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कैसे करें इष्ट देवी-देवता का चुनाव

ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति से – प्रत्येक व्यक्ति की जन्मकुंडली नहीं होती, परन्तु अधिकांश की होती है | यदि नहीं है और जन्म की सही तिथि और समय ज्ञात है, तो बनवा लीजिये | इसमें ग्रहों की स्थिति देखिये | केवल दुर्लभ ग्रहों के देवता की पूजा कीजिये | स्वामी ग्रह यदि दुर्लभ है, तो उसकी ही शक्ति चाहिए आपको | जो बढ़ा हुआ है, उसकी वस्तुओं का दान देना और दान न लेना उपयुक्त होता हैं |

हमने एक विचित्र तमाशा देखा है | सामान्य मान्यता है कि शनि ग्रह का शुभ फल तब प्राप्त होता है, जब लोहा दान में दिया जाये | एक दूसरी मान्यता है कि लोहे की अंगूठी पहनी जाये |

आप देखेंगे की शनि के लिए प्रत्येक ज्योतिषी यह दोनों उपाय बताता नजर आयेगा | आप विद्वान् हैं | सोचिये | एक तरफ दान दे रहे हैं, दूसरी तरफ पहन रहे हैं,क्या अर्थ है इसका ?

वास्तव में, जिनका शनि दुर्लभ है, उन्हें ही लोहे की अंगूठी शुभ फल देगी | वह पहले से बढ़ा है, तो यह प्राणलेवा तक हो सकती है | ऐसे व्यक्ति के लिए शास्त्रों में लोहा दान देने का विधान है | तेल में भी यही स्थिति है | तेल दान भी दीजिये और भैरवजी की पूजा भी कीजिये, वह भी तेल जलाकर | दोनों विपरीत बातें हैं| आश्चर्य यह है कि नीलम पहनने में सावधानी की बात की जाती है , पर इनमें कोई सावधानी नहीं रखता | यह नीम-हकीम शास्त्रज्ञों की मुर्खता का परिणाम है|

अत: ज्योतिष के ग्रहों की स्थिति को देखें | यदि किसी ग्रह की शक्ति की आवश्यकता है, तो उस या उन देवी–देवता की पूजा करें | जो पहले से सशक्त हैं, उनकी पूजा कदापि न करें |

हाथ की हथेली और रेखाओं से

हाथ के ग्रह पर्वत एवं रेखाओं द्वारा भी देवी-देवता का चुनाव किया जा सकता है |

तंत्र विद्या के सूत्रों द्वारा

अंधेरे में बैठकर नाक की नोक पर भाव दृष्टि करते हुए अंगूठे को भृकुटियों के मध्य आज्ञाचक्र पर तीन मिनट तक आँखें बंद करके रखें | यदि मानस पटल पर अंदर अँधेरा है ,कोई प्रकाश नहीं है, कोई बिंदु प्रकाश नहीं है , तो शिवजी या उनके चन्द्रमा की पूजा करें |

यदि अन्य रंग का प्रकाश है , तो उस प्रकाश के विपरीत देवी-देवता का चुनाव करें | सूचि आगे है |

गुरु द्वारा निर्देशित निर्देश के अनुसार

सबसे उत्तम उपाय यह है | योग गुरु से गुरुदीक्षा लें और देवी, देवता या उनके मन्त्र का चुनाव उनके निर्देश के अनुसार करें | इससे सटीक परीक्षण हो जायेगा |

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