लगता है। कलह और अलगाव के कारण यह है। सामाजिक मूल्यों का नाश हो गया है।

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One Comment on “पति-पत्नी: दाम्पत्य एवं सेक्स समस्याएं”

  1. sir..namastey..mujhe aapki help chahiye thi..mere kaam nahi ban rahe..meri financial problems dur nahi ho rahi..mujhe lag raha hai koi black magic kiya hai..plzz..help me..sir

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