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ध्यान क्या है ?

ध्यान क्या है? (What is Meditation)

किसी भी विषय(Subject)  पर अपनी मानसिक शक्ति(Memory Power) को केन्द्रित करना ‘ध्यान’ है। मानसिक शक्ति की तरंगों का उत्सर्जन नाक की जड़ के ऊपर स्थित ऊर्जा बिंदु से होता है । योग में इसे आज्ञाचक्र कहा जाता है, तन्त्र में ‘रूद्र चक्र’। इसे गणेश चक्र भी कहा गया है।

यहाँ से चाँदी के रंग की अति सूक्ष्म तंरगों का उत्सर्जन होता है, जो आगे पलती होती चली जाती है। गणेश जी की सूंढ़ के रूप में इसे ही दर्शाया गया है। यह तरंग फ्री होती है और अपनी जड़ से चारों ओर अंदर बाहर एक सेकंड में हजारों बार नाचती रहती है । यह जहाँ भी स्थित होकर केन्द्रित होती है, वहां क्रिया शुरू हो जाती है। इसकी क्रिया , कंप्यूटर माउस के तीर की तरह होती है।

किसी भी क्रिया को, चाहे वह शरीर के अंदर हो या बाहर यही प्रारंभ करती है और हमारे शरीर की सारी क्रियाओं का, चाहे वह अनैच्छिक हो या सच्छिक , नियंत्रण भी यही करती है। इसकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है। यदि यह किसी बिंदु पर स्थित होकर वहां लगातार अपनी शक्ति बढ़ाता चला जाये, तो उस बिंदु पर क्रिया होने लगेगी, चाहे वह हमारे शारीरिक पहुच से बाहर हो। अभ्यास से इसे समय से आगे भी ले जाया जा सकता है और पीछे भी। इसके लिए दूरी भी महत्त्वहीन है ।

इन्ही तरंगों को किसी विशेष बिंदु पर एकाग्र करके अभ्यास द्वारा स्थिर करने की क्रिया का नाम ध्यान है।

यह किसी भी वस्तु, विषय पर हो सकता है। यह केवल आध्यात्मिक क्षेत्र से सम्बन्धित नहीं है। जिस नियम से निशाना लगाया जाता है, गाड़ी चलाई जाती है, शेर अपना शिकार करता है; उसी नियम से आध्यात्मिक साधक ध्यान को केन्द्रित करके अपना लक्ष्य हासिल करता है। इस ध्यान के द्वारा ही सभी तरह के पूजा , पथ, इबादत, प्रार्थना, सिद्धि, साधना के फल प्राप्त होते है। किसी भौतिक कार्य में सफलता के लिए भी इसका महत्त्व सर्वाधिक होता है।

इसीलिए सनातन धर्म में हर काम से पहले गणेश जी को प्रसन्न करने का नियम है।

आधुनिक युग का ध्यान (Modern Meditation)

आज हमारा मानव समाज जिस ‘ध्यान’ की महिमा गा रहा है; वह इसका एक अत्यंत छोटा सा सीमित हिस्सा है। अंतर मुखी होना, अपने अंदर झांकना । मगर कैसे?

इस विषय पर भी मॉडर्न युग के गुरुओं ने लोगों को कन्फ्यूज्ड कर रखा है। इनकी विधियाँ, व्याखाएं अलग अलग है और सभी ऊपरी है। यदि हमें वास्तविक ध्यान लगाना है , तो इसके वैज्ञानिक रूप को समझना होगा।

तब हम बिना किसी कठिनाई के सरलता से ध्यान लगा सकेंगे और इसके अभ्यास के बीच आने वाली कठिनाइयों से भी छुटकारा मिल जाएगा।

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