1. रोगी को पीठ के बल लिटा दें। वह कपड़ा बिना दिया हुआ और एक ही पहने हुए हो। आक का के पीला पत्ता लें और उसे घी में चुपड़कर रोगी के सिर से पांव तक 21 बार क्रम से शरीर से आधे इंच ऊपर नीचे की ओर लाकर फिर सिर से शुरू करें। इस प्रकार 21 बार करके पत्ते को दहकते हुए आग में डाल दें। (परीक्षित है )
  2. उपर्युक्त प्रकार से रोगी को लिटाकर पूर्ण एकाग्र होकर चाँद से तलबों तक हाथ फेरें। इस प्रकार 21 बार करके अपने हाथ को सेंधा नमक मिले गरम पानी में दो मिनट तक डुबायें फिर मलकर साफ़ करें और साफ़ कपड़े से पोंछ लें। (परीक्षित है)
  3. तुलसी के पांच दानें लेकर उसमें पांच काली मिर्च मिलाये और इन्हें हाथ साफ़ करके मुट्ठी में बंद करके 21 बार ‘ॐ’ का जाप करें। इस पत्तों और काली मिर्च को रोगी को खिला दें और हाथ दो मिनट तक तलवों पर फेरे। (परीक्षित है).
  4. 9 डंडी वाली लाल मिर्च लेकर डंडी को नीचे रखते हुए 21 बार रोगी के शरीर पर चाँद से तलवों तक स्पर्श कराते लाये, फिर सिर के चाँद से प्रारम्भ करें। ऐसा 21 बार करें और मिर्च को पहले से सुलगाई कंडे की दहकती हुई अग्नि में डाल दें (परीक्षित है )
  5. दूध में पांच चम्मच घी मिलाकर उसमें आक की जड़ का एक चम्मच राख डालें और इस दूध से सिर से लेकर तलवों तक मिलें , फिर गर्म पानी से स्नान कर लें। स्मरण रखें। नजर उतारने के लिए सिर से प्रारंभ करके तलवों तक क्रिया की जाती है। उल्टा न करें (परीक्षित है )

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