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दुगाे जी की श्मशान साधना


तिथि –सामान्य साधना के अनुसार .

वस्त्र आदि तदानुसार .

हवन सामग्री कबूतर या परवा का माँस,  गूलर की लकड़ी.

चक्र –गोपनीय .इसे जानने के लिए पात्रता आावश्यक है.यह सामान्य साधना नहीं है .पात्रता केसाथ यह चक्र व्यक्ति विशेष के अनुसार गणित किया जाता है और विशेष निदेश भी होते हैं, इसलिए यह सशुल्क है .शुल्क देने पर भी अपात्र को वजिेत .शुल्क ५१००रू.

पिंडी –यह चक्र के मध्य बनाया जाता है .चौड़ाई १८ अंगुल, ऊँचाई २७ अंगुल .इसे श्मसान की मिट्टी, वहीं का जल, बकरी के बच्चे की मेंगनी, युवा महिला के बाल, रक्तचन्दन से बना कर गाय के गोबर से लीप कर, सिन्दूर से चक्र बना कर पहले पूजा की जाती है.

समय आदि दुगाे जी की सामान्य साधना के अनुरूप ही होता है .

पूजा — पिंडी पर बने चक्र को अपनी कनिष्ठिका के रक्त बूँदों से सिक्त करके सिद्ध किये सिन्दूर से अभिषेक करके, स्वयं भी तिलक लगायें.

न्यास –शास्त्रीय न्यास जटिल होता है ़ दुगाे मंत्र से ही सभी अंगों का जल से न्यास करें. उसी से दशों दिशा की सुरक्छा करे ं.

पूजा में मानसिक ध्यान पर अधिक ध्यान दें.मंत्र से सामान्य पूजा करें . माँस, खीर,  पुआ, देवी को प्रिय है .इसका नैवेद्य अपित करें .

जप –तत्पश्चात् आँखें बन्द करके पहले२५०००मंत्र आग्याचक्र पर देवी का ध्यान लगा कर, ५०००० मंत्र हृदय में देवी का ध्यान लगा कर, ५००००स्वयं सम्पूणे शरीर में देवी को व्याप्त किये स्वयं ही देवी रूप कल्पित करके करें

हवन पूवेवत,  १२५० हवन पाथिेव करके शेष मानसिक करें

सावधान आजकल श्मसान में साधना संदिग्ध समझी जा सकती है .मिट्टी जल आदि ला कर किसी एकान्त कमरे में बना ले .

इस विधि में बहुत उपद्रव होता है .श्मसान की शक्तियाँ डरातीं हैं .कमजोर मानसिकता या सन्दिग्ध मावसिकता वाले इस सम्बन्ध में सोचें भी नहीं .

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