आप यहाँ हैं
धर्मालय > डिस्कवरी ऑफ़ भैरवी चक्र > धर्मालय को समझें

धर्मालय को समझें

धर्मालय साधारण वेबसाइट नहीं है। यह सारे आधुनिक विज्ञान एवं वैज्ञानिक को आमंत्रित करते हुए और बहुत से स्थानों पर उनका खण्डन करती हुए उत्पन्न हुई है। मैं मानवता को पूरी सर्च लाइट देना चाहता हूँ, ताकि वह स्वयं अपनी राह, अपनी समझ विकसित कर सके। किसी बाबा, किसी गुरु, किसी शास्त्र, किसी पंथ की उसे ज़रूरत ही नहीं रहे।

हमारी सभी प्राचीन विद्यायें – ज्योतिष, सामुद्रिक, तन्त्र, मन्त्र, योग, हवन, साधना, सिद्धियाँ, यज्ञ, आहुति आदि वैज्ञानिक सूत्रों पर आधारित है। आज का बौद्धिक जगत इसके बारें नहीं जानता, वह जानने का प्रयत्न भी नहीं करता, बस बिना जाने उपहास उड़ाता है। ऐसे लोगों को किस प्रकार समझायेंगे कि सत्य क्या है? इनके आका अमेरिका-फ्रांस में रहते है, इनके गुरु भी वहीं के है। ये मशीनी दुनिया की चंकाचौंध को विज्ञान समझ रहे है। पर प्राचीन आचार्य किसी भी वृहत या चमत्कारी यंत्र को बनाने के विरोधी थे। इनका कहना था – यंत्रों में अपना विवेक नहीं होता। ये असुर के हाथ लगे, तो सम्पूर्ण मानवता विनष्ट हो जाएगी। आप उसी कगार पर खड़े है। क्या अब भी समझ नहीं आता कि कृष्ण ने ब्रह्मास्त्र चलाने की जिद पर अड़े, असुर राज का वध क्यों कर दिया था?

हमारे ग्रुप के किसी ने लिखा है कि अमेरिका में ‘श्री यंत्र’ को समझने की कोशिश की जा रही है।…. वे हजार वर्ष में नहीं समझ सकते। श्री चक्र या यंत्र एक वैज्ञानिक सूत्र का आउटर स्केच है।उसकी आंतरिक संरचना का ज्ञान नहीं। वह उपलब्ध ही नहीं है। वह केवल मैं जानता हूँ और उनका प्रमाण भी मैं ही दे सकता हूँ। वह इतनी जटिल है कि उसका मैं स्केच बनाना चाहूँ, तो नहीं बना सकता। कंप्यूटर पर 45 दिन वर्क किया जाये तो, तो यह धाराएं स्पष्ट होंगी।

 इस ज्ञान का उपयोग क्या है?

यह ‘नासा’ से क्यों नहीं पूछते? क्यों जानना चाहता है वह इस ब्रह्माण्ड का सत्य? यह विज्ञान उसी सत्य का A to Z विज्ञान है। इसका उपयोग करके इस ब्रह्माण्ड में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है, कुछ भी जाना जा सकता है। उड़न तश्तरी हो या ब्लैकहोल – सभी इसी विज्ञान से निर्मित होते है या बनते है। आपका समस्त विज्ञान इस विज्ञान के नियमों से बंधा है। पृथ्वी ही नहीं, ब्रह्माण्ड की हर इकाई इन्ही नियमों से बंधी है। स्वयं ब्रह्माण्ड भी इन्ही नियमों से शासित है। ये नियम ब्रह्माण्ड के नहीं है। इसका क्या उपयोग हो सकता है, यह तो विश्व के वैज्ञानिक ही समझ सकते है; पर सत्य यह है कि इस अजूबे ब्रह्माण्ड के प्रत्येक अजूबे की उत्पत्ति इसी विज्ञान के नियमों से होती है; इसलिए सबकुछ प्राप्त किया जा सकता है। हर कल्पना साकार हो सकता है

One thought on “धर्मालय को समझें

  1. धन्यवाद् धर्मालय।
    आपका प्रयास सराहनीय है,आपके आर्टिकल रंग लाएंगे।
    आपका यह लेख़ जन-मानस को सोचने के लिए विवश कर देगा।

    Leave a Reply

    Top