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क्या तन्त्र में वियाग्रा जैसी भी कोई कामोत्तेजक औषधि है?

‘वियाग्रा’ एक बेहद हानिकारक दवा है। एक-दो महीने में पूर्णतया नपुंसक बना देने वाली। तंत्र में हानिरहित औषधियाँ है और वियाग्रा से अधिक कामोत्तेजक है; पर इनके बनाने की प्रक्रिया बहुत जटिल है। इसलिए ये औषधियाँ बहुत मँहगी हो जाती है।

इसके अतिरिक्त तन्त्र के अनुसार केवल कामोत्तेजना किसी काम की नहीं होती। कितना भी शक्तिशाली पम्पिंग सेट हो, उसको पानी ही न मिले, तो वह किस काम का? इसलिए ये तन्त्र की पहली प्राथमिकता शरीर में धातु की पर्याप्त पुष्टता बनाना और जननेद्रियों के दोषों को समाप्त करने की होती है।

आज की विकराल समस्या यही है। हर दस में से सात स्त्री-पुरुष धातु-दुर्बलता के शिकार है। यह ऐसा विषय है कि कोई किसी से व्यक्त करने में भी ग्लानी महसूस करता है। जो करते है, वे बाजारू विज्ञापनों या बाबाओं के चक्कर में और बर्बाद होते है। इसे रोग समझकर ही निदान करना चाहिए और कम से कम 108 दिन औषधि एवं निर्देशों का प्रयोग करना चाहिए।

तन्त्र में इसके लिए महँगी, सस्ती सब प्रकार की औषधियाँ है; पर सबसे सस्ती भी आज के युग में पूरा 108 दिन का कोर्स – 11000 रु. से कम में बनना संभव नहीं है। यह लगभग 2.5 किलो सामग्री होती है। इसके साथ दिए गये भोजन सम्बन्धी सरल निर्देश का पालन करने पर बल, वीर्य, उल्लास की अत्यंत वृद्धि होती है। कोई लगातार इसका प्रयोग करता रहे, तो बीमार ही न पड़े।

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