ज्योतिष शास्त्र विद्या और लाल किताब – नवग्रह एवं राहू केतु

ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब
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ज्योतिष शास्त्र को समझने के लिए, हमें अपने शरीर के समीकरण को समझना आवश्यक है. आपके जन्म के समय ग्रहों की जो स्थिति होती है, वही आपके शरीर का उर्जा समीकरण होता है. इसी समीकरण पर आपका जीवन और भविष्य निर्भर करता है. आपके शरीर में रीढ़ की हड्डी में और खोपड़ी से पूँछ तक 9 उर्जा चक्र होते हैं. भारतीय आध्यात्मिक विद्याओं में सात को ही लिया जाता है. इसी पर योग तंत्र , ध्यान, देवी देवता आदि का पूरा विज्ञान खड़ा है. दो को दो के सामान उर्जा और आपसी सम्बन्ध के कारण योग या ज्योतिष में स्थान नहीं दिया जाता . तंत्र में सभी 9 को मत्व दिया जाता है. इन्हें उर्जा गाँठ मन गया है और ग्रह का अर्थ भी यही होता है. यह कल्पना की गयी है की इन गांठों में कोई शक्ति है, जो क्रिया करती उर्जा का उत्पादन करती है . यही हमारे देवी देवता हैं . इनका कोई रूप नहीं है. जो रूप सार्वजनिक हैं, वे ध्यान रूप हैं, क्योकि इन पर भाव का प्रभाव होता है और इनकी क्रिया तेज होती है.

हर व्यक्ति की उर्जा गाँठ या ग्रह एक समान उर्जा का य्त्पादन नहीं करते. इनमें सात चक्र भिन्न भिन्न समीकरण में उर्जा उत्पादन करतें हैं. यह समीकरण जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार गणना करके कुंडली बनती है. इसका विज्ञान यह है की बच्चा एक पोजिटिव इकाई है . जब वातावरण में उसी समीकरण की उर्जा का कोर होता है, तो वह बाहर की और खींचता है और डिलेवरी होती है . उसी बाहरी समीकरण की कुंडली बनाई जाती है, जो बच्चे का समीकरण मन जाता है. वास्तविक समीकरण तो रतिकाल का होता है और तंत्र में योग्य संतान के लिए उस समीकरण को साधा जाता है यानी पहले से प्लानिंग , ज्योतिष और भारती वैदिक आध्यात्म भी इसे मानता है और इसका एक विशाल शाश्त्र है. पर कुंडली बनाने वाला पंडित सामान निगेटि पोजिटिव उर्जा के सूत्र को अपनाता है .

कुंडली में जीवनचक्र को १२ खानों में बात गया है . परम्परागत जोतिष में इन्हें घर कहा जाता है. ये घर अलग अलग विषय को वहन करते हैं . इन घरों के स्वामी ग्रह ही होते हैं. इनकी धरती यानी बेस इनसे प्रभावित मन जाता है . सारे भौम यानी ब्रह्मांड को 12 राशियों में बांटा गया है. प्रैक्टिकल में इन्हें सौर मंडल तक ही लिया जाता है. ग्रह इन्हीं 12 राशियों में भ्रमण करतें हैं . इन राशियों के स्वामी भी ग्रह होते हैं .

नवग्रह और ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रह होते हैं. सात तो स्पष्ट उर्जा गाँठ हैं, दो राहू और केतु को छाया ग्रह माना जाता है. इसकी बहुत आलोचना होती है की राहू सूर्य को ग्रसित नहीं करता और केतु चंद्रमा को ग्रसित नहीं करता, ये तो पृथ्वी और चंद्रमा की छाया से होता है . ऐसा कहने वाले बेवकूफ ज्योतिष विद्या के बारे में कुछ नहीं जानते . फलित ज्योतिष में जातक के शरीर की उर्जा गाँठ को ग्रह कहा जाता है और वह हर व्यक्ति का अलग अलग होता है . बाहरी गृह चाल या नक्षत्र आदि के प्रभाव की गणना की जाती है.

राहू केतु क्या है?

