कुंडली जागरण करना क्या है? 

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प्रति दिन कई फोन आते हैं कि मैं कुडली जागरण करना चाहता हूँ. यह ऐसा ही है, जैसे एक अनपढ़ कहे कि वह पी.एच.डी. करना चाहता है. इस विषय पर धमाॆलय के साइट पर बहुत कुछ है, पर ये लोग पढ़ते नहीं. अब इतना परिश्रम कौन करे? बस गुरू जी से सम्पकॆ करके टेकनीक जान लो और कुंडली जागरण कर लो. इसमें इनका दोष नहीं है, बाजारू बाबाओं ने तां‌त्रिक साधनाओं को भेल पूरी बनाने की जानकारी बना दिया है. इनके शिष्यों का कहना है कि उनके गुरू नि:स्वाथॆ हैं, किसी से कुछ नहीं लेते. यह कैसे मान लिया जाय कि जो झूठ की खेती कर रहा हो, वह नि:स्वाथॆ है? वह झूठ की खेती कर रहा है, यह आपभी जान जायेंगे, यदि थोड़ा परिश्रम करें और जो साधन‌ा आप करना चाहते हैं, उस पर उपलब्ध प्राचीन विवरणों को पढें.

इस विषय की किताब की दूकानों पर मिल जायेंगे. गोपनीय अन्दर की टेकनिक और मानसिक शारीरिक क्रियायें होती हैं. विधियाँ तो किताबों में वणिॆत हैं. मैनें 70% आधुनिक युग में अनावश्क जान कर हटा दिया है, तब तो केवल शुद्धि और अभिषेक में ही 21 दिन की विधि प्रक्रिया़ हो जाती है. वह भी साधारण साधनाओं में पुरा‌ने विवरण पढ़ेंगे, तो मष्तिक नाच जायेगा. शौच से ले कर, मुँह धोना, नहाना, नहा कर साधना स्थल पर जाना, फिर द्वार पूजा, गणपति पूजा, फिर चक्र के 52 देवताओं के पादुका पूजन, अस्त्र पूजन, देवता पूजन – ये हर साधना में बदल जाते हैं. इन गुरूओं को यह ज्ञात नहीं कि अघोर क्या है? श्मशान क्या है? चिता क्या है? चितामाँस भक्षण क्या है? पर महान अघोरी बाबा हैं? और करते क्या हैं? मजलिस में तरह तरह के सामान हवा में से उत्पन्न करके लोंगों को अचम्भित करते हैं. शराब की बोतलें खाली करके दिखाते हैं कि वे कितनी शराब पचा सकते हैं. पंथों साधनाओं की मिट्टी खराब करनेवालों इन लोगों से तो वह अघोर ही समझेगा, पर हम क्यों नहीं समझने का प्रयत्न करते हैं कि सनातन नियमों से परे कोई क्रिया नहीं होती फल पेड़ पर लगते हैं. कोई माई का लाल उसे हवा में पैदा नहीं कर सकता. कर रहा है, तो गहराई से परिक्षण करो, वह पकड़़ा जायेगा.

चमत्कार होते हैं, पर वे‌ सनातन नियमों के अन्तरगत ही होते हैं वास्तव में चमत्कार नाम की कोई चीज नहीं होती. जिन नियमों की जानकारी हमें नहीं होती, उनके अन्तरगत घटनेवाली क्रियायें चमत्कार लगती हैंऔर सनातन धमॆ के नियमों का विशाल समुद्र है, जिनकी जानकारी आधुनिक विश्व को नहीं है. ये ही नियम सिद्धि साधनाओं मे कामकरते हैं. लेकिन इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि हवा से सोना बरसने लगे. इस अन्तर को नहीं समझे, तो धन, धर्म, समय,जीवन सभी बबाॆद होगा. तब पता चलेगा कि मुफ्त का हलवा कितना मँहगा होता है. और लालच कितनी बुरी चीज होती है.

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3 Comments on “कुंडली जागरण करना क्या है? ”

  1. जे गुरुदेव ,
    मैने आप कि लिखि हुइ कुछ जान्कारियाँ पढ कर मै बहुत खुस हुँ साथ् मे मैं आप कि पिठ से जुड़ना चाहाता हुँ और कुछ बन्ने और खुद को जान्ना चाहाता हुँ लेकिन मै बहुत दुर सिक्किम में रहेता हुँ परिवार है मैं चोटी सी सकारी नोकरी कर के परिवार को भरण पोसन और पढाई आदि कर रहा हूँ| मगर मुझे मार्गदर्शन की आवश्यक है |क्या मुझे श्री गुरुदेव की आशीर्वाद से गृहस्त रहते हुए भी ये संभव है ?कृपया मार्गदर्शन करें |

    1. हमारे यहाँ कोई पंथ विशेष या पीठ नहीं चल रहा. यह वेबसाइट जनहित में सभी के लिए है. ज्ञान के लिए वेबसाइट के पोस्ट्स पढ़ें और कमैंट्स का सहारा लें.

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