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पंचतत्व का रहस्य

यही नन्हा सा परमाणु जो एक अनुमानित गणना के अनुसार प्रकाश से 108 (81 *3 ) गुणा सूक्ष्म होता है; वह लगातार ‘0’ को खिंच – खीच कर अपना विस्तार करता हुआ , धुरी पर दो और ऊर्जा बिन्दुओं को उत्पादित करने लगता है। अब इसमें पाँच बिंदु हो जाते है और इनसे पाँच प्रकार की ऊर्जा तरंगों का उत्पादन होने लगता है।

इनमें से एक पर्दार्थ के ठोस होने के गुण को उत्पन्न करती है। एक तरलता के गुण को उत्पन्न करती है , एक वायवीय गुण को, एक इसमें गर्मी (एनर्जी) उत्पन्न करती है, एक आकार निर्धारण।

मूलतत्व के बाद की सबसे सूक्ष्म उर्जा होने के कारण इसे पृथ्वीतत्त्व, जलतत्व, अग्नितत्व एवं आकाशतत्व कहा गया है। इस ब्रह्माण्ड के हर पदार्थ में यही पाँच ऊर्जा मुख्या होती है। इसी से सभी ऊर्जा , गुण, क्रिया, जीवन आदि का अस्तित्व उत्पन्न होता है।

इन पाँच बिन्दुओं में पाँच देवता की उपस्थिति मानी गयी है (वह शक्ति क्रिया करनेवाला , जिससे ये तरंगे (शक्तियाँ ) उत्पन्न होती है। इसी संरचना का पंचमुखी महादेव कहा जाता है।

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