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क्या मंत्र जपने या ताबीज बाँधने से परीक्षा में सफलता प्राप्त होती है?

(इच्छा, क्रिया और ज्ञान)

यह एक अच्छा और उपयोगी प्रश्न है। इसे प्रत्येक छात्र-छात्राओं को जानना चाहिए। बल्कि इसे प्रत्येक स्त्री-पुरुष को जानना चाहिए, जो भिन्न-भिन्न पेशे में लगे हैं।

तंत्र का एक शाश्वत सूत्र है। इसका कहना है कि प्रकृति में शक्ति (ऊर्जा व्यवस्था) का संचार चल रहा है, उसकी तीन अवस्थाएं है – इच्छा, क्रिया और ज्ञान। इसमें से एक का भी ‘लोप’ हो जाए, तो फल की प्राप्ति नहीं हो सकती। यह तांत्रिक सूत्र तो प्रकृति के (ब्रह्माण्ड के) संदर्भ में कहा गया है; पर इसे भौतिक जीवन के संदर्भ में समझना चाहिए।

परीक्षा पास करने के लिए या किसी भी गल की प्राप्ति के लिए यही सूत्र है। इच्छा होना, उसके लिए क्रिया करना- इसके बाद ही तीसरी अवस्था – ज्ञान या फल की प्राप्ति होती है। इनमें से एक का भी अभाव हो , तो फल की प्राप्ति नहीं होगी। यह शाश्वत सूत्र है। समस्त प्रकृति पर व्याप्त है। सिद्धि-साधानाओं में भी यही सूत्र काम करता है। अतः बिना पढ़े परीक्षा पास करना असम्भव है। स्वयं देवी सरस्वती भी यह नहीं कर सकती, किसी ताबीज का क्या।

अब प्रश्न उठता है कि क्या ताबीज या यंत्र – मंत्र का कोई प्रभाव नहीं है।

है और बहुत शक्तिशाली है ; परन्तु इसका प्रभाव इच्छा पर पड़ता है । इनके प्रभाव ऊर्जात्मक होते है, इसलिए ये मानसिक जगत को प्रभावित करते है और अप्रत्यक्ष रूप से क्रिया में उत्प्रेरक बन जाते है; उसके मध्य आने वाली बाधाओं को दूर करते है और इसमें भी जो क्रिया होती है; वह आपके ही द्वारा सम्पन्न होगी। विघ्न बाधा भी इसी तरह दूर होगी। बिना क्रिया के फल कि प्राप्ति असम्भव है। स्वयम परमात्मा भी यह नहीं कर सकता, क्योंकि प्रकृति में वह अपने नियमों में बंधा हुआ है।

अब जो मुर्ख पाखंडी ठगों की बातो में आकर यह समझता है कि ताबीज बाँध लिया है; पढने या क्रिया करने की आवश्यकता ही क्या है; वह अपना ब्रेक लगाकर ताबीज यंत्र या मन्त्र की भी शक्ति में ब्रेक लगा देता है। मैं अनेक लोगों की कामनापूर्ति के लिए आध्यात्मिक – तांत्रिक क्रियाओं को करता हूँ, उनको सामग्री भेजकर उसके उपयोग की विधि बताता हूँ और कहता हूँ कि यह केवल उत्प्रेरक है ; ‘क्रिया’ नहीं; परन्तु अनेक ऐसे जड़ से पाला पड़ जाता है , जो इस बात को समझने की जगह यह समझ लेते है कि तन्त्र सिद्ध ताबीज बांध लिया है; अब काम करने की जरूरत क्या है? छत से सोना बरसने लगेगा। मैं उन्हें समझाता रहता हूँ और कई सार्वजनिक पोस्ट भी किये है कि आध्यात्मिक एवं तांत्रिक जगत को समझिये। इसमें असम्भव भी सिद्ध होता है; परन्तु यह सब नियम बद्ध है; चमत्कार नहीं। आप नियमों – सूत्रों को नहीं जानते, इसलिए चमत्कार लगता है; पर उनका विश्वास है कि उनके गुरु तो हवा में सेब पैदा कर लेते है और सुपारी –लौंग भी हवा से लेकर खिला देते है। अब जरा सोचिये। सेब और लौंग – सुपारी पर ही क्यों भीड़ गये हो भाई? हीरे- जवाहरात क्यों नहीं?.. कोई उत्तर नहीं देगा।

मैंने अनेक गुप्त साधकों की संगती की है। अनेक गुप्त तंत्र ग्रन्थों को पढ़ा है और मैं उन्हें पढ़कर आश्चर्य चकित हूँ कि ज्ञान का यह रूप आया कहाँ से? एक से एक चमत्कार है और उनके अआधार सूत्र है ; परन्तु उनमें मैंने कहीं नहीं पाया कि मन्त्र पढ़ते ही मकान बन जाएगा या वृक्ष उत्पन्न होने लगेंगे। मानसिक क्रिया भी क्रिया ही होती है। पढना भी एक मानसिक क्रिया है और आध्यात्मिक सिद्धियों के लिए की जाने वाली साधनाएं भी। दृष्टि से आग लग सकती है; परन्तु उसमें भी क्रिया सम्पन्न होती है। रिमोट के बटन दबाने से टी.वी नहीं चलती , उसमें एक ऊर्जात्मक क्रिया होती है और तब टी.वी चलता है। लेकिन लोग अंधी आस्थाएं पाले बैठे है। सत्य बताइए, तो आपको ही अज्ञानी मुर्ख कहने लगेंगे। उनका विश्वास है कि बस मन्त्र पढो सफलता मिल जाती है। इनकार करो, तो घोषित कर देंगे कि इनको कोई ज्ञान नही।

मैं सभी छात्र-छात्राओं से कहना चाहूँगा कि ताबीज अवश्य बांधिए, पर इस उत्साह के साथ कि उसकी शक्ति आपके साथ है , आपको निश्चित सफलता मिलेगी और अपने कर्तव्य का पालन कीजिये। एक टी.वी में 100 चैनल था। उसका मालिक उसे मैकेनिक के पास ले गया कि इसे 300 कर दो भाई। उसने कर दिया। उसने टी.वी लाकर घर में लगाया और उसे स्टार्ट किया ही नहीं। उसके सामने बैठ गया और देखने लगा कि कब 300 चैनल उस पर उभरेगा।

कृपया ऐसी मुर्खता मत कीजिये। सारा करियर , सारी जिन्दगी नष्ट हो जायेगी।

 

Email – info@dharmalay.com

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