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सनातन धर्म क्रांति है धर्मालय

‘धर्मालय’ पर कोई किताबी ज्ञान नहीं। विश्व के वैज्ञानिक जगत को चौंकाने वाला एक ‘ज्योति पुंज’ है धर्मालय।

हम एक बार फिर अपने सभी श्रद्धालु – मित्रों से विनम्र निवेदन करना चाहते है कि ‘धर्मालय’ पर दिए गये मैटर किसी किताब के नहीं है। सनातन विज्ञान, इसके सूत्रों – नियमों, सिद्धि-साधानाओं के गूढ़ रहस्य, प्राचीन विद्या की ठोस तथ्यों पर आधारित व्याख्याएं , धार्मिक चित्रों और प्रतीकों के वैज्ञानिक रहस्यों की व्याख्याएं – विश्व की किसी भी भाषा की किसी भी पुस्तक में किसी भी धर्म सम्प्रदाय में इस रूप में और इस व्याखायाओं में कहीं उपलब्ध नहीं है। आध्यात्मिक क्षेत्र में कुछ कथाएँ इसका समर्थन करती हैं, पर उनकी भी व्याख्या अपनी ही साधना से प्राप्त ज्ञान पर हो सकी है अन्यथा फैंटम जगत के फैंटम में घुमते रहिये , कुछ भी ज्ञात नहीं होगा।

विश्व में सभी जानते है कि तन्त्र रहस्य , मन्त्र रहस्य , सिद्धि –साधनाओं का रहस्य , गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य सार्वजानिक धर्म के विषय नहीं रहे हैं। इनका किसी पुस्तक में होना संभव ही नहीं है। वहां आध्यात्मिक कथाएँ हैं, पूजा-पाठ की विधियां हैं, परमात्मा से लेकर सभी देवी-देवताओं के मूर्त रूप की व्याख्या है। उनमें कोई रहस्य नहीं है। रहस्य या तो गुरु द्वारा प्राप्त होता है ; जो गुरु गम्य कहा जाता है । या फिर स्वयं अपनी साधना से। यह भी दो तरह का होता है। पहली किसी साधना कि गुप्त तकनीकियों की गोपनीयता ; दूसरी ‘तत्व विज्ञान’ के सम्पूर्ण विज्ञान का ज्ञान। इस दूसरे प्रकार के ज्ञान में गुरु और जानकारियाँ केवल माधयम है। मार्ग दिखने वाले। यह रास्ता दुर्लभ साधना का है और धर्म ग्रन्थों में कहा गया है कि लाखों में से कोई एक इसे जानने के लिए जिज्ञासु होता है, उन लाखों में कोई एक जानने के लिए प्रयत्नशील होता है और उन लाखों प्रयत्नशीलों में से कोई एक इसे जान पाता है। यह सदा अपने ही प्रयत्न से ज्ञात होता है; गुरु से नहीं। इस स्वयं सिद्ध गुरु को ज्ञान देने की क्षमता किसी में नहीं होती। वह सदा शिव ही उसका अभिषेक करता है। इस बात से कोई अन्तर नहीं पड़ता कि यह ज्ञान उसने कैसे प्राप्त किया?

ऐसा नहीं है कि पहले यह ज्ञान नहीं था , ऐसा भी नहीं है कि आगे न होगा। हर योग में इसे तात्कालीन समाज को तात्कालीन रूप में बताने की कोशिश की गयी है। पर यह सम्पूर्ण स्वरुप में कहीं वयक्त नहीं किया गया है । यह गोपनीय ‘ब्रह्म विद्या’ है। ब्रह्मास्त्र जैसे अस्त्र इसी विज्ञान के सूत्र पर बनते थे। पर इन यंत्रों को भी गुप्त रखा जाता था। ब्रह्मास्त्र चलाने की स्थिति तो कभी आई ही नहीं। और इस गोपनीयता ने इस सम्पूर्ण विज्ञान को आज हस्याप्रद बना दिया है।

मैं सीना ठोककर कहता हूँ कि मैं इसका ज्ञाता हूँ और कोई लाख वितंडा कायम करे मैं इसे विश्व मानवता में वैज्ञानिक स्वरुप में स्थापित करके रहूँगा। कृपया इसमें टांग अड़ाई करने और इस विज्ञान की व्याखायाओं की चोरी करने का प्रयत्न मत कीजिये। कुछ भी सिद्ध नहीं कर पाइयेगा कि जो अपने तथ्य दिए हैं उसकी सम्पूर्ण व्याख्या क्या है। यह इतना सरल नहीं है। वैज्ञानिक जगत को आपके ग्रंथों, श्लोकों , आचार्यों को प्रमाण नहीं मानता – उसे ठोस तथ्यात्मक प्रमाण की आवश्यकता होती है। वह मैं ही उन्हें दे सकता हूँ ; विश्व में कोई अन्य नहीं। चाहे वह वैज्ञानिक हो या धार्मिक। क्योंकि इसे जानने के लिए साधनाएं मैंनेकी है; आपने नहीं।

हो सकता है कि अप इसे ‘अहंकार’ समझे; पर मैं जानता हूँ कि प्रत्येक स्त्री/पुरुष में उस परमात्मा का वास होता है। उसकी सीमाओं का निर्धारण नहीं किया जा सकता। आप इस कारण मेरा मजाक नहीं उड़ा सकते कि मैं एक साधारण आदमी हूँ और मैं वैज्ञानिक नहीं हूँ। बहुत से साधारण व्यक्तियों ने विश्व मानवता को प्राकशित किया है। सत्य स्वयं अपनी प्रतिष्ठा करवा लेता है। यह कुछ विचित्र बात है कि जब-जब इस विज्ञान का लोप होता है । कोई न कोई इसको ढूँढने और स्थापित करने आ जाता है । वास्तविक ‘सनातन धर्म’ यही है और यह एक ‘पुच्छल तारे’ का विज्ञान है। एक ऐसे पुच्छल तारे का , जो एक विचित्र उत्पत्ति है। इसके रहस्य को जानने वाला विश्व के हर रहस्य को जान सकता है । मैं इसी की स्थापना में लगा हूँ और यदि अपने राष्ट्र और गौरव की कोई किरण है , तो मेरी मदद कीजिये।इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाइये;ताकि जन मानस धार्मिक आध्यात्मिक में वास्तविक लाभ उठा सके।

One thought on “सनातन धर्म क्रांति है धर्मालय

  1. Mai aapse milna chahta hu…….kahi bhi aap ne apna photo aur place nahi diya hai. Aapka place mob. no aur photo etc…dijiyea. jisse mai sawaym aur logo ko jor saku…..

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