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कुण्डलिनी जागरण का रहस्य

पहले यह समझना होगा की कुण्डलिनी कहते किसको हैं ? और इसके जागृत होने पर होता क्या है? कुण्डलिनी की एक श्रृंखला होती है।यह किसी अस्तित्त्व के मुख्या धुरी में 9 चक्रों में विद्यमान होती है|इसमें ऊर्जा की गति अधोगामी होती है।यानी ऊपर से नीचे की ओर होता है।इसके कारण इसके मध्य में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा का फ्लेम दबा रहता है।कुण्डलिनी साधना की शुरुआत नीचे की चक्र से होती है।उस फ्लेम में अतिरिक्त ताकत देकर नीचे की ओर प्रवाहित ऊर्जा को मानसिक बल से ऊपर उठाया जाता है|इस क्रिया से वह फ्लेम ऊंचा उठता है और उसके साथ ही उसको कवर करने वाली ऊर्जा भी ऊपर उठती है।जो पृथ्वी के गुरुत्त्वाकर्षण के कारण हमारे शरीर में या जीव-जन्तु के शरीर में सांप के फण की तरह हो जाती है।इससे मूलाधार की शक्ति बढती है और वहां अधिक ऊर्जा का उत्पादन होने लगता है |

इस ऊर्जा सर्प को आगे चक्र के पेंदे में ले जाया जाता है|जिससे अगला चक्र तेज हो जाता है|और फिर वही क्रिया दोहराई जाती है।इस तरह सारे चक्रों को बेधते हुए इसे मस्तष्क के सहस्त्रार चक्र के मध्य में ले जाया जाता है।नीचे से आती यह धारा (-) होती है और सिर के इस चक्र में गिरती धारा (+) होती है।इन दोनों के टकराने से स्फुलिंग पैदा होता है।इससे एक झमाका होता है और सहस्त्रार चक्र की ताकत बढ़ जाती है।इसके बाद इसके मध्य का छिद्र खुल जाता है, जो प्रदूषित रहता है|और ऊपर से वह अमृत जिसे हम गायत्री -सावित्री-गंगा-सती-सोमरस आदि कहते है वह अधिक मात्रा में प्राप्त होने लगता है ।इससे शरीर, मन, आयु, श्वांस, शक्ति आदि में गुणात्मक परिवर्त्तन होता है।वास्तविक कुण्डलिनी जागरण यह है।यह साधनाओं की एक श्रृंखला है।और इसे योग , ध्यान योग, तन्त्र , समाधि इत्यादि कई मार्गों से सिद्ध किया जाता है।यह हमारे मुख्या ऊर्जा चक्रों की साधना है।लेकिन आजकल लोग ये व्याख्या करने लगे है कि मूलाधार के सर्प के फण को ऊपर उठा दो कुण्डलिनी जागृत हो गयी! पर यह भारी मुर्खता है , यदि इसको यही छोड़ दिया गया , तो हममें काली की शक्ति बढ़ जायेगी और काम , क्रोध, हिंसा, ब्लडप्रेशर, आँखों का लाल होना और आक्रोश में आने पर मस्तिष्क का नियंत्रण टूट जाना आदि उत्पन्न हो जाएगा।यह महिषासुर है और इस महिषासुर का वध इस्क्को स्वाधिष्ठान चक्र की दुर्गा के अंदर ले जाना आवशयक होता है।इसका वध वही कर सकती है , वरना यह आदमी को असुर बना देंगा

 

 

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