कौन हूँ मैं? क्या अभी भी नहीं पहचाना ?

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मैंने चाहा था कि अपना कोई विशेष परिचय दिए (भौतिक परिचय धर्मालय पर हैं) लोगों को सनातन धर्म की वैज्ञानिकता बता कर उन्हें उससे जीवन में लाभान्वित होने, सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति करने और मनुष्य बनने का वास्तविक ज्ञान प्रसारित करूँ। यह महत्त्वपूर्ण नहीं होता कि ज्ञान कैसे प्राप्त किया गया और किसने प्राप्त किया है। महत्त्वपूर्ण केवल ज्ञान होता है और परिक्षण उसकी सत्यता एवं असत्यता का किया जाता हैं । सनातन धर्म के आचार्यों ने इसी आदर्शों को माना है। मन्त्रो को छोड़कर समस्त ज्ञान शिव, पार्वती, भैरव, भैरवी, आदि अनेक देवी-देवता के नाम से प्रसारित किया है। संस्कृत के सैकड़ों ग्रन्थ, पुराणों, आदि अनेक ग्रंथों में इसी परिपाटी को प्रयुक्त किया गया हैं। इनके वास्तविक रचयिता का नाम किसी को ज्ञात नहीं।लेकिन मेरे पास जो फ़ोन आते है और हमारे फेसबुक पर जिस प्रकार के प्रश्न किये जाते है। उनमें से अनेक यह जानना चाहते हैं कि मैं कौन हूँ? अब मैं क्या जवाब दूं कि मैं कौन हूँ?  पूरा भौतिक परिचय धर्मालय के वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आध्यात्मिक क्षेत्र के व्यक्तित्त्व का परिचय ज्ञान देता है। लेकिन किसी का पूछना है कि आपको दिव्यदृष्टि मिली हैं या नहीं? हवा में हांड़ी उड़ा सकते हैं या नहीं? अदृश्य हो सकते हैं या नहीं? छत से सोना बरसा सकते हैं या नहीं? इसलिए मुझे अपने बारें में कुछ अतिरिक्त बातें कहने की ज़रूरत आ पड़ी है।

 

 दिव्यादृष्टि से जो जो चाहता हैं वही मिलता है । एक यान यदि प्रकाश से भी तीव्र चले , तो उसके ड्राईवर को यह सोचना पड़ता हैं कि वह कहाँ जाएगा और कौन सी मंजिल पकड़ेगा। यही बात मैं आपको समझाने की कोशिश कर रहा हूँ  कि जो भूत भविष्य जानना चाहेगा उसको वह प्राप्त होगा । जो कीसी दूसरी ही दिशा में अपनी शक्ति को लगाये हुए है और उसकी इच्छा ही नहीं है कि वह भूत और भविष्य को जाने , तो उसे जानकारी कैसे होगी। आपने मुझसे पुछा कि क्या आपको दिव्यदृष्टि प्राप्त है ? मैंने सदाशिव को सिद्ध किया और उनका प्रत्यक्ष भी किया जहां एक निराकार शुन्य और चांदनी जैसा प्रकाश फैला हुआ था। मैंने उनसे वरदान माँगा कि मुझे ऐसी दिव्यदृष्टि दीजिये , जो इस ब्रह्माण्ड के सत्य का बेधन कर सके और मुझे इसके समस्त रहस्यों का ज्ञान हो।मैं अंतिम सत्य को और उससे उत्पन्न होने वाले समस्त विधि प्रक्रिया का ज्ञान करना चाहता हूँ। मैं जानना चाहता हूँ की अलौकिक शक्तियों का रहस्य क्या  है? और इन्हें कैसे प्राप्त किया जा सकता है? भौतिक जगत के नादर छुपे हुए दिव्य सत्य को जानना चाहता हूँ और उनहोंने कहा , जो मेरे अंतर मन में गूंजा कि तुम प्रयत्न करो , जानने का प्रयास करो तुम जो जानना चाहोगे , जो आध्यत्मिक जगत के सम्बन्ध में हैं, मैं तुम्हे बताऊंगा। क्योंकि करोड़ो जीवों में से कोई एक इस उद्देश्य के लिए मेरी साधना करता है। और साधना करने वालों करोड़ों में से कोई एक मुझ तक पहुच पाता  है।। तुमने मेरा प्रत्यक्ष किया , तो मैं तुम्हे यह दिव्यदृष्टि देता हूँ कि तुम्हे मुझसे उत्पन्न होने वाले इस ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति से लेकर विनाश तक की एक एक क्रिया एक एक नियम का ज्ञान हो। और जितनी भी तरह की अलौकिक शक्तियाँ हैं उनके वास्तविक सत्य का ज्ञान हो। तुम्हे उस, “पुच्छल तारे” का ज्ञान हो , जो कलयुग में सम्पूर्ण पृथ्वी के मानव समाज का उद्धारक बनेगा। चाहे यह तुम्हारे जीवन काल में हो या उसके बाद . मानव समाज का कल्याण इस “पुच्छल तारे” के द्वारा ही होगा। वरना यह स्वयं तो विनष्ट होगा ही ,पृथ्वी की आधार भूत संरचना को भी नष्ट कर देगा। यह आज से 18 बरस पहले की बात है, तब मैंने इसे मानसिक भ्रम समझा था। परन्तु जब मैंने इस क्षेत्र में परिश्रम शुरू किया , तो सब कुछ सत्य होता गया । और आज सचमुच वह मेरे प्रत्यक्ष हो रहा हैं। मैंने भौतिक सिद्धिओं की कामना कभी की ही नहीं , तो उसकी प्राप्ति से मेरा क्या मतलब? मैंने धन की भी कामना नहीं की लगातार इस ब्रह्माण्ड के रहस्य को जानने में अपनी पूरी मानसिक शक्ति को व्यय करता रहा, तो धन भी प्राप्त नहीं हुआ । इस प्रकृति में  सदाशिव के नियम सक्रिय है . तुम चाहे कितने बड़े तीस मार खान हो , चाहे महाकाल का स्वरुप या  प्रकृति ही क्यों न हो , उसके नियमों से बंधी हुई हैं। जो कामना करोगे वही प्राप्त होगा , शेष समस्त चीजों का अस्तित्व तुम्हारे  के लिए नहीं है।

 

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