खब्बीस के मायाजाल का रहस्य

सबसे पहले बता दें कि ‘ख्ब्बीस’ इस्लामिक तन्त्र की एक शक्ति है; ठीक उसी प्रकार जैसे कर्ण पिशाचिनी, अप्सरा, भूतनी आदि! यानी भाव का केंद्रीभूत ऊर्जरूप; जो साधक की मानसिक शक्ति के नियंत्रण में होता है।

एक युवती को , जो शादीशुदा थी; ठीक सोने के समय एक भयानक वनमानुष जैसा जीव दिखाई देता था, उसके आते ही कमरे की रौशनी डीम हो जाती थी।  वह जोर जोर से चिल्लाने भयभीत होकर भागने का प्रत्यन करती थी, पर उसके बदन में ताकत ही नहीं रहती थी।  वह उसके साथ बलात्कार करता था।  वह बेहोश हो जाती थी।  नींद खुलती थी, तो सुबह  हो गयी रहती थी।  शरीर पर नीले दाग होते रहते थे।

ससुराल में शादी के एक महीने तक इलाज होता रहा है।  पीर-मजार, साधु-संत, मनोवैज्ञानिक-सबका अपना अपना एनालिसिस था।  सभी इलाज भी करते थे; पर लाभ कुछ न हुआ, तो उसे मायके छोड़ गये।  वहाँ भी वह स्थिति जारी रही।

जब उसे मेरे पास लाया गया; दो उसके शादी के महीने व्यतीत हो गये थे।  युवती सुंदर और जवान थी।  वह भयभीत भी नहीं थी, हाँ उदास थी। स्वास्थ्य  ठीक ही था।  पर बदन पर निशान यत्र-तत्र थे।  उसने कहा कि अब भय नहीं लगता।  वह कहता है कि मुझे ले जाएगा;पर मैं क्या कर सकती हूँ?

मैंने उसे लिटाकर सर, ललाट पर मन्त्र पढ़ा , तो वह सम्मोहित सी पलकें मूंदें मेरे प्रश्नों का जबाब देने लगी।  पता चला कि दो युवतियां एक ही युवक से प्रेम करती थी।  इस पर दोनों में झगडा हो गया।  दूसरी ने उसे भयानक शब्दों में धमकी दी कि वह उस पर खब्बीस छुड़वा देगी।  भयानक मौत मरेगी वह।  उसने किसी इस्लामिक तांत्रिक का भी नाम बताया; पर उसका कोई उपयोग न था; क्योंकि ऐसी बातें कोई कबूलता ही नहीं।  फिर अचानक एक दिन उसकी सहेली ने माफ़ी मांग ली।  उसे अपने हॉस्टल में ले गयी।  दोनों ने चॉकलेट आइसक्रीम खायी।  उसी के कल होके गुदामार्ग से रक्त गिरने लगा, बुरे-बुरे सपने आने लगे।  वह भयानक आकृति उसे सपने में तंग करने  लगी।  कुछ दिन बाद वह बाहर दिखाई देने लगा और दुष्कर्मों का सिलसिला शुरू हो गया।  वह बीमार पद गयी। उसके बाद उस युवक से उसकी सहेली की शादी हो गयी।  उसके माँ –बाप  ने भी उसकीशादी कर दी।  यानी रोग 2 महीने का नहीं, चार महीने का था।

मुझे समझ में आ गया कि क्या किया गया था।  खब्बीस के इस्लामिक मन्त्र से सिद्ध कोई विषैली चीज चॉकलेट में थी।  इसे नेगेटिव बनाकर वह व्यक्ति खब्बीस के ऊर्जाचक्रों को भेज रहा था।  वास्तव में वही बलात्कार कर रहा था।  खब्बीस के रूप में उसकी मानसिक शक्ति थी।  वह अपने स्थान पर बैठा उस कमरे में मौजूद रहता था।

जबरदस्त तांत्रिक क्रिया थी।  इसलिए टोन-टोटके से दूर नहीं हो रही थी।

मैं सबसे पहले उसे उल्टी करवाया, पेट-साफ़ करवाया, कई तरह के पेय पिलाये, फिर उससे महाकाल की पूजा करवाकर विशेष मंत्र सिद्ध तेल से स्नान करवाया और विशेष सामग्रियों का हवन कराने लगा।  उसके नाक से, मुंह से, आँखों से हरा-पीला विकार निकलने लगा, इतने जोर का मल-मूत्र वेग आया कि हवन रोक कर उसे मौका देना पड़ा।  ऐसा ही अपेक्षित भी था।

540 हवन करते-करते वह तीन बार शौचालय गयी, स्नानादि किया।  उसके शरीर से दुर्गंधित पसीने छूट रहे थे।

सुबह हो गयी।  मैंने उसे आराम करने भेज दिया।  उस रात कोई खब्बीस नहीं आया।  वह दिन भर शौच जाती रही।  नाक-आँख से पानी बह रहा था।  मूत्र भी बहुत हो रहा था।

