धर्मालय की साधनाएं और देवियाँ और उनके यंत्र

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

यहाँ वर्णित सभी देवियाँ शास्त्रीय है। भिन्न-भिन्न पांच प्रकार की साधना मार्ग से इनकी सिद्धि की जाती है – (1) महाकाल मार्ग  (2) अघोर मार्ग (3) देवी मार्ग

(4) भैरवी मार्ग (5) वैदिक मार्ग

इन सभी का ध्यानरूप का प्राचीनतम रूप अत्यन्त भयानक है । आजकल इन रूप ध्यानों की साधना कोई नहीं करता। महाकाल और अघोर मार्ग में इनकी साधना श्मशान में की जाती है। पर मुझसे मिलनेवाले और इसके प्रैक्टिकल को बताने वाले अनेक सिद्ध साधकों का कथन था कि ये सभी पाशबद्ध (भौतिक नियम बनाकर उसमें बंधे हुए) साधक है। श्मशान , चिता, शव, शवभक्षण का आध्यात्मिक अर्थ कुछ और ही है। प्रारम्भ में इन्हें गुरु द्वारा शमशान में ही भेजा जाता है, ताकि वहाँ के भाव एवं ऊर्जा से यह भौतिक संसार से विरक्त हो सकें। किसी भी शक्ति की साधना तभी सम्भव है, जब मानसिक रूप से समस्त अनुभूतियों से शून्य होकर उस भाव रूप की आराधना ध्यान और जप किया जाए। इसके बिना सिद्धियाँ संभव नहीं है।

तन्त्र के सूत्रों और नियमों का गुप्त स्वरुप ज्ञान में हो , तो इस जगत में किसी भी प्रकार की शक्ति को प्राप्त किया जा सकता है और दिव्य एवं राक्षसी दोनों प्रकार की किसी भी शक्ति को सिद्ध किया जा सकता है । उन्होंने मुझसे बहुत से स्थान पर पुछा कि आप म्किस शक्ति की साधना में रूचि रखते हैं। मैं हर जगह मुस्कुराता रहा। उनसे क्या बताता? वे पर्टिकुलर साधानाओं के एक्सपर्ट थे और खुद भी कहीं तक पाशबद्ध थे। यह वैसा ही था कि कोई मोटर साइकिल बनाने का एक्सपर्ट हो , तो कोई कार का। उसमें भी मॉडल विशेषज्ञ थे। कोई ऐसा नहीं था , जो उसके आंतरिक विज्ञान को बता सकता हो। दो चार विद्वान साधकों से चर्चा की , तो वे आश्चर्य से मुझे देखने लगे – “यह शिव विज्ञान है। केवल उसी की कृपा से प्राप्त होता है। मनुष्य की शक्ति नहीं कि वह अपने प्रयत्न से इसे प्राप्त कर सकें। … पर यह प्राप्त हो गया , तोसमस्त रहस्य और शक्तियां हस्तगत होती है। गुरु कि आवश्यकता नहीं होती।”

इस सत्य को मैं भी जनाता था। मेरे गुरु ने जो बताया था, वह अ आ इ ई और मात्राओं के ज्ञान की तरह था। आगे मुझे किसी गुरु कि आवश्यकता नहीं हुई। कुछ लोगों ने ध्यानावस्था में अभिषेक किया और वे सात सन्यासी ही मेरे गुरु बन गये। अभिषेक के बाद वे दिखाई भी नहीं पड़े। पर मैं जिधर मानसिक शक्ति लगाता था, उसके समस्त रहस्यों का प्रकाशन होने लगता था, जैसे कैमरा स्थूल से सूक्ष्म तक उतरता जा रहा हो। इससे जो बातें सामने आ रही थी, वे चौंकाने वाली थी। वर्तमान युग की आने जड़ आस्थाओं के विपरीत और प्रकृति में उसके प्रमाण भी मिल रहे थे। फिर उन सन्यासियों में एक-एक कर सामने आने लगे और जाने कितनी सिद्धि-साधनाओं के रहस्यों को व्यक्त करने लगे।

यहाँ वर्णित देवियाँ वे ही हैं। इनमें से अनेक जानी-पहचानी है, पर अनेक का मैंने कभी नाम भी नहीं सुना था।

महाकाल मार्ग की देवियाँ

  1. कामकला काली   2. महिषमदिनी   3.शूलन्या   4.अथोराया   5. कुकुट्या   6. काल संकर्षिणी   7. छिन्न मस्ता     8. तारा   9.अघोरा    10.त्रिकंटा   11.चन्द्र घंटा     12. चामुण्डा     13.चण्डेश्वरी    14.नाकुली     15. नार सिद्धि     16.भद्रकाली    17.दक्षिणी काली     18.गुह्यकाली   19.मातगी
  2. भुवनेश्वरी   21. अश्वरुढ़ा   22. बागेश्वरी   23. धनदा   24. त्वरिता   25. भैरवी   26.ऐश्वर्या   27. कामेश्वरी   28. भोगवती   29. भोग मालीनी   30.काममाला   31. लावण्या   32. सर्व कामेश्वरी   33. माहेश्वरी   34. फेत्कारिणी   35. हरसिद्धा   36. नील पताका   37. कुब्जिका   38. बाराही 39. शबरी   40. काल लक्ष्मी   41. बगुलामुखी   42, शुक्रावती आदि ।

 

अति भयानक तामसी शक्तियां

 

  1. डाकिनी     2. पिशाचिनी 3.योगिनी 4.यक्षिणी   5.भूतनी   6.सुंदरी  7.रति प्रिया   8. जामुनी   9.कालिनी   10. काकिणी   11. हाकिनी   12. चान्ड्लिनी   13. रागिनी   14. मर्जारिनी   15. रत्ना वती     16. स्वर्णा वती     17, रजत मालिनी   18. माण्क्या आदि

कंटिन्यू … भैरवी मार्ग की देवियाँ

Email- info@dharmalay.com

 

धर्मालय के प्रसार में सहयोग करें

4 Comments on “धर्मालय की साधनाएं और देवियाँ और उनके यंत्र”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *