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क्या कई गुरु हो सकते है? क्या गुरु के बदलने से ‘दोष’ लगता है? किस देवी-देवता के लिए कौन सी माला प्रयोग करनी चाहिए?

एक ही साधना या विषय के लिए एक ही समय काल में कई गुरु नहीं हो सकते| ऐसा करने पर वह सिद्धि नहीं प्राप्त होती है| यह व्यवहारिक बात है| आपको बिजली बनानी है और तीन गुरु है| एक कोयले से बिजली बनाने की विधि बता रहा है, एक डीजल से, तीसरा बैट्री सेल की विधि समझा रहा है| आपका प्रयोग कहीं पहुंचेगा ही नहीं| आध्यात्मिक साधनाओं में भी एक ही मंत्र या सिद्धि के लिए सैकड़ों विधियां है|

जीवन में गुरु अनेक होते ही है| जो भी व्यक्ति आपको किसी विषय की शिक्षा देता है, वह गुरु ही होता है| आध्यात्मिक सिद्धि-साधनाओं या ज्ञान , समाधि और मोक्ष का मार्ग अनेक सीढियों को चढ़कर तय होता है| कोई आवश्यक नहीं कि एक गुरु ही सब बता-समझा दे| विषय परिवर्तन के साथ अक्सर गुरु बदलते रहते है| यह साधक की अपनी आवश्यकता और विवेक के अनुसार परिवर्तन होता है| प्राचीन समय में गुरु ही बता दिया करते थे कि जो वे जानते है; वह बता दिया है; आगे के लिए अन्य गुरु तलाशों या वे किसी विशेष गुरु के पास जाने की सलाह भी देते थे| आजकल के गुरु सर्वज्ञाता होते है| वे नहीं बताते| यह साधक को अपने विवेक से तय करना चाहिए|

एक ही विषय पर भी गुरु परिवर्तित किया जा सकता है| शास्त्रों में इसका निर्देश है कि यदि कोई मंत्र या विधि आपके उपयुक्त नहीं बैठ रही या आपको लाभ नहीं हो रहा या असुविधा हो रही है, तो संकल्प करके उसे उस गुरु के नाम पर जल में प्रवाहित कर दीजिये और नया गुरु प्राप्त करने का प्रयास कीजिये| परन्तु गुरु निंदा या अविश्वास वर्जित है| उसने दिया, आपके उपयुक्त नहीं था, आपने त्याग दिया| परमात्मा ने इस प्रकृति में बहुत सी चीजे दे रखी है; कोई किसी के उपयुक्त है , क्जोई नहीं है, कोई जान ही ले लेता है| पर इसके लिए उसके प्रति अविश्वास या उसका अपमान करना वर्जित है| इसी प्रकार गुरु भी होता है| किसी अज्ञानी से कुछ लिया, तो यह आपका दोष है|

एक कुल गुरु भी होते है | जिन्हें हम कुल पुरोहित कहते है| इनको परिवर्तित करना वर्जित है | इससे पितृ दोष लगता है | यह कुल की पीढ़ियों तक को परेशान करता है| हाँ, यदि स्वयं वे असमर्थता दिखाते है, तो उनकी सलाह से यह परिवर्तन किया जा सकता है|

ब्राह्मण , ग्यानी, गुरु, पिता, मन्दिर ( या कोई भी पूजा गृह) , बुजुर्ग, संस्कृति आदि का अपमान करने वाला कितना भी शक्तिशाली या महान हो जाए; अपने वंश सहित पतन की खाई में गिर जाता है| लगभग ऐसा ही शास्त्रों का कथन रहा है और कुछ को मैंने देखा भी है|

किसके लिए कौन सी माला ?

माला , यंत्र, पूजन सामग्री के सम्बन्ध में समस्त विवरण हमारे वेबसाइट के “ माला की सारिणी” एवं “माला एवं पूजा सामग्री”–   

में देखें|

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