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कुरुकुल्ला पूजन एवं साधना विधान

प्रश्न – यह कुरुकुल्ला देवी क्या है? इनकी बहुत महिमा सुनी है । कहा जाता है कि इनकी पूजा-अर्चना से सभी प्रकार की सिद्धियाँ बहुत कम समय में प्राप्त हो जाती है। इनके बारे में कुछ बताईये।

उत्तर – देवी मार्ग की कई धाराओं में इस देवी की पूजा और साधना बलि-देवता के रूप में की जाती है। विशेष रूप से यह ‘नील तारा’ की बलि देवी है। ‘बलि’ का अर्थ यहाँ पशु बलि नहीं है। ‘बलि’ का व्यापक अर्थ है। प्रतीकात्मक रूप से ‘बलि’ में पशु बलि नैवेद्य आदि है; पर इसका आध्यात्मिक स्वरुप मानसिक है और गूढ़ रहस्यों से भरा है। निसंदेह यह शक्ति अत्यंत शक्तिशाली है और भोग प्रधान रूपों में ध्यान लगाने के कारण इनकी सिद्धि भी जल्दी प्राप्त होती है। ललिता श्री विद्या, भैरवी विद्या, तारा विद्या , कमला विद्या आदि में इनके भिन्न-भिन्न रूप ध्यान की सिद्धि की जाती है। कहीं इनका रूप रक्तिम लाल है, कहीं लाल है, कहीं गुलाबी , कहीं नीली सफेद हैं , तो कहीं श्याम वर्ण की।

इनका यंत्र इनके 25 अक्षरों के मंत्र, नौ कोणों के श्री यन्त्र में अष्टदल कमल के बाद चुतभुज में बने आठ कोणों और उसके बाद तीन वृतों से घिरा होता है। यह यंत्र अष्ट गंध , कुमकुम , सिन्दूर, ओड़हल के फूलों के रस, अनार के रस, डिम्बा फल के रस आदि से बनाया जाता है। केवल एक से भी बनता है। इसकी प्राण प्रतिष्ठा सिद्धि 2100 मन्त्रों से होती है। इनमें सभी देवियों की शक्ति निहित मानी जाती है; इसलिए अकेले इनकी भी पूजा – अर्चना की जाती है। इनकी नित्य गृहस्थ – पूजा भी होती है और इनकी साधना भी की जाती है।

लाभ – इसकी नित्य पूजा में 108 दिन तक 216 मंत्र के जप और 108 मंत्र का हवन करने से –

  1. घी के साथ कमल के फूल से – धन एवं सुख- समृद्धि
  2. नारियल के फलों को पीसकर गाय के दूध – शक्कर या केवल खीर से हवन करने पर धन एवं सुख समृद्धि की प्राप्ति
  3. मधु और घी से यश और विजय की प्राप्ति होती है; ऐसा गुप्त देवी-मार्गों में माना जाता है

साधना लाभ – इसकी सिद्धि 21 महीना उपर्युक्त संख्या में प्रतिदिन जप हवन करने से होती है। इसके साधाक अक्सर इसे अभिचार कर्मों के प्रयोग के लिए ही इन्हें सिद्ध करते है; जिनमें वशीकरण , आकर्षण , शांति , उच्चाटन , विद्वेषण आदि है।

 

यह बैताल सिद्धि और पिशाच सिद्धि क्या है?       

प्रश्न – क्या बैताल-पिशाच होते हैं? इनकी सिद्धि क्या है?

उत्तर – इस सम्पूर्ण रहस्य को जानने के लिए आपको धर्मालय के ‘सिद्धि साधनाओं के गुप्त नियम’ और ‘तन्त्र रहस्य’ का गंभीरता से अध्ययन करना पड़ेगा। इसे पहले ही विस्तार से बताया जा चुका है कि सिद्धियों के वैज्ञानिक सूत्र क्या है? सभी प्रकार की शक्तियां ब्रह्माण्ड में निहित है। आप अपने अंदर जिस भाव आ अभाव पैदा करेंगे ; वह आपको प्राप्त होगा।

बैताल, पिशाच – आदि निष्कृष्ट शक्तियां है और यदि आप मांस, मदिरा , श्मशान , एकांत , काम क्रीडा आदि से परहेज नहीं है , तभी ये शक्तियां सिद्ध होगी। इनके मंत्र कई है। इन्हें देवी या भैरव के अधीन माना जाता है और उन्ही के मन्त्रों से इनकी सिद्धि होती है। शाबर मंत्र अलग से भी हैं। ये तंत्र विद्या की भयानक शक्तियां है। ये शक्तियां यंत्र पर नहीं. तस्वीरों पर सिद्ध होती हैं।

प्रश्न – लिंग और योनि यंत्र क्या है?

उत्तर – ये शिवलिंग और आद्यायोनि यंत्र है। इनका निर्माण शास्त्रीय सूत्रों , मापों के अनुसार बेलपत्र के रस , कुमकुम , रक्त चन्दन आदि शुभ द्रवों से लिखे जाते हैं। इनमें रंग डालकर इसे मंत्र कूट से अंकित करके सिद्ध किया जाता है। ये कई प्रकार के होते हैं – वज्र लिंग , महावज्र लिंग , मेरु लिंग , महा लिंग, योनि, महा योनि, वज्र योनि आदि ।

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