राहू केतु को ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह इसलिए कहा जाता है कि ये शरीर में स्पष्ट उर्जा चक्र नहीं हैं. सर के चाद में जो गढा होता है. ज्योतिष का चंद्रमा वह है . यह पोजिटिव प्वाइंट है. इसमें एक छेद होता है, जिसे ब्रह्म रंध्र कहा जाता है. यहाँ सर के ऊपर एक उर्जा बनती है, जो मूलतत्व से तृप्त होती है. इसे सती कहा गया है, जो शरीर रुपी दक्ष प्रजापति के इस चंद्रमा रूप हवं कुंड में लगातार गिरती रहती है. यही हमारा जीवन सार उर्जा है और इसी इधन से हमारा नाभिक काम करता है और सारे शरीर के सभी छोटे बड़े उर्जा चक्रों में इसे पंहुचाता है . इसी से मस्तिष्क की कोशिकाओं का निर्माण होता है और उसमें विद्युत् लहर चलती है. यही लहरें राहू है. इसी पर चाँद की शक्ति है.

यह कमजोर हुआ, तो पोजिटिव आपूर्ति बाधित होती है और शरीर के नाभिक की शक्ति कमजोर होती है. यह तेज हुआ, तो नाभिक तेज होता है, सारे शरीर में अधिक वोल्टेज, गर्मी, धड़कन आदि अनेक विकार शुरू. ज्योतिष में ही नहीं, सभी सनातन धर्म के आध्यात्मिक तान्तिक क्षेत्र में नाभिक को ही सूर्य कहा जाता है, चाहे वह किसी इकाई का हो.

केतु ग्रह हमारे शरीर की रीढ़ में नीचे मूलाधार के प्लेट से नीचे जो तिकोनी हड्डी है, उसकी नोक पर है. तंत्र में इसे भैरव जी कहा जाता है. यहाँ से जो उर्जा धारा निकलती है, वह जेट की तरह आगे जा कर छितरा जाती है. यह पूंछ का निर्माण करती है . यह निगेटिव प्वाइंट है. यह कमजोर हो या बी तेज हो. पोजिटिव यानी चंद्रमा पर प्रभाव पड़ता है .

पोजिटिव या निगेटिव का डिस्टर्व हो जाना आपकी बिजली व्यवस्था से लेकर तमाम एल्क्ट्रोनिक यंत्रों पर क्या प्रभाव डालेगा , इसको आप प्रत्यक्ष अनुभव से समझ सकते हैं. यह सभी ग्रहों को यानी पूरे सिस्टम को बिगाड़ देता है . इसलिए इन दोनों को सबसे खतरनाक ग्रह माना जाता है. अशुभ केतु या राहू के उपाय या मन्त्र आदि ग्रहों के उपाय में दिए गए हैं.

राहू और केतु के उपाय, राहू दोष और रहू महा दशा, केतु दोष और केतु महादशा के लिए निम्न लेख देखें. अशुभ केतु दोष और उपाय और अशुभ राहू दोष और उपाय. अन्य ज्योतिषीय नवग्रहों के दोष उपाय और उपचार के लिए धर्मालय के ज्योतिष ज्ञान संभाग को पढ़ें.

लाल किताब की जोतिष विद्या

प्राचीन ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब के उपाय में कुछ अंतर है. इसमें राशियों को घरों में फिक्स कर दिया गया है. कुंडली में कोई भी राशि किसी घर में हो , इसमें पहले घर में मेष से क्रम से बारहवें में मीन होती है. गृह अपने स्थान पर हते हैं. यह एक उल्जा हुआ विशाल शास्त्र है. बाजार की गुटिका पुस्तकों से इसे नहीं समझ जा सकता . मेरी पुस्तक लाल किताब लगभग 2000 पेज ए 4 साइज में है. प्रकाशक डी पी बी पब्लिकेशन . चावरी बाजार , दिल्ली 6 है. फोन नम्बर

लाल किताब के सम्बन्ध में हम अपने आने वाले लेखों में और प्रकाश डालेंगे. इसके लिए देखिये धर्मालय का ज्योतिष ज्ञान संभाग.

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