उसे 9 दिन रहना पड़ा।  आगे 108 हवन प्रतिदिन होता था।  प्रतिदिन स्नान।  इन दिनों में कोई भय, सपना या खब्बीस कहीं नहीं था।  उसके शरीर के निशान मिट गये थे, आँखों-शरीर में चमक थी; पर वह थकी लग रही थी और इसके लिए महाकाल पूजा में कई पेय पिलाये जाते थे, पर तब भी थकी थी।

फिर मैंने ताबीज बांधकर उसे विदा कर दिया।  तीन वर्ष तक वह  फोन करके हाल चाल बताती रही।  उसका पति अच्छा आदमी था।  वह उसके साथ सुखी था।

वस्तुतः उसकी सहेली ने उसकी तस्वीर किसी तांत्रिक को देकर क्रिया करवाई थी।  उसने कुछ खिलाने के लिए कहा, जिसमें उसके शरीर के थे विषैली वस्तुओं के साथ।  जब दोनों का समीकरण मिला , तो वह उसकी सुन्दरता पर रीझकर उस अमानवीय भावशक्ति के द्वारा रति करने लगा।  शरीर पर पड़ने-वाले निशान, बदन का टूटना आदि विषैली पदार्थों का प्रतिफल था।  उसका उस मानसिक रति से कोई सम्बन्ध नहीं था।

विष पेट में हो, तो वमन से निकल जाता है; पर मांस-मज्जा में ऊर्जात्मक रूप से समा गया हो; तो अनेक प्रकार के उपचार करने पड़ते है।  उसमें मुझे 14 विधियों को एक साथ लागू करना पड़ा था वरना  वह सच में मर जाती।

तन्त्र शास्त्र एक अजीब सा मायाजाल है; पर यह नियम विहीन नहीं है।  महा ऋषि गौतम ने कहा था –“हर कार्य और क्रिया का कोई न कोई कारण होता है। ” – यही सनातन धर्म सूत्र भी है।  इसलिए अकारण तो कुछ हो ही नहीं सकता।  

 

6 thoughts on “खब्बीस के मायाजाल का रहस्य

  1. mere chhote bhai k uper v khabis ka saya h, 2002 se hi mental dr. se ilaj chal raha kyonki koi jankar sachche sadhak nahi milte par aap ka lekh padh kar aasha jagi hai. mai ik gareb pariwar se hun ,plese help me.

    1. एक तो आपने पूरा डिटेल्स नहीं भेजा कि उसके लक्षण क्या हैं? और समस्या क्या हैं? आप सीधे डायग्नोसिस भेज रहे हैं| दूसरी बात कि मैं अपनी फीस न भी लू, तो भी हमारे यहाँ आने , हफ्ते भर ठहरे और इलाज पर होने वाले व्यय को तो करना ही होगा| हमारा कोई आश्रम नहीं है, इस तरह की चिकित्सा वालों को अपनी व्यवस्था करनी पड़ती है| हम केवल स्थानी व्यक्तियों का सहयोग दिलवा कसते है| इस तरह के केस टोटके के नहीं होते हैं , परिक्षण करना होता है|

  2. Aapne khabbis ke rahasya bataya. Meri ek friend hai Jo pichle 10-12 saalo se isi lakchan se grasit hai. Kitne hi tantric or Moulana ko dikhay. Mandir masjid gay lekin koi rahat nahi. Ab to sharir bhi saath chod raha hai.kripya kar marg dikhaye.

    1. यह मार्ग दर्शन का मामला नहीं है, दूर बैठकर मार्ग दर्शन देकर इस प्रकार के मामले का हल नहीं निकाला जा सकता| आपको उन्हें मेरे पास लाना होगा,वह भी न्यूनतम एक हफ्ता रहने का मार्जिन लेकर , हमारा कोई आश्रम नहीं है, जो लोग हमारे यहाँ आते है उनको हम स्थानीय सहयोग दिला देते हैं, पर आवास भोजन की व्यवस्था उनको स्वयं करनी होती हैं| यदि मामला चिकित्सा के योग्य हुआ और हमने except किया तो आपको हफ्ता भर रहना होगा और चिकित्सा में भी व्यय आएगा|क्योंकि इसमें तेल, घी, दूध, दही, इसके साथ अन्य कई जड़ी बूटियों के मिश्रण का लेप प्रयुक्त किया जाता है| और यह स्नान होता है| परन्तु यह परिक्षण करके ही ज्ञान हो सकता हैं कि मेथड कौन सा अपनाया जाए.

  3. Namskar आप कोन हे हम नही जानते बस इतना लगा की दुनिया मे अगर बुरे लोग हे तव अच्छे भी है,आपने जो लड़की की कहानी बताई वो मेरी है बस फर्क इतना हे मुझे दिखाई नही देता बस कभी काला साया कभी कभी मेरे साथ ये बच पन से है न मेरे कोई काम होते न शादी मेरी उम्र 32 हो गई मेरा नाम शीबा है प्लीज आप बताए आप कहा से है क्या आप के कोई चार्जेज है अपना पूरा एड्रेस बताए खुदा की मर्ज़ी हुई आपसे मुलाक़ात ज़रूर होगी

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