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तंत्र मन्त्र हवन से काला जादू

तंत्र मंत्र से काला जादू (Black Magic)

विशेष निर्देश -किसी देवता की सिद्धि आवश्यक है. सिद्धि नहीं है, तो हवन की सख्या १०००० होती है. सिद्धि होने पर १०००. मानसिक एकाग्रता आवश्यक है.

ध्यान में इष्ट देवता को हवनकुंड से प्रगट हो कर भाव के अनुसार वांछित काम  करते हुए अनुभूत किया जाता है.जैसे रौद्र ,कोमल ,प्रेममय आदि. नियमों के अनुसार हवनकुंड बनाना एक कठिन कार्य है,इसलिए बाजार से पीतल का हवनकुंड खरीद कर उसे काची मिटटी की धरती पर क्षैतिज गाड़ना चाहिए.हवनकुंड मेखलाओं एवं तली में पान रूपा योनी एवं जीभ से पूर्ण होना चाहिए.

पूर्व मुखी में यश और विजय,पश्छिम मुखी शांति और वैराग्य,उत्तर मुखी धन वशीकरण सम्मोहन आकर्षण प्रेम,दक्षिण में क्रूर कर्म किये जाते हैं ,

प्लाट कमरे में स्थान की भी यही स्थिति होती है,कुर्म चक्र का ज्ञान हो तो और भी अच्छा है.

हर कार्य के लिए मन्त्र अलग होते हैं.समय भी अलग होता है.(देखें पुत्लितंत्र ) हवन सामग्री भी अलग होती है.

इसी प्रक्रिया से इन कार्यों के लिए यंत्र भी सिद्ध किये जाते हैं.

कोई भी कर्म बिना माध्यम लिए सिद्ध नहीं होता.माध्यम अधो वस्त्र,अधो केश,राज,वीर्य,आदि होता है.तस्वीर का माध्यम कमजोर होता है ,हवन संख्या दो ढाई गुणा करना होता है.वाममार्ग में जल्दी सफलता मिलती है.

इस प्रकार की क्रियाओं से पीड़ित को स्नान,अभिषेक ,मन्त्र अभिषेक से ही ठीक किया जा सकता है और कोई समस्त रहस्यों को जाननेवाला ही कर सकता है,इसलिए कृपया उपाय मत पूछने लगिए,उपाय टोटका होते हैं और वे केवल छोटी समस्याओं के प्राथमिक उपचार जैसे होते हैं.वे किसी समस्या के निदान नहीं हैं.

इस शीर्षक की नेक्स्ट पोस्टिंग में ऐसे हवन बताये जायेंगे,जो सुख सुविधा में कारगर हों .वशीकरण आदि के भी.क्रूर कर्मों को जन हित में सार्वजानिक करना आवश्यक नहीं है.

वाममार्ग की क्रियाओं में अंतर होता है,पर ये कतारनाक और गोपनीय होती है .सिखने वाले स्त्री पुरुषों की भरमार है,पर कोई इसके बारे में नहीं जानता की करना क्या पड़ेगा और कितना समय लगेगामार्गदर्शन से सिद्धियाँ चाहने वाले लोगों को समझाते अब समझाने की भी सकती नहीं रहे ,ऐसे लोग,जो जानते ही नहीं की वे क्या प्राप्त करना चाहते हैं.कितना भी कहो की कम से कम यह तो जान लो की जो करने चले हो उसका स्वरूप क्या है.कोई नहीं बताता तो धर्मालय को ही गंभीरता से पढो .सिद्धि अवस्य मिल सकती है पर अ आ से पीएचडी तक कितने स्टेप कितनी परीक्षा है,कित्न्नी म्हणत करनी पड़ेगी,यह न सोच कर मार्ग दर्शन से तीन दिन में सिद्धि प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील लोगों के लिए क्या कहा जा सकता है.

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