क्या देवी देवता सचमुच होते हैं?

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इस बौद्धिक युग में ,जिसे कुछ लोग वैज्ञानिक भी कहते हैं सचमुच यह जानना जरूरी है .सनातन धर्म और विज्ञानं आज विचित्र कीचड़ में फंस गया है.लोग जानना नहीं चाहते .बाबा लोग जो समझा रहे हैं , वहीं दुनिया उनकी आस्था है .बाबाओं की बातें ऊपरी मायाजाल से जुडी होती हैं ,जो इसका विज्ञानं नहीं जाननेवालों के लिए किसी बौद्धिक तर्क पर  खड़ी नहीं उतरतीं .इससे भ्रम उत्त्पन्न होता है और इसी भ्रम से बाबाओं का कारोबार चलता है इसे समझाने के लिए सनातन विज्ञानं के उन गूढ़ रहस्यों को जानना होगा ,जो एक दुर्लभ ज्ञान हैऔर हजारों बरसों में हिसी एक को परमात्मा की कृपा से प्राप-टी होता है एवं वही उसे समाज में फिर से स्थापित करता है ,उस युग के अनुसार .                                                सनातन विज्ञानं संछिप्त रूप से इस प्रकार है ———-                                                                                                                                जब ब्रहमांड नहीं होता तो एक विरल तेजोमय सूक्छ्म चैतन्य तत्व सर्वत्र विद्यमान होता है. कुछ निश्चित नियमों एवं क्रियाओं से उसी की अन्तर धाराओं से एक सर्किट बनता है और निश्चित नियमों एवं क्रियाओं से अपने ही जैसे सर्किटों को उत्त्पन्न करते हुए ब्रहमांड के रूप में विकसित होता है .सभी की उत्त्पत्ति ,विकास,विअस,क्रिया के नियम एक होते हैं.ये नियम तत्व [परमात्मा]से उत्त्पन्न होते हैं .. ब्रह्मांड के लोप होने पर  पुनह तत्व में विलीन हो जाते हैं .नए ब्रहमांड की उत्त्पत्ति पुनह उन्ही नियमों एवं क्रियावों से होती है .इसी लिए इसे सनातन धर्म कहा जाता है .    यह  विज्ञानं बताता है कि सब में एक ही सर्किट है ,जिसमें अनगिनित उर्जविंदु हैं . इनसे भिन्न भिन्न प्रकार की उर्जा निकलती है .यानि इस ब्रहमांड में समान प्रकार की उर्जएं भिन्न भिन्न सुक्छ्मता के स्तर पर विकृत हो रहीं हैं .इन उर्जविन्दुओं में जो शक्ति काम कर रहीं हैं वी ही हमारे देवी देवता हैं .इनकी शक्ति प्रत्येक सुक्छ्मता के स्तर पैर वातावरण में विद्यमान हैं .सामान्यतया १०८ को प्रयोग में लिया जाता है.सभी मन्त्र , सिद्धि ,पूजा,साधना, यहाँ  तक कि ज्योतिष ,वास्तु, आयुर्वेद आदि सभी प्राचीन विद्द्यएं इसी विज्ञानं पर आधारित हैं .सारा आध्यात्मिक जगत भी इसी पर आधारित है .यह आस्था नहीं एक ऐसा विज्ञानं है ,जो विश्व के वैज्ञानिकों के छक्के छुड़ा दे,परहम ही अंधी आस्थाओं के शिकार  हैं, अपने को सपेरों चरवाहों के वंशज मानते हैं .तो दूसरों को कैसे दोष दे सकते हैं?                                                                                                           तो फिर जो परत होता है वह कौन है? राम ,कृष्ण आदि का सत्य क्या है?देवियों या देवताओं के जिस रूप की हम  पूजा साधना करते हैं वह क्या है?क्या वह झूठ है?                                                                                                                                                                                       नहीं ! विचित्र मायाजाल है यह ब्रहमांड . और सनातन विज्ञानं भी .इसे जानने वाला हत्प्रव हो कर रोने लगता है कि हे परमात्मा तुम्हारी यह कैसी  लीला है? उपर के प्रश्नों के उत्तर के लिए अगले पोस्ट का इंतजार कीजिये . बहुत गहन और जटिल विषय है ,कुछ ही देर में मेरा भी भी दिमाग चकराने लगता है की पहले  किस विषय को स्पष्ट करूँ की सब इसे समझ सकें .

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11 Comments on “क्या देवी देवता सचमुच होते हैं?”

  1. Sub sa phala Guru Ji Ko Haat Jodkar Parnam.

    Kirpa kar ka app upna Phone No. & Address Muzko Batao ma app sa mil na chata hu. kyo ki ma bhout prasaan hu. Ak admi marra picha laga huva hi usna muz per 4 var kar dya hi muza mar na ka liya. mara chota chota teen bhhacha hi mara bad un ka koon hoga.
    Mara Nam Babu Ram Ha ma Distt: Ghaziabad ma rahata hu.

    mara mo. no. 08954306831 ha 05.10.2016 ko yaha mo. mara pass rahaga mere E-mail Id: baburamgautom@hotmail.com is App apna address muza mail kara phon no. ka saath

  2. Guruji pranam,

    Ap ki btai bahut si sadhnao aur vidyao se mujhe bhut se labh prapt huye h iske liye apko sat sat namn karta hu guruji.
    Guruji esi koi sadhna h jisse mai apne gurudev jinka swargwas ho chuka h unse bat kar saku agr yah sambhav h to btaye mujhe mere guru ka margdarsan hmesa se swapn me hi milta rha h mai unse ab sidhe sawand karna chahta hu agr sambhav ho to kripya kar btaye jai ma durga.
    Pranam

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